गाजियाबाद में 50 लाख की आबादी दूषित पानी पीने को मजबूर, अवैध फैक्ट्रियां बनीं जहर का कारण
गाजियाबाद में औद्योगिक इकाइयों और अवैध फैक्ट्रियों से भूगर्भ जल दूषित हो रहा है। पॉलिश, प्लास्टिक दाना, कपड़ा रंगाई और तेजाब का उपयोग करने वाली ये इका ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। जिले में कई औद्योगिक इकाइयों का पानी भूगर्भ जल को दूषित कर रहा है। कुछ इकाइयों में पानी बोरिंग के जरिये भूगर्भ में डाला जा रहा है। जिले में बड़ी रिहायशी इलाके में पालिश, प्लास्टिक दाना, कपड़ा रंगाई और तेजाब का इस्तेमाल करने अवैध फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। समय समय पर इन पर कार्रवाई की जाती है लेकिन फिर से यह चालू हो जाती हैं।
इनमें कुछ फैक्ट्रियों का पानी बोरिंग के जरिये भूगर्भ में डाला जा रहा है। जबकि कुछ फैक्ट्रियों का पानी बिना शोधित किए ही नालों में बहा दिया जाता है। यह दूषित जल लोगों की रसोई तक पहुंच रहा है। जिले की 50 लाख की आबादी दूषित जल पीने के लिए मजबूर है। दूषित जल की वजह से कई इलाकों में पेस्टीसाइड्स और हार्मोनल रसायन से प्रजनन प्रणाली को प्रभावित हो रही है। दूषित पानी से कैंसर, हृदय रोग, हैपेटाइटिस आदि बीमारियां हो रही हैं।
शहर की राजीव कालोनी, पप्पू कॉलोनी, डीएलएफ, डिफेंस कॉलोनी, भोपुरा, राजीव कालोनी, गणेशपुरी, शालीमार गार्डन, पंचशील, करहेड़ा, शहीद नगर, हिंडन विहार, विजय नगर, नंदग्राम, खोड़ा आदि रिहायशी इलाकों में 400 से अधिक अवैध पालिश, प्लास्टिक दाना, जींस रंगाई और तेजाब का इस्तेमाल करने अवैध फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। जांच रिपोर्ट में पानी की स्थिति चिंताजनक है। शहर के कुछ पाश इलाके भी दूषित जल की आपूर्ति से अछूते नहीं है।
शहर के कौशांबी, राजेंद्र नगर, चंद्र नगर, वैशाली, सूर्या नगर जैसे पाश इलाकों में भी दूषित पानी की आपूर्ति होने की शिकायतें अधिक संख्या में आती हैं। शहीद नगर, करहैड़ा, महाराजपुर गांव में बड़ी संख्या में लोग हैपेटाइटिस की बीमारी से पीड़ित हैं। अवैध फैक्ट्रियां पानी की दूषित करने के लिए अधिक जिम्मेदार है। हालांकि राजेंद्र नगर, बुलंदशहर रोड, लोहिया नगर, आनंद औद्योगिक क्षेत्र, मोरटा औद्योगिक क्षेत्र, दुहाई औद्योगिक क्षेत्र, रूप नगर औद्योगिक क्षेत्र, विकास नगर औद्योगिक क्षेत्र पटेल मार्ग औद्योगिक क्षेत्र, पांडव नगर औद्योगिक सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में कुछ उद्यमी पानी को शोधित नहीं कर रहे हैं।
वह बिना शोधित किए ही रसायनिक पानी को बहा रहे हैं। शहर में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। नगर निगम गंगाजल और नलकूप से पानी की आपूर्ति करता है। केवल वसुंधरा जोन और सिद्धार्थ विहार में ही गंगाजल की आपूर्ति की जाती है। अन्य पूरे जिले की आबादी नलकूप के पानी पर निर्भर है।
| वर्ष | जांचे गए सैंपल | फेल सैंपल |
|---|---|---|
| 2019 | 436 | 128 |
| 2020 | 212 | 64 |
| 2021 | 394 | 114 |
| 2022 | 1,045 | 302 |
| 2023 | 1,158 | 269 |
| 2024 | 1,219 | 282 |
| कुल योग | 4,464 | 1,159 |
नगर निगम मांग के अनुसार पानी उपलब्ध कराने में नाकाम
नगर निगम का जलकल विभाग 3.46 लाख उपभोक्ता को पेयजल की आपूर्ति कर रहा है। निगम 15 से 30 एचपी के 300 बड़े नलकूप, 10 से पांच एचपी के 1100 छोटे नलकूप, 6000 हैंडपंप, 51 ओवरहेड टैंक, 29 भूमिगत जलाशय से पानी की आपूर्ति कर रहा है। यह पानी लाेगों के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में शेष आबादी अपने लिए खुद ही पानी का इंतजाम करती है। आबादी को मांग के अनुसार पानी नहीं मिलने पर ज्यादातर लोगों ने अपने घरों में सबमर्सिबल लगवा रखे हैं। भूमिगत जल दूषित होने के कारण यह पानी उन्हें बीमार कर रहा है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन के मुताबिक दूषित पानी की वजह से होती हैं ये बीमारियां :
- दूषित पानी में बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स होते हैं जिससे दस्त, उल्टी और पानी की कमी का कारण बनते हैं।
- दूषित जल से कालरा, टायफाइड, और अमीबियासिस जैसी बीमारी हो जाती हैं।
- दूषित पानी में हैपेटाइटिस ए और ई, सूजन, पीलिया आदि बीमार हो जाती हैं
- पानी में पेस्टीसाइड्स, हेवी मेटल्स सीसा व आर्सेनिक और नाइट्रेट्स धीरे-धीरे गुर्दा खराब होने का खतरा पैदा हो जाता है
- पानी में आर्सेनिक जैसे रसायन से हृदय रोग रोग होने का खतरा रहता है।
- दूषित पानी में सीसा, आर्सेनिक व अन्य रसायन से पेट और ब्लड कैंसर का खतरा रहता है।
- पानी में से हैवी मेटल्स, पेस्टीसाइड्स से एक्जिमा, और त्वचा संक्रमण होता है।
- पेस्टीसाइड्स और हार्मोनल रसायन जैसे रसायन प्रजनन प्रणाली को प्रभावित, जन्मजात विकार उत्पन्न हो सकता है।
पॉश इलाकों के पानी में भी उपस्थित है मल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक पाश इलाकों के पानी में भी कोलीफार्म यानी मल की उपस्थिति पाई गई है। इंदिरापुरम, कौशांबी, राजेंद्र नगर, मोरटा, डासना, लोहिया नगर, खोड़ा के कुछ स्थानों पर पानी पीने योग्य नहीं है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक इन इलाकों की कुछ जगहों पर कोलीफार्म पाया गया है। यह पानी बिल्कुल भी पीने योग्य नहीं है। हालांकि इन इलाकों के सभी स्थानों के पानी में कोलीफार्म होने की पुष्टि नहीं हुई।
लोनी में रंगाई की अवैध फैक्ट्रियों ने बिगाड़ी पानी की सेहत
लोनी के रिहायशी इलाकों में रंगाई और धुलाई की फैक्ट्री बिना सरकारी अनुमति के चल रहीं हैं। दरअसल 24 अक्टूबर 2024 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने लोनी में दूषित जल की जांच के लिए एक संयुक्त समिति के गठन का आदेश दिया था। समिति की पहली जांच में 17 अवैध फैक्ट्री पकड़ी थी। 31 मार्च 2025 को दाखिल अंतरिम रिपोर्ट में बताया गया कि क्षेत्र में मौजूद 111 इकाइयों का सर्वेक्षण कई चरणों में किया गया। यह सर्वे उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लोनी नगर पालिका परिषद और बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा किया गया। सर्वे के दौरान 26 रंगाई फैक्ट्रियों की पहचान की गई।
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इनमें से 15 फैक्ट्रियों के पास संचालन की वैध अनुमति थी, जबकि 10 इकाइयां बिना अनुमति के चल रही थीं। समिति ने कुल 128 औद्योगिक इकाइयों की जांच की थी। दो अप्रैल 2025 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बाकी 175 इकाइयों के सर्वे का आदेश दिया। सर्वे उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बिजली विभाग द्वारा किया गया। जांच में पाया गया कि 24 इकाइयां संचालन की बिना अनुमति के अवैध रूप से चल रही हैं। इलाके में कुल 50 रंगाई फैक्ट्रियां हैं। जिनमें से 34 के पास संचालन की वैध अनुमति नहीं है। स्थानीय लोगों की माने तो लोनी में 200 से अधिक फैक्ट्रियों से अवैध रूप रसायनिक पानी बिना धाेधित किए छोड़ा जा रहा है।
मुरादनगर में दूषित जल से हैपेटाइटिस से पीड़ित हो रहे लोग
मुरादनगर की सहबिस्वा, ईदगाह और मालिकनगर कालोनी में रहने वाले करीब पांच हजार लोगों के लिए दूषित पानी का सेवन करने के लिए मजबूर हैं। नल से निकलने कुछ देर बाद ही पानी पीला हो जाता है। ऐसे में हैपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बीमारी के चलते आए कई लोगों की मौत हो चुकी है।

मुरादनगर में बड़ी संख्या में कपड़ों की रंगई की फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। फैक्ट्रियों का रसायनिक पानी ने भूमिगत जल को दूषित कर दिया है। जमीन में गंदा पानी रिस रहा है। बड़े पैमाने पर चलने वाले हैंडलूम इकाई भी जल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। कई स्थान पर इन इकाइयों का गंदा पानी बिना ट्रीट किये ही नालो में छोड़ दिया जाता है।
मोदीनगर फैक्ट्रियों का रसायनिक पानी भूगर्भ में घोल रहे जहर
फैक्ट्रियों से निकलने वाला रसायनिक पानी मोदीनगर के भूगर्भ में जहर घोल रहा है। रसायनिक पानी को नाले में बहाया जा रहा है। घरों के बोरिंग का पानी पीने लायक नहीं है। मोदीनगर की कृष्णानगर, कैलाश कालोनी, फफराना बस्ती, सुभाष विहार, राजबाला एनक्लेव, आनंद विहार कालोनी, लक्ष्मीनगर समेत कई कालोनी के लोग दूषित जल की समस्या से प्रभावित हैं। मोदीनगर की सिखैडा रोड पर औद्योगिक क्षेत्र है।
यहां छोटी-बड़ी 100 से अधिक फैक्ट्रियां हैं। यहीं से एक नाला गुजर रहा है। अधिकांश फैक्ट्रियों का रसायनिक पानी इस नाले में डाला जाता है। यह नाला सिखैड़ा रोड के बाद तमाम कॉलोनी से होते हुए गोविंदपुरी तक जाता है। कुछ लोगों ने बोरिंग बंद करा दिये हैं। इन कॉलोनियों में आने वाले पानी का टीडीएस हमेशा मानक से ऊपर ही रहता है।
बोरिंग से दूषित पानी आता था। इसलिए बोरिंग को बंद कराकर अब नगरपालिका की पेयजल पाइपलाइन से पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। -विकास कुमार, सुभाष विहार कालोनी, मोदीनगर
बोरिंग से गंदा पानी आने की समस्या लंबे समय है। पहले लोग बीमार तक हो चुके है। कालोनी के लोग बोरिंग के पानी का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं।-देवेंद्र कुमार, कृष्णानगर कालोनी, मोदीनगर
फैक्ट्रियों के अपशिष्ट पदार्थों से यहां के भूगर्भ का पानी दूषित हुआ है। जिसका खामियाजा लोगों को झेलना पड़ रहा है। - जोगेंद्र सिंह, शास्त्री नगर कॉलोनी
दूषित पानी के कारण पांच हजार से अधिक लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं। आए दिन कालोनी में बच्चे व बुजुर्ग बीमार हो रहे हैं। शिकायत के बाद भी प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। - माहताब पठान, मुरादनगर
जरा सी वर्षा होने पर फैक्ट्रियों का रसायनिक पानी आसपास की गलियों में भर जाता है। इससे लोगों में त्वचा रोग हो रहा है। नाला के पानी भूमि में रिस रहा है। यह बीमारी फैला रहा है। - इमरान, मुरादनगर
दौलत नगर के बाहर भरा हुआ गंदा पानी ट्रोनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों निकल कर आ रहा है। इससे भूगर्भ प्रभावित होकर हैडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। जिसके पीने लोगों को बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।- दर्शन सिंह, प्रधान, डुंगरावली गांव, लोनी।
अगरौला गांव के बाहर भरा हुआ केमिकल युक्त पानी औद्योगिक क्षेत्र का है। इससे हैंडपंप व समरसिबल में निकलने वाला पानी भी गंदा आ रहा है जो पीने योग्य नहीं है। रसायनके पानी से कई गांवों के किसानों की खेती प्रभावित हो रही है। यह पानी से भूगर्भ में जाने से नलों का पानी भी दूषित हो रहा है।- अरुण, निवासी अगरौला गांव, लोनी।
आवासीय क्षेत्र में भरा केमिकलयुक्त पानी खेखड़ा बागपत आकर यहां बह रहा है। इसके पीने से जानवर तक बांझ हो रहे हैं। एक बार इस पानी की जांच कराया था जिसमें एक खतरनाक तत्व आया था। इसके कारण गांव का पानी भी दूषित हो रहा है। - नीरज त्यागी, पंचलोक गांव, लोनी।
प्रस्तुति- हसीन शाह, विकास वर्मा, अनिल बराल, विजय भूषण त्यागी और हरिशंकर शर्मा
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