गाजीपुर में गंगा की बाढ़ ने मचाई तबाही, हर तरफ बाढ़ के कहर से किसानों की टूटी कमर
गाजीपुर में गंगा का जलस्तर स्थिर होने के बावजूद बाढ़ का कहर जारी है। किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं और ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और राहत कार्य चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग बीमारियों से बचाव के लिए उपाय कर रहा है।

जागरण संवाददाता, गाजीपुर। जनपद में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार करने के बाद स्थिर हो गया है, लेकिन बाढ़ का पानी अब भी गांवों और खेतों में तबाही मचा रहा है। किसानों की मिर्च समेत अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और ग्रामीण आवागमन की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
भांवरकोल क्षेत्र में बारा गांव के किसानों को खेतों और डेरों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है, जो उनके लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। धर्मपुरा के पास भागड़ नाले की पुलिया और शेरपुर–आमघाट मार्ग जलमग्न हैं, जबकि शेरपुर, फिरोजपुर, पचासी, कठार, नकटीकोल और फखनपुरा जैसे गांव पूरी तरह से प्रभावित हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रशासनिक अमला भी सक्रिय है। दिलदारनगर क्षेत्र में एसडीएम सेवराई संजय यादव ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की और दवाओं का छिड़काव, नाव व राहत चौकियों की व्यवस्था का भरोसा दिलाया।
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इसी तरह जमानियां तहसील के गडहा छानवे व घाटमपुर गांव में एसडीएम ज्योति चौरसिया ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों को बीमारियों से बचाव के उपाय बताते हुए गांव में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया। रेवतीपुर में कई गांवों का संपर्क टूटने के बाद लोग नाव के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। वहीं सदर एसडीएम मनोज पाठक ने करंडा ब्लाक के महावलपुर, तुसलीपुर, करंडा, लखनचंदपुर और शेरपुर गांवों का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिया।
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आधा दर्जन किसानों की मिर्च की फसल हुई नष्ट
भांवरकोल : गंगा का जलस्तर भले ही स्थिर हो गया हो, लेकिन बाढ़ से प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। खेत डूबने से किसानों की मिर्च की फसल बर्बाद हो गई है, वहीं आवागमन की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। बारा गांव के किसानों को रोजाना गंगा पार कर अपने खेतों और डेरों तक पहुंचना पड़ता है। नाव ही उनके लिए सहारा बनी हुई है, लेकिन यह सफर बेहद खतरनाक है। धर्मपुरा के पास भागड़ नाले की पुलिया और शेरपुर–आमघाट मार्ग पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने से लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतें हो रही हैं।
शेरपुर, फिरोजपुर, पचासी, कठार, नकटीकोल, फखनपुरा और कुंडेसर समेत कई गांवों में पानी फैल चुका है। शेरपुर के राजू राय, फिरोजपुर के बच्चू यादव, अनिल यादव और संतोष यादव समेत कई किसानों की खड़ी मिर्च की फसल डूब गई। वहीं, पचासी के लल्लन यादव, सुरेश यादव और अन्य किसानों ने हाल ही में दोबारा रोपाई कराई थी, लेकिन बाढ़ के पानी ने उनकी मेहनत भी डुबो दी। हालात को देखते हुए प्रशासन ने धर्मपुरा के पास नाव की व्यवस्था की है, ताकि लोग नाले के आर-पार आ-जा सकें। बावजूद इसके, किसानों और उनके मवेशियों की दिक्कतें जस की तस बनी हुई हैं। गंगा किनारे बसे गांवों में बाढ़ का पानी घटने के बाद भी ग्रामीणों को सामान्य जीवन पटरी पर लाने में समय लगेगा।
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एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा
दिलदारनगर: सेवराई तहसील क्षेत्र में गंगा व कर्मनाशा नदी की बाढ़ से लोग अब भी परेशान हैं। हालांकि कर्मनाशा नदी का जलस्तर घटने लगा है और गंगा का जलस्तर स्थिर हो गया है, फिर भी प्रभावित इलाकों में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। शुक्रवार को एसडीएम सेवराई संजय यादव ने बाढ़ प्रभावित गांव देवल, लहना, सायर, बरेजी, राजमल बांध, हसनपुरा, वीरऊपुर और नसीरपुर का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। एसडीएम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की बीमारी न फैले। साथ ही नाव की व्यवस्था की गई है और बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशासन लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और पीड़ितों की हर संभव मदद की जाएगी।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में प्रशासन की चौपाल, ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं
जमानियां : तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव गडहा छानवे व घाटमपुर में शुक्रवार को प्रशासन की ओर से चौपाल का आयोजन किया गया। उपजिलाधिकारी ज्योति चौरसिया खंड विकास अधिकारी बृजेश कुमार अस्थान और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. गुलाब शंकर पटेल के साथ मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने बाढ़ के बाद उत्पन्न कठिनाइयों, सड़कों पर जलभराव और बीमारियों की आशंका से संबंधित मुद्दे उठाए। इस पर एसडीएम ने आश्वस्त किया कि प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और प्रभावित लोगों को हरसंभव राहत व सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से बचाव के उपाय बताए। डॉ. गुलाब शंकर पटेल ने लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, स्वच्छ पानी पीने और सतर्क रहने की सलाह दी। साथ ही गांव में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी कराया गया। उपजिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी की जाए और जरूरतमंद परिवारों तक समय से राहत सामग्री पहुंचाई जाए। चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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बाढ़ से रेवतीपुर के किसान परेशान, फसल और मार्ग जलमग्न
रेवतीपुर : गंगा नदी में आई बाढ़ ने रेवतीपुर क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बाढ़ के पानी के कारण मिर्च, टमाटर, धान, बाजरा, सब्जी और केला जैसी फसलें प्रभावित हुई हैं। कई किसानों की मेहनत पानी में बह गई है। पिछले बाढ़ के असर से किसान पहले ही परेशान हैं, अब एक बार फिर फसल को भारी नुकसान हुआ है। सड़क भी बाढ़ की चपेट में आ गई है।
रेवतीपुर-गहमर बाइपास मार्ग, रामपुर-रेवतीपुर, हसनपुरा-नगदिलपुर, नसीरपुर समेत कई मार्ग जलमग्न हो गए हैं। गोपालपुर, तिलवा, टौगा, उधरनपुर और डेढ़गावा गांवों के निचले इलाके भी पानी से भर गए हैं। यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो गांव की गलियों तक पानी फैलने का खतरा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और लोगों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने निवासियों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
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गंगा-गोमती में बाढ़ का पानी दो दिनों से स्थिर, किसानों और ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी
खानपुर : गंगा और गोमती नदी में बाढ़ का पानी दो दिनों से स्थिर है। बाढ़ का पानी रुकने से प्रभावित गांवों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गौरहट और तेतारपुर में गोमती नदी ने गांवों के मुख्य रास्तों को पूरी तरह रोके रखा है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन के लिए नौकाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हैं और किसानों को अपनी फसलों को बचाने की चिंता सताने लगी है।
गोमती नदी में जलकुंभियों का प्रकोप भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। गंगा नदी की बाढ़ औड़िहार, पटना, सादीभादी, गोपालपुर और कुसही के किनारे स्थिर है। लगातार स्थिर पानी के कारण प्रभावित परिवारों को गृहस्थी और पशुओं की सुरक्षा में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय तक पानी बने रहने से इन क्षेत्रों में संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
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सामान्य जलस्तर: 59.906
चेतावनी बिंदु:61.550
खतरा बिंदु: 63.105
वर्तमान में गंगा का जलस्तर: 63.890 (दोपहर एक बजे तक)
वर्तमान में जलस्तर : स्थिर
कंट्रोल रूम नंबर: 0548 2223041 व 9454417103
बाढ़ राहत केंद्रों की संख्या: 35
अतिसंवेदनशील गांव: 80
संवेदनशील गांव: 154
बाढ़ चौकी: 160
छोटी-बड़ी नावों की संख्या: 340
गोताखोरों की संख्या: 27
आपदा मित्रों की संख्या: 510
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