Kumbha Sankranti 2026 Date: सूर्य देव कब करेंगे कुंभ राशि में गोचर? नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त
सूर्य देव को आत्मा का कारक माना जाता है, जो हर 30 दिन में राशि बदलते हैं और इस दिन संक्रांति मनाई जाती है। उनकी पूजा से शारीरिक-मानसिक कष्ट ...और पढ़ें

Kumbha Sankranti 2026: कुंभ संक्रांति का धार्मिक महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा का कारक माना जाता है। सूर्य देव एक राशि में 30 दिनों तक रहते हैं। इसके बाद राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर संक्रांति मनाई जाती है। संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान, पूजा, जप-तप और दान किया जाता है।

आत्मा के कारक सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुखों का आगमन होता है। ज्योतिष करियर में सफलता पाने के लिए सूर्य देव की पूजा करने की सलाह देते हैं। आइए, कुंभ संक्रांति की सही डेट (Kumbh Sankranti 2026) एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं-
सूर्य राशि परिवर्तन (Surya Gochar 2026)
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आत्मा के कारक सूर्य देव 13 फरवरी को सुबह 04 बजकर 04 मिनट पर राशि परिवर्तन करेंगे। इस दिन सूर्य देव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। सूर्य देव के कुंभ राशि में गोचर करने की तिथि पर कुंभ संक्रांति मनाई जाएगी। इस राशि में सूर्य देव 30 दिनों तक रहेंगे। इसके बाद सूर्य देव 15 मार्च को मीन राशि में गोचर करेंगे। इससे पूर्व सूर्य देव 19 फरवरी को शतभिषा और 04 मार्च को पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेंगे।
कुंभ संक्रांति शुभ मुहूर्त (Kumbh Sankranti Shubh Muhurat)
कुंभ संक्रांति तिथि का पुण्य काल सुबह 07 बजकर 01 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है। वहीं, महा पुण्य काल सुबह 07 बजकर 01 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 53 मिनट तक है। साधक अपनी सुविधा अनुसार समय पर गंगा स्नान कर सूर्य देव की पूजा-उपासना कर सकते हैं।
कुंभ संक्रांति शुभ योग (Kumbh Sankranti Shubh Yog)
कुंभ संक्रांति पर सौभाग्य और शिववास योग का निर्माण हो रहा है। वहीं, मूल और पूर्वाषाढा नक्षत्र का संयोग है। इन योग में सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्य जीवन का वरदान मिलेगा।
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