रेलवे अधिकारियों को 31 जनवरी तक देना होगा अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा, लापरवाही पर रुकेगा प्रमोशन
रेल मंत्रालय ने ग्रुप ए और बी के अधिकारियों को अपनी अचल संपत्ति का वार्षिक रिटर्न 31 जनवरी तक ऑनलाइन पोर्टल स्पैरो पर जमा करने का निर्देश दिया है। अब ...और पढ़ें

रेलवे अधिकारियों को संपत्ति का ब्योरा 31 जनवरी तक देना होगा, रेल मंत्रालय ने डेटलाइन तय कर दी है।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भारतीय रेलवे के प्रशासनिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है। रेल मंत्रालय ने ग्रुप 'ए' और ग्रुप 'बी' के सभी अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए अपनी अचल संपत्ति का वार्षिक रिटर्न (AIPR) दाखिल करने का निर्देश जारी कर दिया है। रेलवे बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वर्ष 2025 के लिए संपत्ति का यह लेखा-जोखा 31 जनवरी 2026 तक हर हाल में आनलाइन पोर्टल 'स्पैरो' (SPARROW) पर जमा करना होगा।
कागजी कार्रवाई का दौर खत्म, अब सब कुछ डिजिटल
अब वह दौर बीत गया जब अधिकारी अपनी संपत्ति का ब्योरा फाइलों में दबा कर रखते थे। रेलवे बोर्ड के अंडर सेक्रेटरी अशोक कुमार द्वारा जारी ताजा सर्कुलर के अनुसार अब सभी अधिकारियों को अपनी अचल संपत्ति की जानकारी केवल 'स्पैरो' सिस्टम के जरिए ही देनी होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी ऑफलाइन या किसी अन्य माध्यम से रिपोर्ट भेजता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, केवल उन्हीं मामलों में छूट दी जाएगी जहां तकनीकी कारणों से अधिकारी का डेटा पोर्टल पर उपलब्ध न हो।
विरासत से लेकर कर्ज तक की जानकारी
यह निर्देश रेलवे सेवा (आचरण) नियमावली, 1966 के नियम 18 (1) (li) के तहत दिया गया है। इसके मुताबिक, अधिकारियों को न केवल अपने नाम पर खरीदी गई जमीन या मकान की जानकारी देनी है, बल्कि विरासत में मिली संपत्ति, लीज पर लिए गए प्लॉट और गिरवी रखी गई संपत्तियों का भी पूरा विवरण देना अनिवार्य है। नियम इतने कड़े हैं कि अधिकारी को अपने परिवार के सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर रखी गई संपत्ति का खुलासा भी पारदर्शिता के साथ करना होगा।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
दरअसल रेलवे में अब तक संपत्ति का ब्योरा मैनुअल तरीके से जमा किया जाता था। इस पुरानी व्यवस्था के कारण न केवल प्रशासनिक काम में देरी होती थी, बल्कि जब रेल अधिकारियों को 'सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम' के तहत पैनल में शामिल करने की बारी आती थी, तो डेटा जुटाने में महीनों लग जाते थे। इससे अधिकारियों के प्रमोशन और प्रतिनियुक्ति (Deputation) में भी बाधा आती थी। अब 'स्पैरो' सिस्टम के जरिए यह प्रक्रिया बिजली की रफ्तार से पूरी होगी, जिससे पारदर्शिता भी आएगी और भ्रष्टाचार पर लगाम कसना आसान होगा।
अधिकारियों को अंतिम चेतावनी
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों (PUs) और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के महाप्रबंधकों को निर्देश दिया है कि वे अपने अंतर्गत आने वाले सभी अधिकारियों को समय सीमा के भीतर रिटर्न भरने के लिए सूचित करें। एक जनवरी 2026 से ही आनलाइन विंडो खुल चुकी है। अधिकारियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख यानी 31 जनवरी का इंतजार न करें, क्योंकि तकनीकी लोड के कारण पोर्टल पर अंतिम समय में दिक्कतें आ सकती हैं।
नजरअंदाज करने वालों की पदोन्नति की राह होगी मुश्किल
जो अधिकारी इस डेडलाइन को नजरअंदाज करेंगे, उनके लिए आने वाले समय में विजिलेंस क्लीयरेंस और पदोन्नति की राह मुश्किल हो सकती है। रेलवे का यह कदम सिस्टम को हाईटेक और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग माना जा रहा है।

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