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    दिल्ली के भूजल में 'यूरेनियम' का जहर, किडनी और नर्वस सिस्टम को कर देगा तबाह; सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

    By Anup Kumar SinghEdited By: Kapil Kumar
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 03:08 PM (IST)

    दिल्ली के भूजल में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा से अधिक मात्रा पाई गई है, जिससे दिमाग, तंत्रिका तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने का खतरा है। ...और पढ़ें

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    दिल्ली में दूषित पानी। जागरण

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में पीने के पानी को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला खतरा सामने आया है। राजधानी के कई इलाकों के भूजल में सुरक्षित सीमा से अधिक यूरेनियम पाए जाने से न सिर्फ किडनी और हड्डियों पर, बल्कि सीधे दिमाग, नर्वस सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है और बिना किसी तात्कालिक लक्षण के लाखों लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है, जिससे दिल्ली एक ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी’ की ओर बढ़ रही है।

    केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लिए गए 103 भूजल नमूनों में से 13 नमूनों यानी 12.63 प्रतिशत में यूरेनियम की मात्रा तय सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक पाई गई है। इसका अर्थ यह है कि हर आठ में से लगभग एक नमूना दूषित है।

    उत्तरी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली, पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के साथ-साथ रोहिणी, बवाना औद्योगिक क्षेत्र और नांगलोई-राजपुरा जैसे इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी का सेवन केवल किडनी या हड्डियों तक सीमित नुकसान नहीं करता, बल्कि यह पूरे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। इससे दिमागी कार्यक्षमता, याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक संतुलन पर गहरा असर पड़ता है। समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो इसके दीर्घकालिक परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।

    साइलेंट किलर बन रहा यूरेनियम

    यूरेनियम को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर में धीरे-धीरे जमा होता है और शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। एम्स के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. हर्षल आर. सावले के अनुसार, यूरेनियम से होने वाली न्यूरोटाक्सिसिटी तंत्रिका-तंत्र को नुकसान पहुंचाती है। इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है, जिससे याददाश्त कमजोर होती है, सीखने की क्षमता घटती है और मूड डिस‌ऑर्डर की समस्या बढ़ती है। शरीर में जमा यूरेनियम नर्व सिग्नलिंग को बाधित करता है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है।

    क्या है सुरक्षित सीमा

    पेयजल मानकों के अनुसार, पानी में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर (30 पीपीबी) तय की गई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के कुछ इलाकों में यह मात्रा 59 पीपीबी तक दर्ज की गई, जबकि 13 नमूनों में यूरेनियम 30 पीपीबी से अधिक पाया गया।

    बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा

    यूरेनियम युक्त पानी का असर विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा गंभीर बताया जा रहा है। इससे एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, नींद में गड़बड़ी और मानसिक थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। दिल्ली में प्रतिदिन करीब एक हजार करोड़ लीटर पानी की खपत होती है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड लगभग 900 करोड़ लीटर की आपूर्ति कर पाता है। इसमें 10 से 13 प्रतिशत हिस्सा भूजल का है। जिन इलाकों में भूजल दूषित है, वहां यह अदृश्य जहर लोगों के स्वास्थ्य को लगातार प्रभावित कर रहा है।

    एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. अनंत मोहन बताते हैं कि यूरेनियम सबसे पहले किडनी को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन इसका गहरा असर दिमागी कार्यप्रणाली पर पड़ता है। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन ब्रेन सेल्स की कार्यक्षमता को धीमा कर देता है।

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    विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रभावित इलाकों में आरओ आधारित जल फिल्टर का इस्तेमाल किया जाए, बच्चों को विशेष रूप से ऐसे पानी से दूर रखा जाए, भूजल की नियमित निगरानी हो और प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराए जाएं।