वाराणसी में चेतावनी बिंदु को पार कर गंगा का जलस्तर बढ़ा खतरे के निशान की तरफ
वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुँच गया है जिससे अस्सीघाट से नमो घाट तक सभी घाटों का संपर्क टूट गया है। दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती अब छत पर हो रही है। वरुणा किनारे के डूब क्षेत्र से हज़ारों लोग पलायन कर रहे हैं और उन्हें राहत शिविरों में आश्रय दिया जा रहा है।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। गंगा में बाढ़ का प्रभाव दिनों दिन भयावह रूप लेता जा रहा है। परिणामस्वरूप गंगा का जलस्तर गुरुवार को चेतावनी बिंदू 70.26 मीटर को पारकर खतरे के निशान 71.26 मीटर की तरफ बढ़ गया। रात आठ बजे जलस्तर 70.98 मीटर दर्ज किया गया। इस प्रकार बाढ़ अपना भयावह रूप दिखाने लगी है।
हालांकि शुक्रवार की सुबह छह बजे के करीब बाढ़ का पानी थिराने लगा और लगभग स्थिरता की ओर जलस्तर हो चला। सुबह 71.00 मीटर पर गंगा का जलस्तर दर्ज किया गया। हालांकि जलस्तर स्थिर होने के साथ ही निचले इलाकों में लगातार पानी फैलने भी लगा है। इसकी वजह से वरुणा में पलट प्रवाह की स्थिति हो गई है और लोग दोबारा पलायन करने को विवश हो गए हैं।
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बाढ़ के पानी से अस्सीघाट से लेकर नमो घाट तक सभी 86 घाटों का संपर्क आपस में कट गया है। एक घाट से दूसरे घाट पर जाना संभव नहीं रह गया है। इतना ही नहीं दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती आयोजक गंगा सेवा निधि की छत पर हो रही है। इसी प्रकार प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति द्वारा आयोजित होने वाली आरती भी छत पर होने लगी है। यहां स्थित शीतला मंदिर पूरी तरह से पानी में समा गया है। गंगा मंदिर में कई फीट पानी भर गया है। इसी प्रकार केदार घाट, अस्सी, भैसासुर घाट आदि पर होने वाली आरती का स्थान बदल गया है। ज्यादातर जगह सांकेतिक रूप से मां गंगा की आरती की जा रही है। गंगा में नहान वालों की संख्या बहुत कम हो गई है।
1084 परिवारों के 4619 लोगों ने छोड़ा घर
बाढ़ की वजह से वरुणा के किनारे डूब क्षेत्र में अवैध रूप से मकान बनाकर रह रहे लोग तेजी से पलायन करने लगे हैं। एडीएम वित्त बंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि सदर तहसील के 28 मोहल्ले 19 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां रहने वाले 1084 परिवारों के 4619 लोग अपना घर छोड़ दिए हैं। इसमें 271 परिवार के 1014 लोग कहीं अन्यत्र चले गए हैं। इसी प्रकार 813 परिवार के 3605 लोग 23 बाढ़ राहत शिविर में शरण लिए हैं। बाढ़ की वजह से 1678 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। सभी प्रभावित लोगों को राहत स्वरूप भोजन, नाश्ता आदि दिया जा रहा है।
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