85 साल के व्यक्ति को 15 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, सात वर्ष तक की सजा का दिखाया डर; ठगे 68 लाख रुपये
देहरादून में साइबर ठगों ने एक 85 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को 15 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर 68 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को बीएसएनएल कर्मी और मु ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, देहरादून : साइबर ठगों ने 85 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 68 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपितों ने खुद को बीएसएनएल कर्मी और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को गिरफ्तारी का भय दिखाया। मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।
तपोवन रायपुर निवासी राजकुमार के अनुसार, वह एक्सपोर्ट का कारोबार करते थे। 22 अक्टूबर को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर खुद को बीएसएनएल कर्मचारी बताया और फोन नंबर बंद करने की बात कही।
इसके बाद काल को दूसरे व्यक्ति से जोड़ा गया, जिसने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर कैनरा बैंक में खाता खोलकर मनी लान्ड्रिंग की गई है।
उन्हें बताया गया कि मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। आरोपितों ने खुद को सीबीआइ पुलिस आफिसर इंचार्ज संदीप राव व इन्वेस्टिगेशन आफिसर शिवा सुब्रमणि, साइबर क्राइम डिपार्टमेंट मुंबई बताया।
वाट्सएप पर एफआइआर की कापी, किसी नरेश गोयल की फोटो और मनी लान्ड्रिंग से जुड़े दस्तावेज भेजे। ठगों ने दावा किया कि नरेश गोयल के घर से बरामद 200 डेबिट कार्ड में एक कार्ड उनका है, जिससे दो करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ और 20 लाख रुपये कमीशन उन्हें मिला है। आरोपितों ने इसे नेशनल सिक्योरिटी का मामला बताकर किसी को सूचना देने पर सात साल तक की सजा का डर दिखाया।
22 अक्टूबर से चार नवंबर तक बुजुर्ग को 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और हर दो घंटे में वीडियो काल से रिपोर्ट करने को कहा गया। इसके बाद चार बैंक खातों में रकम जमा कराने को कहा गया। 19 अक्टूबर से तीन नवंबर के बीच पीड़ित ने कुल 68 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। चार नवंबर को पुलिस क्लीयरेंस का फर्जी सर्टिफिकेट भेजकर पैसे लौटाने का भरोसा दिया गया, लेकिन संपर्क टूटने पर ठगी का पता चला।

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