Solah Somvar Vrat से विवाह में आ रही अड़चन होगी जल्द दूर, जानें कब से करें शुरू
क्या आपके भी विवाह में कोई बाधा आ रही है और मनचाहा वर नहीं मिल रहा है तो इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए सोलह सोमवार व्रत करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत (Solah Somvar Vrat) को करने से जल्द विवाह के योग बनते हैं और वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है। चलिए जानते हैं इस व्रत के बारे में।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के महीने में भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस माह को महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन (Sawan 2025) में शिव जी की पूजा करने से वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्या से छुटकारा मिलता है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। मनचाहा वर पाने के लिए सोलह सोमवार व्रत जरूर करना चाहिए। इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कब से शुरू करें सोलह सोमवार व्रत।
इस दिन शुरू करें सोलह सोमवार व्रत
सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत सावन माह के पहले सोमवार से करना शुभ माना जाता है। इस बार सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है और पहला सावन सोमवार 14 जुलाई (Solah somwar vrat 2025 start date) को है। ऐसे में इस दिन व्रत की शुरुआत कर सकते हैं।
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सोलह सोमवार व्रत का महत्व (Solah Somvar Vrat Significance)
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोलह सोमवार का व्रत की शुरुआत मां पार्वती ने की थी। उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सोलह सोमवार का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से मां पार्वती को महादेव पति के रूप में प्राप्त हुए थे।
सावन पूजा सामग्री लिस्ट (Sawan Puja Samagri List)
बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत, आक, जल, गंगा जल, गाय का दूध, शक्कर, घी, कपूर, रुइ की बत्ती, धूप, दीया, नैवेद्य, मिठाई आदि।
सावन सोलह सोमवार व्रत विधि (Solah Somvar Vrat Vidhi)
सावन सोमवार के दिन सुबह उठने के बाद स्नान करने के साफ वस्त्र धारण करें। सूर्य देव को अर्घ्य दें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर महादेव और मां पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। दूध, घी, शक्कर, गुड़, दही से महादेव का अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें और मां पार्वती को 16 श्रृंगार की चीजें चढ़ाएं। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और व्रत का संकल्प लें। व्रत कथा का पाठ करें। फल और मिठाई आदि चीजों का भोग लगाएं।
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