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    Masik Janmashtami पर 'त्रिपुष्कर योग' समेत बन रहे हैं कई मंगलकारी संयोग, मिलेगा दोगुना लाभ

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Thu, 17 Apr 2025 08:30 PM (IST)

    भगवान कृष्ण की लीला अपरंपार है। भगवान श्रीकृष्ण (Masik Janmashtami 2025 Yoga) अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रती पर राधा रानी की कृपा बरसती है। इस दिन काल भैरव देव की पूजा करने से जीवन में सुखों का आगमन होता है।

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    Masik Janmashtami 2025: भगवान कृष्ण को कैसे प्रसन्न करें?

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, रविवार 20 अप्रैल को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस शुभ तिथि पर जगत के पालनहार भगवान कृष्ण और श्रीजी की पूजा की जाती है। साथ ही मनचाहा वरदान पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।

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    ज्योतिषियों की मानें तो मासिक जन्माष्टमी पर दुर्लभ त्रिपुष्कर योग कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान कृष्ण की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी। साथ ही आय और सौभाग्य में वृद्धि होगी। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

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    मासिक कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त (Bhanu Saptami Shubh Muhurat)

    वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 20 अप्रैल को शाम 7 बजे से शुरू होगी। वहीं, 21 अप्रैल को शाम 06 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर निशा काल में भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। इसके लिए 20 अप्रैल को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। वहीं, पूजा का समय देर रात 11 बजकर 58 मिनट से लेकर 12 बजकर 42 मिनट तक है।

    त्रिपुष्कर योग

    ज्योतिषियों की मानें तो मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर दुर्लभ त्रिपुष्कर योग का संयोग बन रहा है। इस योग का संयोग दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से लेकर शाम 07 बजे तक है। इस दौरान भगवान कृष्ण की पूजा करने से साधक को मनचाहा वरदान मिलेगा। साथ ही शुभ काम में सफलता मिलेगी।

    सिद्ध योग

    मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर सिद्ध योग का भी संयोग बन रहा है। सिद्ध योग देर रात 12 बजकर 13 मिनट तक है। इस योग में राधा रानी संग कृष्ण जी की पूजा करने से जीवन में व्याप्त हर परेशानी दूर होगी। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर पूर्वाषाढा और उत्तराषाढा नक्षत्र का भी संयोग है।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 05 बजकर 51 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 50 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 22 मिनट से 05 बजकर 06 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 22 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 49 मिनट से 07 बजकर 11 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।