उत्तराखंड में जंगली भालू का खौफ, स्कूल में वन विभाग के सुरक्षा घेरे में पढ़ रहे बच्चे
उत्तराखंड में जंगली भालुओं के बढ़ते आतंक के कारण, स्कूल जाने वाले बच्चे वन विभाग की सुरक्षा में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वन विभाग स्कूलों के आसपास सुरक्षा प्रदान कर रहा है ताकि बच्चों को किसी प्रकार का खतरा न हो। प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और आवश्यक कदम उठा रहा है।

वन विभाग की सुरक्षा में स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जागरण
जागरण संवाददाता, बागेश्वर। कमस्यार घाटी के टकनार और भैसूड़ी गांवों में पिछले एक सप्ताह से भालू की बढ़ती सक्रियता ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। सबसे अधिक प्रभावित छात्र हैं, जो भालू के खौफ के बीच वन विभाग की सुरक्षा में स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद वन विभाग की टीम गांवों में पहुंची और हालात का जायजा लेकर गश्त बढ़ा दी है।
भैसूड़ी के ग्राम प्रधान ने बताया कि भालू अपने दो शावकों के साथ करीब दस दिन पहले क्षेत्र में घुस आया था। रात के समय गांव में उसकी आवाजें साफ सुनाई देती हैं, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। दिनभर भी जंगलों में भालू की हरकतें देखी और सुनी जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चे खतरे में हैं, खासकर वे लड़कियां जो सात किलोमीटर दूर राइंका देवतोली पढ़ने जाती हैं।
अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है और लोग बच्चों को अकेले भेजने से डर रहे हैं। इधर, सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भैसूड़ी और टकनार गांव पहुंची। टीम ने गांवों में नियमित गश्त शुरू कर दी है और स्कूल में जाकर शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों से बातचीत की। बच्चों को समूह में चलने, आवाज करते हुए रास्ता तय करने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अभिभावकों को भी रात के समय अकेले घर से बाहर न निकलने को कहा गया।
गांव में लगाए गए ट्रैप कैमरों की जांच की जा रही है। यदि कैमरों में भालू की स्पष्ट मौजूदगी दर्ज हुई तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग पूरी सतर्कता में है और ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही ग्रामीणों से भी सहयोग और सजग रहने की अपील की गई है। - दीप जोशी, वन क्षेत्राधिकारी, कमस्यार घाटी, बागेश्वर

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