प्रयागराज माघ मेला में बड़े कमाल की हैं सीटियां और बेंत... बिना असलहे के तितर-बितर करती हैं भीड़
प्रयागराज माघ मेला में नागरिक सुरक्षा संगठन के स्वयंसेवक संगम नोज और अन्य घाटों पर अपनी सीटियों और बेंत के माध्यम से भीड़ को नियंत्रित कर रहे हैं। उनक ...और पढ़ें

प्रयागराज माघ मेला में संगम नोज पर सीटी बजाकर अनावश्यक लोगों को हटाते नागरिक सुरक्षा संगठन के स्वयं सेवी। जागरण
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। हाथ में न बेंत और न ही सरकारी असलहे। किसी तरह के अन्य संसाधन भी नहीं जिनसे भीड़ को तितर-बितर किया जा सके। सीटियां ही काफी हैं जिनके बजते ही लोगों में भय उत्पन्न हो जाता है और अनावश्यक खड़े रहने की हिम्मत नहीं पड़ती। यह नागरिक सुरक्षा संगठन के स्वयंसेवकों का अपना तरीका है। इसकी बदौलत संगम समेत अन्य घाटों पर स्नानार्थियों के लिए बाधा उत्पन्न करने वाले अनावश्यक लोगों को हटाया जाता है। नागरिक सुरक्षा संगठन के स्वयं सेवकों की सीटियां बड़े कमाल की हैं।
प्रयागराज माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ शनिवार से हो चुकी है। संगम के अलावा वीआइपी घाट, किलाघाट, दारागंज, पांटून पुलों के आसपास स्नान घाटों पर पीले रंग की जैकेट और टोपी पहने स्वयंसेवक दिख जाएंगे। कुछ के कंधे पर स्टार होगा और गले में लटकी सीटियां। बस इतनी ही पहचान है स्वयंसेवकों की।
भीड़ का दबाव बढ़े या फिर स्नानार्थी महिलाओं के आसपास अनावश्यक खड़े लोगों को देख बजने लगती हैं इनकी सीटियां। लोग अपने कदम स्वयं ही पीछे करने लगते हैं और स्नान घाट पल भर में खाली हो जाता है। संगम नोज पर नागरिक सुरक्षा संगठन के डिप्टी वार्डेन हिमांशु गुप्ता अपनी टीम के साथ घाट पर भीड़ को नियंत्रित करते हुए मिले। इनके रहते किसी में साहस नहीं हो पा रहा था कि मोबाइल कैमरे से फोटो खींच ले। सवाल महिलाओं के स्नान करते समय उनकी निजता का जो है।
हिमांशु गुप्ता और नागरिक सुरक्षा संगठन के चीफ वार्डेन अनिल कुमार गुप्ता 'अन्नू' कहते हैं कि सीटियों में बड़ी ताकत होती है। प्रशिक्षण प्राप्त स्वयंसेवक यह भी जानते हैं कि सीटियाें का इस्तेमाल कहां कैसे और किन परिस्थिति में करना है। इन जनसेवा के बदले स्वयं सेवकों को कुछ पारिश्रमिक नहीं मिलता, स्वेच्छा से लोग जुड़ते हैं और इसी तरह से मां गंगा के प्रति श्रद्धा भाव का समर्पण होता है।

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