नोएडा [कुंदन तिवारी]। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) के आदेश के अनुपालन में उप संभागीय परिवहन कार्यालय, गौतमबुद्धनगर ने बड़ा फैसला लिया है। इसमें दस वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल के 50 हजार वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया है। इसके बाद ये 50,000 वाहन सड़क से नियमित समय अंतराल के बाद सड़क से हटने शुरू हो जाएगे।

वहीं, नियमानुसार निरस्तीकरण कार्रवाई के बाद छह माह के अंदर इन्हें सड़क से हटाया जाना है। इन सभी वाहन का विभाग 18 अप्रैल 1998 के बाद दो पहिया व चार पहिया वाहनों की श्रेणी में पंजीयन हुआ है। कई बार-बार नोटिस के जरिए सूचित वाहन स्वामियों को सूचित किया जा चुका है, लेकिन वाहन स्वामियों ने पंजीयन प्रमाण पत्र कार्यालय पर प्रस्तुत नहीं किया, ऐसे बुधवार को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) अरुणेंद्र कुमार पांडेय ने कार्रवाई कर दी।

सितंबर में दस हजार से वाहनों का पंजीयन हुआ था निरस्त

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाल ही में एनसीआर में संचालित होने वाले डीजल-पेट्रोल वहनों की एक आयु निर्धारित की थी। यह आयु डीजल वाहनों के लिए 10 वर्ष व पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष है। इसके बाद यह वाहन दिल्ली एनसीआर में पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिए गए। एनजीटी के आदेश के बाद परिवहन विभाग कार्यालय पर लगातार ऐसे वाहनों को सूचीबद्ध करने का काम किया जा रहा था, जो नियमानुसार एनसीआर में संचालित ही नहीं हो सकते है।

बार-बार नोटिस से भी सबक नहीं ले रहे थे लोग

ऐसे में 21 सितंबर को परिवहन विभाग की ओर से 10328 वाहनों की सूचीबद्ध कर निरस्त कर दिया गया था, जबकि इन वाहनों को स्वामियों को विभाग से कई बार नोटिस जारी किया गया, लेकिन किसी भी वाहन स्वामी ने अपना पंजीयन प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया। इसलिए वाहनों का पंजीयन छह माह के लिए पिछले दिनों निलंबित कर दिया गया। इसकी मियाद पूरी होने के बाद अौर विभाग को कोई जवाब नहीं मिलने के बाद केंद्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा-54 एवं 55 (2) (3) के तहत दो पहिया व चार पहिया कुल 10,328 वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया। इसमें नोएडा कार्यालय से यूपी 16 सीरीज की सभी वाहन शामिल है। जबकि 17 सीरीज गाजियाबाद कार्यालय से संबद्ध रही।

सितंबर में हुआ 10,000 वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद

अरुणेंद्र कुमार पांडेय, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) के मुताबिक, एनजीटी के आदेश का पालन करते हुए अब 50 हजार वाहनों का पंजीयन निरस्त कर दिया है, जबकि सितंबर में 10 हजार से अधिक वाहनों का पंजीयन निरस्त किया जा चुका है। यह सभी वाहन वर्ष 18 अपैल 1998 के बाद विभाग में पंजीकृत हुए है। बार बार नोटिस के बावजूद विभाग में वाहन स्वामी प्रमाण पत्र जमा नहीं कर रहे थे, इसलिए नोटिस के बाद पंजीयन निरस्त की कार्रवाई कर दी गई।

लोगों के लिए खुशखबरी!

दरअसल, ऐसे वाहन प्रदूषण फैला रहे थे। इससे न केवल पर्यावरण पर असर पड़ रहा था, बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में इन वाहनों के सड़क से हटने का असर जल्द ही दिखेगा।

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Posted By: JP Yadav

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