Kanwar Yatra 2025: कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा? अभी नोट करें सावन महीने की डेट
सावन( Kab Se Hai Sawan 2025) का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है और इस माह में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2025) की शुरुआत होती है। इस दौरान हरिद्वार में बेहद खास रौनक देखने को मिलती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू कैलेंडर का पांचवा सावन (Sawan 2025) होता है, जिसे श्रावण माह के नाम से भी जाना जाता है। इस माह में महादेव के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। तभी से कांवड़ यात्रा की परंपरा जारी है। इस पावन यात्रा में अधिक संख्या में शिव भक्त शामिल होते हैं। हरिद्वार से जल लाकर सावन शिवरात्रि के शुभ अवसर पर महादेव का अभिषेक करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा।
कब से शुरू होगा सावन 2025 (Sawan 2025 Start and End Date)
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 11 जुलाई को देर रात 02 बजकर 06 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 12 जुलाई को देर रात 02 बजकर 08 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से होगी। वहीं, इस माह का समापन 09 अगस्त को होगा।
कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025 (Kawad Yatra 2025 Start Date)
इस बार 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है। ऐसे में इसी दिन से कांवड़ यात्रा की शुरुआत होगी और सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़ यात्रा का जल चढ़ेगा।
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सावन शिवरात्रि 2025 डेट (Sawan Shivratri 2025)
हर महीन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई को सुबह 04 बजकर 39 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 24 जुलाई को देर रात 02 बजकर 28 मिनट से होगी। ऐसे में सावन शिवरात्रि का पर्व 23 जुलाई को मनाया जाएगा।
इस बार सावन के महीने में 4 सोमवार व्रत पड़ेंगे।
14 जुलाई को सावन का पहला सोमवार व्रत
21 जुलाई को सावन का दूसरा सोमवार व्रत
28 जुलाई को सावन का तीसरा सोमवार व्रत
04 अगस्त को सावन का चौथा सोमवार व्रत
सावन में पूजा के दौरान करें इन मंत्रों का जप
शिव मंत्र (Shiv Mantra)
1. सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।
2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
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