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    'इंटेंसिव केयर शेल्टर योजना' ने बदला 267 बच्चों का भविष्य, कटोरे की जगह किताबें थाम रहे मासूम

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 02:21 PM (IST)

    देहरादून जिलाधिकारी सविन बंसल की 'इंटेंसिव केयर शेल्टर योजना' ने 267 बच्चों का भविष्य बदला है। मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में यह पहल बच्चों को भिक ...और पढ़ें

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    इंसेंटिव केयर सेंटर में पढ़ाई और गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते भिक्षावृत्ति से मुक्त किए गए बच्चे। सूवि

    अंकुर अग्रवाल, देहरादून। सड़कों पर बिखरे बचपन, हाथों में भीख का कटोरा और आंखों में असहायता। इन तस्वीरों को पीछे छोड़ते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने शिक्षा के उजाले की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए एक आशा की किरण बनकर उभर रही है।

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    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर अब तक 267 बच्चों के जीवन की दिशा बदल चुका है, जिनमें 154 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि भिक्षावृत्ति की गिरफ्त में फंसे बच्चों को मुक्त कर शिक्षा व समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की यह मुहिम नए साल-2026 में और गति पकड़ेगी।

    जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर शेल्टर योजना लगातार प्रभावी साबित हो रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भिक्षावृत्ति उन्मूलन को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए बच्चों के लिए साधुराम इंटर कालेज परिसर में स्थापित इंटेंसिव केयर शेल्टर में शिक्षा, खेल और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

    यहां बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, पठन-पाठन, चित्रकला और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। शेल्टर में आने के बाद बच्चों की पढ़ाई के प्रति रुचि में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि इस साल-2026 में शेल्टर योजना को और व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए माइक्रो प्लानिंग पर कार्य चल रहा है। भिक्षावृत्ति उन्मूलन से जुड़े सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शहर में कोई भी बच्चा भीख मांगता हुआ न दिखाई दे।

    सवा साल पहले शुरू हुई थी मुहिम

    जिला-प्रशासन की ओर से सवा साल पूर्व शुरू की गई यह पहल आज अपने ठोस परिणामों के साथ सामने है। अंतिम छोर पर खड़े बच्चों को मुख्यधारा में लाने का यह प्रयास केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय संकल्प का उदाहरण है।

    जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। परिस्थितियां कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 154 बच्चों का स्कूलों में दाखिला भले ही हो चुका हो, लेकिन पूर्ण सेचुरेशन तक अभियान निरंतर जारी रहेगा। रेस्क्यू किए गए बच्चों को इंटेंसिव केयर सेंटर में केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, खेल, योग और मानसिक काउंसलिंग जैसी प्रीमियम सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके लिए विस्तृत एसओपी भी तैयार की गई है।

    267 बच्चों का बदला भविषय

    दिसंबर-2025 तक प्रशासन ने दून में 83 बच्चों को भिक्षावृत्ति, 117 बच्चों को कूड़ा बीनने जबकि 67 बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया है। इंटेंसिव केयर सेंटर बच्चों के लिए केवल एक केंद्र नहीं, बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत बन गया है। यहां मानसिक रूप से सशक्त करने के बाद बच्चों को चरणबद्ध तरीके से सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जा रहा है। बच्चों के आवागमन के लिए विशेष कैब की व्यवस्था तक की गई।

    जिन बच्चों ने भिक्षावृत्ति को मजबूरी मान लिया था, उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था और शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। शेल्टर में बच्चों को मनोरंजन, खेलकूद और सर्वांगीण विकास से जुड़ी गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है, ताकि वे सामान्य सामाजिक जीवन से जुड़ सकें। अगर संकल्प मजबूत हो, तो सड़कों पर भटकता बचपन भी स्कूल की घंटी सुन सकता है, और यही सुशासन की असली पहचान है। -सविन बंसल, जिलाधिकारी

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