देहरादून, जेएनएन। लोगों से जुड़ी सेवाओं का कम्प्यूटरीकरण कर आम लोगों को लाभ देने और प्रमाण पत्रों को बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की योजना पर उत्तराखंड में कॉमन सर्विस सेंटर लगातार पलीता लगा रहे हैं। सीएससी चलाने वाले कुछ सेंटरों की ओर से ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आवेदन के लिए निर्धारित शुल्क से कई गुना ज्यादा वसूला जा रहा है। आवेदन के लिए निर्धारित शुल्क 30 रुपये निर्धारित किया गया है। लेकिन, सीएससी की ओर से 300 से लेकर 2500 तक का शुल्क वसूला जा रहा है।

उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग ने मामले में संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है। आयोग ने कार्रवाई करते हुए पांच सीएससी मैनेजरों को हटा दिया है, जबकि 77 सीएससी संचालकों की ई-डिस्ट्रिक्ट सॉफ्टवेयर चलाने की अनुमति निरस्त कर दी है। इसके साथ ही 180 संचालकों पर कार्रवाई की जा रही है। बता दें कि उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत राजस्व विभाग से जुड़ी आठ सेवाओं स्थायी निवास, चरित्र, हैसियत, आय, जाति, उत्तरजीवी, पर्वतीय, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र के साथ ही राज्य सेवायोजन कार्यालय में ऑनलाइन पंजीकरण, नवीनीकरण आदि सेवाओं को ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से जोड़ा गया है। 

इस पोर्टल पर ई-डिस्ट्रिक्ट केंद्रों एवं कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है। उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग ने जब विभिन्न शिकायतों के बाद इनकी जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुछ संचालकों की ओर से आवेदन के लिए 30 रुपये की जगह 200-300 रुपये प्रति आवेदन वसूले जा रहे थे। किसी मामले में तो आवेदकों से दो से ढाई हजार रुपये प्रति आवेदन वसूलना पाया गया।

आयोग के सचिव पंकज नैथानी ने बताया कि इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर 77 सीएससी संचालकों की अनुमति निरस्त कर दी गई है और 180 संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बताया कि आयोग ने यह निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक सीएससी केंद्र पर निर्धारित रेट सूची बड़े अक्षरों में ऐसे स्थानों पर चस्पा किया जाए, जिसे लोग आसानी से देख सकें। 

साथ ही सूची में अधिक शुल्क वसूलने पर किस अधिकारी से शिकायत करनी है, उनके नंबर भी लिखने को कहा है। कहा कि वर्तमान में 4400 आवेदन लंबित पड़े हैं। जिसके लिए संबंधित राजस्व कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

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Posted By: Sunil Negi

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