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    फरीदाबाद में प्रदूषित पानी ने मचाया कोहराम, झाड़सेतली गांव के 30 लोगों की चली गई जान; कैंसर का बढ़ा खतरा

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:06 PM (IST)

    फरीदाबाद में दूषित पानी से गंभीर संकट गहरा गया है, जहां औद्योगिक कचरे के कारण भूजल जहरीला हो गया है। झाड़सेतली गांव में सेक्टर-58 की अवैध प्लेटिंग यून ...और पढ़ें

    सुशील भाटिया, फरीदाबाद। देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल इंदौर में दूषित पानी से अनेक मौतें और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की घटना ने सभी को झकझोर दिया है। अपने औद्योगिक शहर के विभिन्न क्षेत्रों के नागरिक भी शुद्ध पेयजल को तरसते नजर आते हैं। अपने शहर की जनसंख्या 18 लाख से पार है, पर नगर निगम क्षेत्र में ही कई इलाकों में भूजल ऐसा हो चुका है, जैसे धीमा जहर।

    फरीदाबाद-गुरुग्राम सीमा पर स्थित बंधवाड़ी में कूड़े का पहाड़ खड़ा हो चुका है, जिसका लीचेट रिस कर जमीन में जा रहा है और साथ लगते मांगर गांव, उससे आगे पाली गांव के भूजल को बुरी तरह प्रभावित करने लगा है। और तो और दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ लगते सेक्टर-58 में प्लेटिंग जोन में इस्तेमाल होने के बाद रसायनयुक्त पानी को खुले में ही बहाया जा रहा है, जो साथ लगते झाड़सेतली गांव के लोगों की जिंदगी लील रहा है।

    डीएलएफ इंडस्ट्रियल क्षेत्र में डाइंग यूनिट का भी यही हाल है, जो साथ लगते सेक्टर-31 के रिहायशी क्षेत्र के पानी को दूषित कर रहा है। इंदौर की घटना के बाद दैनिक जागरण के मुख्य संवाददाता सुशील भाटिया, साथी संवाददाताओं दीपक पांडेय और अनिल बेताब व फोटो जर्नलिस्ट संजय शर्मा के साथ उपरोक्त इलाकों में पहुंच कर नजर डाली तो वास्तविकता सोच व सुनी-सुनाई से भी अधिक निकली। पेश है रिपेार्ट:-

    रसायन युक्त पानी पीने को विवश झाड़सेंतली गांव के 10 हजार लोग...

    नेशनल हाइवे के किनारे बसे झाड़सेंतली गांव की आबादी 10 हजार है। गांव के साथ में ही औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-58 बना हुआ है, जहां पर 200 से अधिक अवैध प्लेटिंग यूनिट चल रही है। इन यूनिटों से निकलने वाला 40 लाख लीटर पानी प्रतिदिन खुले में डाल दिया जाता है। गांव में पानी सप्लाई करने वाले पांच बोर लगाए गए हैं। केमिकल युक्त पानी रिसकर भू-जल में मिल रहा है। यही जहरीला पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है।

    30 लोगों की जिंदगी लील चुका है धीमा जहर...

    गांव में रसायन युक्त पानी के सेवन से कई लोगों को कैंसर, त्वचा रोग, हेपेटाइटिस (पीलिया), पेचिश, डायरिया और पोलियो आदि से ग्रसित हो चुके हैं और हो रहे हैं। यह दूषित पानी धीमा जहर की तरह है और किडनी, लीवर पर भी असर डालता है। इन विभिन्न रोगों से ग्रसित होकर झाड़सेतली के 30 लोग अभी तक अपनी जान गंवा चुके हैं।

    आरडब्ल्यूए के महासचिव मोनू डागर बताया कि दो साल पहले पांच साल के बच्चे की ब्लड कैंसर से मौत हो गई थी। गांव में रहने वाले दो सगे भाई सतवीर डागर और श्रीपाल डागर को भी कैंसर से अपनी जान गंवानी पड़ी।

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    ग्रीवेंस कमेटी में भी उठा था मामला, एनजीटी में भी पहुंचा, हुआ कुछ नहीं...

    प्लेटिंग जोन को यहां से हटाने के लिए करीब पांच साल पहले आरडब्ल्यूए की ओर से एनजीटी में याचिका लगाई गई थी। उसको लेकर लगातार सुनवाई भी चली, लेकिन गांव वालों के पक्ष में कोई परिणाम नहीं निकला। मनोहर सरकार पार्ट-2 में जब प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला थे, तब वह ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग की अध्यक्षता करने आए थे तो उनके समक्ष भी गांव वालों ने मामला रखा था। दुष्यंत चौटाला ने जांच कर समस्या दूर करने के आदेश दिए थे, पर हुआ कुछ नहीं।

    कैंसर से मरने वाले ग्रामीण

    नेतराम डागर, बाल कृष्ण, बिजेंद्र डागर, जीतराम, सतवीर, खजान, बलाजल, त्रिलोक, प्रहलाद, खेमचंद, साभूति, कृष्ण सिंह, धाकेली, मनीराम, नन्दू, सविता, रामकृष्ण, सुकान, महेंद्र डागर, जीतराम डागर, सतवीर डागर, श्रीपाल डागर, हिमेश।

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