विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शिव जी को भांग-धतूरा चढ़ाने से लेकर, कैलाश में निवास तक, महादेव से जुड़ी हर चीज देती है खास संकेत

Published: Tue, 08 Jul 2025 02:22 PM (IST)

सावन में खासतौर से भगवान शिव की आराधना की जाती है। भगवान शिव का स्वरूप अन्य देवताओं से बिल्कुल भिन्न ...और पढ़ें

Sawan 2025 महादेव से जुड़े खास संकेत।
Sawan 2025 महादेव से जुड़े खास संकेत।

HighLights

  1. 11 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना।
  2. शिव जी की पूजा करने से मिलता है लाभ।
  3. भगवान शिव से जुड़ा हर संकेत है खास।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शिव भक्तों को सावन के महीने का बेसब्री से इंतजार रहता है। सावन में आने वाले सोमवार का भी विशेष महत्व है। इस दिन पर शिवालयों में शिव जी की आराधना के लिए भारी भीड़ उमड़ती है। इस बार सावन की शुरुआत शुक्रवार 11 जुलाई से होने जा रही है। चलिए इस खास मौके पर जानते हैं कि शिव जी से हर चीज आपको किस तरह एक खास संदेश देती है।

प्रकृति प्रेम को द्रश कैलाश प्रेम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महादेव कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं। इसे भगवान शिव की प्रकृति के प्रति प्रेम के रूप में देखा जा सकता है। वहीं आज मनुष्य अपने विकार से लिए प्रकृति को उजाड़ता जा रहा है। ऐसे में हर व्यक्ति को यह सीख लेनी चाहिए कि प्रकृति हमारे लिए कितनी जरूरी है और इसके बिना जीवन जीना असंभव है।

क्यों चढ़ता है भांग और धतूरा

शिव जी की पूजा में जो चीजें अर्पित की जाती हैं, उसमें भांग और धतूरा भी शामिल है, जिनकी प्रकृति कड़वी या जहरीली होती है। ऐसे में इन चीजों को शिव जी पर अर्पित करने का अर्थ है कि व्यक्ति को अपने अंदर की सभी बुराईयों और कड़वाहट का त्याग भी त्याग कर देना चाहिए। साथ ही अपने आप को निर्मल बनाना चाहिए।

यह भी पढ़ें- Sawan Somvar Vrat 2025: सावन सोमवार के दिन कब और कैसे करें महादेव की पूजा, यहां जानें सबकुछ

शिव जी की सवारी नंदी

नंदी महाराज को भगवान शिव की सवारी के रूप में जाना जाता है। साथ ही वह शिव जी के सच्चे भक्त भी थे। हिंदू धर्म में नंदी महाराज को धर्म, ज्ञान और शक्ति के रूप में देखा जाता है। नंदी जी से  हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर आप भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा रखते हैं, तो इससे आपको एक अलग पहचान मिलती है। आपनी भक्ति के दम पर ही व्यक्ति आम से खास बन जाता है।

क्यों धारण करते हैं बाघम्बर

भगवान शिव को बाघम्बर भी कहा जाता है, क्योंकि वह बाघ की छाल के आसन पर विराजमान रहते हैं और इसे वस्त्र के रूप में भी धारण करते हैं। यहां बाघ की छाल का अर्थ है व्यक्ति का अहंकार। इस संकेत को इस रूप में देखा जा सकता है, कि जो भी व्यक्ति अपना अहंकार त्याग देता है, उसे भगवान शिव की शरण मिलती है।

यह भी पढ़ें- Sawan 2025 : त्रिग्रही योग में श्रवण मास का होगा शुभारंभ, भक्तों पर बरसेगी भोलेनाथ की कृपा

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।