मुजफ्फरनगर, जेएनएन। राजकीय इंटर कालेज के मैदान में संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत रविवार को की गई। महापंचायत में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड समेत कई राज्यों से किसान महापंचायत में पहुंचे। इस महापंचायत में हजारों की संख्‍यां में किसान जुटे रहे।

संबोधन से पहले मंच से संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 सितंबर को भारत बंद की घोषणा की। इससे पहले 25 सितंबर को भारत बंद की घोषणा की गई थी। लेकिन संयुक्‍त रूप से फैसले के बाद इसे बदल दिया गया।

राकेश टिकैत ने कहा पूरे देश का उठाएंगे मुद्दा

मुजफ्फनगर की जमीन पर पैर नहीं रखेंगे, जब जीत होगी तभी हम यहां आएंगे। राकेश टिकैत ने कहा सरकार ने बात करने को तैयार नहीं है। उसने बात करनी बंद कर दी है। हम बात करना चाहते हैं पर सरकार लगता है इसका कोई समाधान नहीं चाहती है। उन्‍होंने कहा कि अब मिशन सिर्फ यूपी नहीं बल्कि देश को बचाना है। पूरे देश के मुद्दे उठाएंगे।

दंगा करवाने वालों को बर्दाश्‍त नहीं करेगी जनता: राकेश टिकैत

अगर देश में माल खुलेंगे तो हमारे मजदूर भाई कहां जाएंगे। ये लड़ाई एमएसपी पर कानून बनने से शुरू हुई है। पूर्ण रूप से फसलों के दाम नहीं तो वोट नहीं। उन्‍होंने कहा कि प्रदेश की जमीन पर दंगा करवाने वाले को यहां की जनता बर्दाश्त नहीं करेंगी। अगर शहीद भी होना पड़ा तो पीछे नही हटेंगे। किसान कृषि कानून वापस कराने के लिए पूरा जोर लगाएगा।

'अपने दम पर जीतेंगे यह लड़ाई'

किसान लाल किले पर नहीं गया, हमे धोखे से लेकर गए हैं कोई एजेंसी इस बात की जांच करने को तैयार नहीं है। कैमरा और कलम पर पहरा है। आंदोलन जारी रहेगा। देश के नौजवानों के सवाल है कि गन्ने का 450 रुपये कुंतल चाहिए। टिकैत ने कहा कि पूरे देश मे संयुक्त मोर्चा आंदोलन करेगा। गाजीपुर बॉर्डर से नहीं हटेंगे। ये लड़ाई आपके दम पर लड़ी जाएगी और जीती जाएगी। टिकैत ने हर हर महादेव और अल्लाह हो अकबर के नारे मंच से लगाए। वाहे गुरु जी का खालसा...वाहे गुरु जी की फतेह के नारे के साथ संबोधन समाप्त कर दिया।

महापंचायत में हुई हुटिंग, राकेश टिकैत ने किया हस्‍तक्षेप

महापंचायत को संबोधित करते बलबीर सिंह राजेवाल ने तमिलनाडु, कर्नाटक व अन्य राज्यों से आए नेताओं की बात नहीं सुनने पर आपत्ति जताई। जिसे लेकर हूटिंग हो गई। राकेश टिकैत हस्तक्षेप के बाद फिर से राजेवाल का संबोधन शुरू हुआ। उन्‍होंने कहा कि कृषि सेक्टर रह गया था। अब मोदी सरकार ने इसे भी कारपोरेट हाउसों के सामने परोस दिया है। जो माडल विश्व में फेल हो चुका वह थोपा जा रहा है। आंदोलन जितना जोर पकड़ रहा है। सरकार उतनी कमजोर पड़ रही है। हमने वोट पर चोट की तो बंगाल के नतीजे सामने है। आरोप लगाया कि जिसे अन्नदाता कहते थे उन्हें कभी खालिस्तानी तो कभी पाकिस्तानी बताया गया। कहा कि वह बीच का रास्ता चाहते हैं। हम अपना हक लेने आये हैं। समझौता नहीं करेंगे। जब तक कानून वापस नहीं होंगे हम भी वापस नहीं जाएंगे। अमेरिका के गौरे किसानों ने आपका समर्थन किया है। आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाड़ा के पार्लियामेंट में आपका मुद्दा उठ चुका है। सरकारें बड़ी नहीं होती लोग बड़े होते हैं। यूपी हिल गई। जिस तरह आप यहां आए हैं उससे लगता है कि बंगाल वाला फार्मूला दोहराने जा रहे है। वोट पर चोट का माहौल तैयार हो गया है।

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किसानों का किया जा रहा उत्‍पीड़न: योगेंद्र यादव

किसान नेता योगेंद्र यादव ने योगी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्‍होंन योगी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि फसल का दाम नहीं मिला, किसानों का पूरा कर्जा माफ नहीं किया, किसानों का बकाया नहीं दिया गया। सरकार सिर्फ अपनी मनमानी कर रही है। किसानों का कर्ज माफ करने के बजाय उत्पीड़न कर रही है। योगी नहीं लुटेरा है। सरकार ने कहा था कि गेंहू के दाने दाने की खरीद करेंगे, लेकिन कितनी खरीद हुई सबके सामने है। सरकार जुमलेबाज है।

अलग- अलग राज्‍यों से आए किसान नेताओं ने भाजपा पर साधा निशाना

कुछ स्‍थानीय भाकियू नेताओं के संबोधन के बाद कर्नाटक की किसान नेता अनुसुइया माजी ने कन्नड़ में महापंचायत को संबोधित किया। इस दौरान उन्‍होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। इनके पूरे भाषण का हिंदी अनुवाद कर नजुंडास्वामी ने किसानों को समझाया। इसके बाद तमिलनाडु से आए किसान नेता ने तमिल व अंग्रेजी में संबोधन किया। जिसका हिंदी अनुवाद मंजूनाथ ने किया। केरल से आए किसान नेता केवी बीजू ने भी संबोधन कर कृषि कानून वापसी की मांग की। किसान महासंघ शिव कुमार ने कहा कि हमारी नीति और नियत साफ है लक्ष्य प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता। कहा- भाजपा और आरएसएस छद्म सम्मेलन कर भ्रम पैदा करने की फिराक में है। किसानों को बताने की चाल है कि हमने मांगें मान ली।

सरकार के खिलाफ नारेबाजी, एंकर से बदसलूकी

महापंचायत के दौरान मंच से केंद्र सरकार और राज्‍य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। वहीं एक न्‍यूज चैनल के महिला एंकर से भी बदसलूकी की गई। मंच से 'फसल हमारी दाम तुम्हारा नहीं चलेगा..मंच से लगातार नारेबाजी जारी रहा। तीनों कृषि कानून वापस लेने और सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रही।

महिला किसान बोलीं-हमारी मांग, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीनों कृषि कानून वापस लें

नरेन्द्र मोदी सरकार के तीन कृषि कानून के विरोध में रविवार को किसानों के मसीहा माने जाने वाले चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की कर्मभूमि मुजफ्फरनगर में आज होने वाली किसान महापंचायत में महिला किसान भी एकत्र रहीं। महिला किसानों का कहना है कि हम तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर यहां एकत्रित हुए। हम यहां से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से तीन कानूनों को वापस लेने का अनुरोध करते हैं। अगर वह कृषि कानून वापस ले लेते हैं तो हमारा यहां पर एकत्र होना सफल हो जाएगा।

महापंचायत के लिए आयोजकों और पुलिस-प्रशासन ने पूरी तैयारी की। आयोजकों ने किसानों के लिये 500 लंगर और 1000 चिकित्सा यूनिट की व्यवस्था की। कई जिलों से पुलिस बुलाई गई थी। किसान संगठनों ने भी व्यवस्था और सुरक्षा के लिए 5000 वालंटियर तैयार किये गए थे। करीब दो लाख वर्ग फुट के पंडाल के साथ वाटर प्रूफ मंच भी बनाया गया। ठहरने और भोजन की विभिन्न स्थानों पर व्यवस्था की गई ।

किसान महापंचायत को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा

मुजफ्फरनगर में रविवार को किसान पंचायत को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई। डीजीपी मुख्यालय स्तर से भी जिलों को कड़े निर्देश दिए गए। मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, शामली, बिजनौर व गाजियाबाद में अतिरिक्त आइपीएस अधिकारियों को भी भेजा गया। करीब 20 कंपनी पीएसी को भी तैनात की गई थी। इन सभी जिलों में पूरी सतर्कता बरतने के साथ सभी प्रमुख स्थलों में अतिरिक्त ड्यूटी लगाने के भी निर्देश दिए गए थे।

बाजार बंदी के आदेश नहीं

महापंचायत के चलते प्रशासन ने शनिवार रात के साथ ही रविवार को शराब की दुकानों को बंद कराया, लेकिन बाजार बंद करने के कोई आदेश नहीं दिया गया था। अधिकांश दुकानदारों ने स्वयं ही प्रतिष्ठान बंद रखा। हालाकि रविवार को नईमंडी क्षेत्र का बाजार साप्ताहिक बंदी में बंद रहता है।

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Edited By: Dharmendra Pandey