पोस्टमार्टम हाउस में तीन दिन तक रखा रहा नवजात का शव, SRN अस्पताल में भर्ती मानसिक रूप से अस्वस्थ मां चली गई
प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला ने बच्ची को जन्म दिया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। माँ की हालत नाजुक थी और वह अपने ब ...और पढ़ें

प्रयागराज की कर्नलगंज थाना पुलिस ने मां के लापता होने के बाद नवजात का अंतिम संस्कार किया।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। नियति भी क्या-क्या खेल दिखाती है। तीन दिन पहले जन्मी एक नन्हीं परी ने अभी आंखें भी नहीं खोली थी कि उसकी सांसों की डोर टूट गई। अपनों के नाम पर सिर्फ एक मां थी, लेकिन वह तो सुध-बुध खोए बैठी थी। जब कोई अपना न आया तो पुलिस ने तीन दिन से मर्च्युरी में रखे बच्ची के शव का शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करा दिया।
डॉक्टरों ने आपरेशन से प्रसव कराया
29 जनवरी को डफरिन अस्पताल से एक गर्भवती को एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया था। महिला के साथ तीमारदार के नाम पर कोई नहीं था। उसकी हालत भी बेहद नाजुक थी। जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए चिकित्सकों ने तत्काल आपरेशन से महिला का प्रसव कराया। इसमें महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन उसकी हालत भी गंभीर थी।
चिल्ड्रेन अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत
डाॅक्टरों ने बच्ची को चिल्ड्रेन अस्पताल भेज दिया। वहां कुछ घंटे बाद ही इलाज के दौरान नवजात की सांसें थम गई। सूचना मिलने पर कर्नलगंज थाने की पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद तीन दिन तक वह एसआरएन अस्पताल की पोस्टमार्टम हाउस में रखा रहा। इस इंतजार में कि शायद कोई उसका अपना आ जाए, लेकिन कोई नहीं आया।
महिला अपने बारे में कुछ नहीं बता सकी
उधर, एसआरएन में भर्ती उसकी मां पहले बेहोश थी। बाद में होश आने के बाद भी वह अपने बारे में कुछ बता नहीं सकी। न तो उसे अपने घर का पता याद था और न ही नाम। यहां तक कि उसने अपनी बच्ची के बारे में भी नहीं पूछा। वह गर्भवती कैसे हुई, यह भी नहीं बता सकी। इसी बीच अचानक वह अपने बेड से गायब हो गई। अस्पताल कर्मचारियों ने काफी खोजबीन की, फिर भी उसका कुछ पता नहीं चला। इधर, तीन दिन बाद जब बच्ची के घर वाले नहीं आए तो शनिवार को पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर अंतिम कर दिया।
क्या कहते हैं इंस्पेक्टर कर्नलगंज?
इस संबंध में इंस्पेक्टर कर्नलगंज संजय कुमार सिंह का कहना है कि तीन दिन पहले नवजात की चिल्ड्रेन में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उसकी मां अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन वह अपने बारे में कुछ भी नहीं बता पा रही थी। बच्ची का अन्य कोई स्वजन था नहीं, इसलिए पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करा दिया गया।

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