संगम तट गंगा पूजन से पंचकोशी परिक्रमा का शुभारंभ, पहले दिन संत और श्रद्धालु तीर्थराज के इन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद तीर्थराज प्रयाग की धार्मिक परंपरा को संरक्षित करने के लिए पंचकोशी परिक्रमा कर रहा है। संगम तट पर गंगा पूजन के बाद यात्रा शुरू ...और पढ़ें

तीर्थराज प्रयाग में पंचकोशी परिक्रमा के शुभारंभ से पूर्व संगम तट पर गंगा पूजन करते संत-महात्मा व अन्य गणमान्य लोग। जागरण
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। तीर्थराज प्रयाग की धार्मिक और पौराणिक परंपरा का संरक्षण करने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद पंचकोशी परिक्रमा निकाल रहा है। संगम तट पर अखाड़ा परिषद व मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी के नेतृत्व में गंगा पूजन हुआ।
अक्षयवट पर मत्था टेका
गंगा पूजन में अखाड़ा परिषद के महामंत्री व जूना अखाड़ा के संरक्षक महंत हरि गिरि, सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, मेलाधिकारी ऋषिराज सहित विभिन्न सम्प्रदाय के संत शामिल हुए। विधि-विधान से पूजन के बाद यात्रा आरंभ हुई। सर्वप्रथम अक्षयवट पर मत्था टेका। इसके बाद बड़े हनुमान जी का पूजन किया।
पहले दिन सिद्धपीठ समेत विभिन्न मंदिरों में पूजन
पांच दिवसीय परिक्रमा के पहले दिन दत्तात्रेय मंदिर (जूना अखाड़ा), सरस्वती कूप, रामघाट, मौजिगिरि समाधि, सिद्धपीठ मां ललिता देवी, मां कल्याणी देवी तथा वनखडी महादेव जैसे प्रमुख स्थलों पर संत और श्रद्धालु जाकर दर्शन-पूजन करेंगे।
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने परिक्रमा की बताई महिमा
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने बताया कि मुगलों के शासनकाल में तीर्थराज प्रयाग सहित तमाम धार्मिक स्थलों में परिक्रमा रुकवा दी गई थी। सनातन धर्मावलंबियों पर अत्याचार किया गया। अखाड़ा परिषद सदियों से रुकी परंपरा को पुन: शुरू करवा रहा है। इसके माध्यम से जन-जन को उनकी परंपरा, संस्कृति और सभ्यता से जोड़ा जा रहा है।
पंचकोशी परिक्रमा बिना फल प्राप्ति नहीं : महंत हरि गिरि
यात्रा का संयोजन कर रहे महंत हरि गिरि ने कहा कि तीर्थराज प्रयाग में पंचकोशी परिक्रमा किए बिन पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती। हर क्षेत्र में प्राचीन मंदिर स्थित हैं, लेकिन अधिकतर लोग उसे नहीं जानते। वह संगम स्नान करके लौट जाते हैं। इसके प्रति जागरूकता लाने के लिए अखाड़ा परिषद की ओर से परिक्रमा करवाई जाती है।

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