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    Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी आज, नोट करें पूजा विधि और भोग से लेकर सबकुछ

    Updated: Sat, 01 Feb 2025 09:37 AM (IST)

    विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025) का दिन बेहद मंगलकारी माना जाता है। इस तिथि पर उपवास करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और सभी बाधाओं को दूर करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार यह व्रत आज यानी 01 फरवरी 3 को रखा जा रहा है तो चलिए इस दिन से जुड़ी कुछ जरूरी बातों को जानते हैं।

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    Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी पूजा विधि।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। विनायक चतुर्थी का पर्व बहुत कल्याणकारी माना जाता है। यह दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। साथ ही यह बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक है। इस दिन पूजा-पाठ करने से ज्ञान, समृद्धि की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल विनायक चतुर्थी का पर्व आज यानी 01 फरवरी को मनाया जा रहा है।

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    जो लोग सच्चे भाव के साथ इस दिन उपवास का पालन करते हैं, उन्हें गौरी नंदन का आशीर्वाद सदैव के लिए प्राप्त होता है, तो आइए इस दिन (Vinayak Chaturthi 2025) से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जिससे पूजा में किसी भी तरह की बाधा न पड़ सके।

    (Vinayak Chaturthi 2025 Bhog) गणेश जी भोग - मोदक, केला और बूंदी के लड्डू।

    बप्पा प्रिय फूल - गुड़हल

    विनायक चतुर्थी पूजा मुहूर्त (Vinayak Chaturthi 2025 Puja Muhurat)

    हिंदू पंचांग के अनुसार, गोधूलि मुहूर्त शाम 05 बजकर 58 मिनट से शाम 06 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से 02 फरवरी देर रात 01 बजकर 01 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से दोपहर 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

    इसके साथ ही अमृत काल शाम 07 बजकर 06 मिनट से रात 08 बजकर 36 मिनट तक रहेगा और रवि योग सुबह 07 बजकर 09 मिनट से 02 फरवरी रात 02 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप पूजा से लेकर किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य कर सकते हैं।

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    विनायक चतुर्थी पूजा विधि (Vinayak Chaturthi 2025 Puja Vidhi)

    भक्त सुबह उठकर स्नान करें। शुभ मुहूर्त के अनुसार, बप्पा की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश का अभिषेक करें। उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें। सिंदूर और चंदन का तिलक लगाएं। उनके चरणों में पांच प्रकार के फूलों को अर्पित करें। फिर बप्पा को दूर्वा और उससे बनी माला चढ़ाएं। मोदक व लड्डू का भोग लगाएं।

    गणेश चालीसा और उनके वैदिक मंत्रों का जाप करें। पूजा का समापन आरती और शंखनाद करें। पूजा में हुई गलतियों के लिए माफी मांगे। तामसिक चीजों से दूरी बनाएं रखें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।