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    Kalawa Rules: महिलाएं बाएं और पुरुष दाएं हाथ में क्यों बांधते हैं कलावा, जरूर जान लें इसके नियम

    Updated: Mon, 06 Jan 2025 11:13 AM (IST)

    कलावे को मौली या रक्षासूत्र भी कहा जाता है। माना जाता है कि धार्मिक कार्य के दौरान कलावा बांधने से उस कार्य की पवित्रता बनी रहती है। साथ ही यह भी मान् ...और पढ़ें

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    Kalava ke Niyam कलावा बांधने और उतारने के नियम।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, किसी प्रकार के पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान में हाथ में कलावा जरूरी रूप से बांधा जाता है। साथ ही कलावा बांधने से संबंधित कुछ नियम भी बताए गए हैं, जिसके अनुसार, पुरुष और कुंवारी कन्याएं दाएं हाथ में कलावा बांधती हैं, वहीं शादीशुदा महिलाओं के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधना शुभ माना गया है। ऐसे में चलिए जानते हैं इसका कारण।

    ये है कारण

    किसी भी शुभ कार्य में दाएं हाथ का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। इसलिए पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान के समय पुरुषों व कुंवारी कन्याएं के दाएं हाथ में कलावा बांधा जाता है। लेकिन ऐसी मान्यता है कि विवाह के बाद महिलाएं अपने पति की वामंगी यानि पुरुष का बायां अंग हो जाती हैं। इसी कारण से महिलाओं के बाएं हाथ की कलाई में कलाना बांधे जाने का विधान है।

    इस तरह बंधवाएं कलावा

    कलावा बांधवाते समय अपने हाथ में एक सिक्का या रुपया लेकर मुट्ठी बंद कर लें और दूसरे हाथ को सिर पर रख लें। कलावा बंध जाने के बाद हाथ में रखी दक्षिणा कलावा बांधने वाले व्यक्ति को दे दें। इस बात का ध्यान रखें कि हाथ में कलावा कम-से-कम 3, 5 या 7 बार लपेटना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि कलावा बंधवाते समय आपका सिर ढका होना चाहिए। अधिक शुभ परिणामों के लिए आप कलावा बंधवाते समय इस मंत्र का जप भी कर सकते हैं -

    येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः य तेन त्वां अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

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    कलावा उतारने के नियम

    हाथ से कलावा उतारने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। इसे खोलने के बाद दूसरा कलावा बांध लेना चाहिए। पुराने कलावे को इधर-उधर बिल्कुल भी नहीं फेंकना चाहिए। आप पुराने कलावे को आप पीपल के पेड़ के नीचे रख सकते हैं या फिर किसी बहते साफ जल में प्रवाहित कर सकते हैं। उतरे हुए कलावे को दुबारा भी नहीं बांधना चाहिए। 21 दिनों के बाद आप कलावा उतार सकते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।