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    PM Awas Yojana : अपात्रों ने भी मांगा पक्का घर, AI ने पकड़ा फर्जीवाड़ा, सत्यापन के बाद सूची से कटेगा नाम

    By Jagran News Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 02:28 PM (IST)

    PMi Awas Yojana प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पिछले वर्ष हुए सेल्फ सर्वे में बड़ी संख्या में आवेदन संदिग्ध पाए गए। AI ने तस्वीरों के आधार पर ...और पढ़ें

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    PM Awas Yojana प्रधानमं9ी आवास योजना में फर्जीवाड़ा हुआ, AI की मदद से अपात्रों की पहचान की गई है। 

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। PM Awas Yojana प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पिछले वर्ष हुए सेल्फ सर्वे में बड़े पैमाने पर आवेदन संदिग्ध मिले हैं। सर्वे में अपलोड तस्वीरों के आधार पर एआइ ने इन्हें पकड़ा है। अपात्र होने की आशंका पर इनकी सूची ब्लाकों को भेजी गई है। इस सूची में सबसे ज्यादा नाम सेल्फ सर्वे वालों का है। अब इनका सत्यापन हो रहा है। इनमें जो अपात्र मिलेगा, उसका नाम सूची से काट दिया जाएगा।

    सेल्फ सर्वे में डेढ़ लाख से अधिक आनलाइन हुए थे आवेदन

    PM Awas Yojana पिछले साल हुए पीएम आवास योजना ग्रामीण के सेल्फ सर्वे में करीब 1.60 लाख आवेदन आनलाइन हुए थे। इसमें से करीब 71 हजार सर्वे लोगों ने खुद किए थे। शेष सर्वे कर्मचारियों द्वारा किए गए थे। इसी सर्वे के माध्यम से आवेदन हुए थे। शासन की ओर आनलाइन इन आवेदनों का एआइ के माध्यम से सत्यापन कराया गया। इसमें बड़ी संख्या में आवेदन संदिग्ध मिले।

    सबसे अधिक कोरांव ब्लाक के आवेदन संदेह के घेरे में 

    PM Awas Yojana कोरांव ब्लाक के 16800 आवेदनों में लगभग 4800 संदेह के घेरे में हैं। इसी तरह चाका में 1600 के सापेक्ष लगभग 750, सोरांव में 4700 के सापेक्ष 2500 और मांडा में 6000 के सापेक्ष 1400 आवेदन संदिग्ध मिले हैं। कुछ यही हाल जिले के अन्य ब्लाकों का है। इन सर्वे के आवेदकों के अपात्र होने की आशंका है।

    संदिग्धों में सबसे अधिक आवेदन सेल्फ सर्वे के 

    PM Awas Yojana विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध मिले आवेदनों में सबसे ज्यादा सेल्फ सर्वे वाले हैं। अब ब्लाक स्तर पर इनका सत्यापन कराया जा रहा है। कहीं पर 60 तो कहीं पर 80 फीसद सत्यापन हो चुका है। 

    तस्वीर में दिखी पक्की दीवार तो हुए संदिग्ध

    सर्वे के दौरान आवेदनों की कच्ची कोठरी या झोपड़ी की तस्वीर अपलोड की गई है। इन तस्वीरों में पक्के आवासों के दीवारों व छतों की झलक आते ही एआइ उसे पकड़ ले रहा है। उम्मीद है कि जिन संदिग्ध आवेदनों का सत्यापन हो रहा है उनमें तमाम अपात्र भी मिलेंगे। यह वह लोग हैं, जिनके पहले से पक्के मकान हैं। फिर भी आवेदन कर दिया।

    क्या कहते हैं अधिकारी?

    जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक भूपेंद्र सिंह का इस संबंध में कहना है कि सेल्फ सर्वे में संदिग्ध मिले आवेदनों का सत्यापन हो रहा है। इसमें अपात्र मिलने वाले आवेदकों के नाम हटाए जाएंगे।

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