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    कक्षा चार के उर्दू विषय में जुड़ा नया पाठ ‘बेगम हजरत महल’, प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के विद्यार्थी पढ़ेंगे

    By Jagran News Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 02:01 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कक्षा चार के उर्दू विषय में अब ‘बेगम हजरत महल’ पाठ को शामिल किया गया है। राज्य शिक्षा संस्थान ने ...और पढ़ें

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    उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कक्षा चार के उर्दू पाठ्यक्रम में बेगम हजरत महल नया अध्याय शामिल किया गया है। 

    राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में चरणबद्ध ढंग से लागू किए जाने के क्रम में अब कक्षा चार में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इसके लिए राज्य शिक्षा संस्थान ने एनसीईआरटी आधारित कक्षा चार के पाठ्यक्रम को उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विषयवार कस्टमाइज किया है।

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    इसमें भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन, संस्कृत , कला, उर्दू एवं अंग्रेजी विषय की पाठ्यपुस्तकें शामिल हैं। उर्दू विषय की पाठ्यपुस्तक ‘सितार’ में ‘नज्म शाम’ के स्थान पर ‘सोने वाले जागो नज्म’ और ‘बहादुर रूपा’ की जगह ‘बेगम हजरत महल’ पाठ जोड़ा गया है। इसमें उनका संक्षिप्त इतिहास पढ़ाया जाएगा।

    राज्य सरकार कक्षा तीन तक में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कर चुकी है। वर्ष 2026 से कक्षा चार में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किए जाने की तैयारी है। राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य राजेन्द्र प्रताप ने प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज की गई पुस्तकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को भेज दिया है।

    उर्दू विषय में कक्षा चार के विद्यार्थी जंग-ए-आजादी में बेगम हजरत महल के योगदान को पढ़ेंगे। इसी तरह गणित की पाठ्यपुस्तक ‘गणित मेला’ में कर्नाटक के जैन मंदिर के चित्र व संबंधित अभ्यास प्रश्न की जगह राम मंदिर (अयोध्या) का चित्र एवं संबंधित अभ्यास प्रश्न शामिल किया गया है।

    डेजी और लाऊ मेघालय के शिलांग को नाम परिवर्तित करके वैभव और बबली प्रदेश के प्रयागराज, पुसाव (व्यंजन) की जगह केक वकांडा गांव के सामुदायिक पुस्तकालय का नाम बदलकर प्रयागराज जनपद के राजकीय पुस्तकालय नाम कर प्रदेश के स्थानीय परिवेश व विशेषताओं के आधार पर कस्टमाइज किया गया है।

    इसके अलावा कला विषय की बांसुरी पाठ्यपुस्तक में बनारस घराना में पं. छन्नूलाल मिश्र एवं उप शास्त्रीय गायन की विदुषी गिरिजा देवी का चित्र, कजरी (पारंपरिक लोकगीत वर्षा गीत एवं संबंधित चित्र) के साथ प्रदेश की विशेषता को ध्यान में रखकर कुछ और बदलाव के साथ एन325सीईआरटी के पाठ्यक्रम में कस्टमाइज किया गया है। इसी तरह अन्य विषयों में भी प्रदेश की विशेषता को समाहित किया गया है।

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