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प्रयागराज में दशकों से बंद मेजा व मऊआइमा कताई मिलों की दूर होगी वीरानी, सुनाई पड़ेगी मशीनों की गड़गड़ाहट

By Jagran News Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 01 Jan 2026 05:12 PM (IST)

प्रयागराज की बंद पड़ी मेजा और मऊआइमा कताई मिलों में जल्द ही रौनक लौटने वाली है। सरकार ने इन मिलों ...और पढ़ें

प्रयागराज की बंद पड़ी मिलों को पुनर्जीवित करने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए टेक्सटाइल पार्क बनाने की योजना बनाई जा रही है।

प्रयागराज की बंद पड़ी मिलों को पुनर्जीवित करने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए टेक्सटाइल पार्क बनाने की योजना बनाई जा रही है।

HighLights

  1. ये दोनों बंद मिलें बनेंगी टेक्सटाइल पार्क, नए उद्योगों को 5 हजार करोड़ का होगा निवेश  

  2. 'फार्म-टू-फाइबर-टू-फैक्ट्री-टू-फैशन-टू-फारेन' (फाइव एफ) विजन पर पार्क होगा आधारित

  3. नए वर्ष में उद्योगों की स्थापना को बढ़ेंगे कदम, नैनी में चार एकड़ एक कंपनी बनेगी

ज्ञानेंद्र सिंह, प्रयागराज। दशकों से बंद कताई मिलों की वीरानी दूर होने जा रही हैं। ये मिलें पहले जैसे ही गुलजार होंगी, जहां फैक्ट्रियों की मशीनों की गड़गड़ाहट सुनाई देगी। इन मिलों की जमीन उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को दे दी गई है, जो टेक्सटाइल पार्क के रूप में विकसित कर यहां नई फैक्ट्रियों की स्थापना कराएगा। अनुमान लगाया गया है कि इन मिलों में लगभग 550 फैक्ट्रियां स्थापित कराई जा सकेंगी, जिनमें पांच हजार करोड़ रुपये के करीब का निवेश का अनुमान लगाया गया है।

कताई मिलों में उद्योग स्थापित करने की तैयारी 

शासन के निर्देश पर यमुनापार में मेजा तथा गंगापार में मऊआइमा एवं बांदा कताई मिलों में उद्योग स्थापित करने लिए सरकार की ओर से कताई मिलों की भूमि यूपीसीडा को दी गई है। यूपीसीडा अब इन मिलों की भूमि को विकसित कराकर उद्योगों के लिए प्लाट आवंटित करेगा। सबसे ज्यादा जमीन 175 एकड़ मेजा कताई मिल के पास है।

बांदा मिल की भूमि भी यूपीसीडा के नाम हुई 

मऊआइमा मिल की 83 एकड़ व बांदा मिल की 100 एकड़ जमीन भी यूपीसीडा के नाम कर दी गई है। इसमें 2100, 3500, 10 हजार वर्ग मीटर के प्लाट काटे जाएंगे। कुछ प्लाट दो व पांच एकड़ के भी हैं, जिनमें बड़े उद्योग लगाए जा सकेंगे। मेजा कताई मिल तथा मऊआइमा कताई मिल की सभी मशीनें निकाली जा चुकी हैं। इनके भवनों को भी ध्वस्त करा दिया गया है।

मशीनों में लग गई जंग 

मेजा कताई मिल पिछले दो दशक से बंद पड़ी थी। मिल के बंद होने से मशीनों में जंग लग गई थी। बिल्डिंग जर्जर हो चुकी थी। जितने कर्मचारी थे, वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले चुके हैं। लगभग डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मऊआइमा कताई मिल भी बंद थी। अब इन मिलों को टेक्सटाइल पार्क घोषित किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुका है।

टेक्सटाइल पार्क होगा औद्योगित क्षेत्र

टेक्सटाइल पार्क (वस्त्र पार्क) एक औद्योगिक क्षेत्र होगा, जहां कपड़ा उद्योग से जुड़ी सभी सुविधाएं जैसे उत्पादन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विकास एक ही जगह मिल सकेगी। इससे निवेश, रोज़गार और निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारत सरकार 'पीएम मित्र' योजना के तहत ऐसे मेगा टेक्सटाइल पार्क देश के कई राज्यों में स्थापित कर रही है, जो फार्म-टू-फाइबर-टू-फैक्ट्री-टू-फैशन-टू-फारेन (फाइव एफ) विजन पर आधारित हैं, ताकि भारत को वैश्विक वस्त्र केंद्र बनाया जा सके।

क्या कहते हैं यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक

यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक संतोष कुमार का कहना है कि मेजा, मऊआइमा व बांदा कताई मिलों की जमीन पहले ही मिल गई है। भूमि का सीमांकन करा लिया गया है। अब इनमें टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जाएगा। यहां निवेश के लिए संबंधित सेक्टर के एसोसिएशन को पत्र भेजे जा रहे हैं।

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