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    ब्रह्मांड की सत्ता में होगा बड़ा फेरबदल! बृहस्पति बनेंगे राजा और मंगल संभालेंगे मंत्री पद, जानें नव संवत्सर 'रौद्र' का कैसा रहेगा असर

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 05:30 PM (IST)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 19 मार्च को गुड़ी पड़वा से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 'रौद्र संवत्सर' का आरंभ (Nav Samvatsar 2083) होगा। इस वर्ष ...और पढ़ें

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    Hindu New Year: विक्रम संवत 2083 कब से शुरू होगा?

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरुवार 19 मार्च को गुड़ी पड़वा है। यह पर्व हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है। हिंदी में नव वर्ष को ‘नव संवत्सर’ भी कहा जाता है। ‘नव संवत्सर’ के दिन से चैत्र नवरात्र की भी शुरुआत होती है, जो नौ दिनों तक चलती है। वहीं, नवमी तिथि पर भगवान श्रीराम का अवतरण दिवस यानी राम नवमी मनाई जाती है।

    Vikram sambvat 2083

    ज्योतिषियों के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 19 मार्च से विक्रम संवत 2083 (Hindu Nav Varsh 2083) की शुरुआत होगी। इस दिन से ब्रह्मांड की सत्ता में बड़ा फेरबदल होगा। नए साल से पद भर में व्यापक परिवर्तन होगा। आइए, ‘नव संवत्सर’ के दिन से सृष्टि की सत्ता में होने वाले बदलाव और पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानते हैं-

    मंत्री पद का बंटवारा कुछ इस प्रकार से होगा

    • राजा-देवताओं के गुरु बृहस्पति देव
    • मंत्री- ऊर्जा के कारक मंगल देव
    • गृहमंत्री- मन के कारक चंद्र देव
    • खाद्य- ग्रहों के राजकुमार बुध देव

    रौद्र संवत्सर (Raudra Samvatsar effects)

    ज्योतिषियों की मानें तो विक्रम संवत 2083 का नाम रौद्र संवत्सर होगा। यह नाम अनुसार उग्र और तीव्र प्रभाव प्रदान करने वाला होगा। रौद्र संवत्सर से ब्रह्मांड पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे वायुमंडल और पर्यावरण में प्रतिकूल स्थिति बनी रहेगी। गर्मी के दिनों में कहीं भीषण गर्मी पड़ेगी, तो कहीं लू देखने को मिलेगी। किसी भी जगह पर तापमान अनुकूल नहीं रहेगा।

    कहीं, तेज बारिश होगी, तो कहीं सूखा पड़ेगा। किसी जगह पर भूकंप का डर रहेगा, तो कहीं आंधी-तूफान का कहर बरस सकता है। हालांकि, रौद्र संवत्सर के राजा देवताओं के गुरु बृहस्पति देव ( Jupiter King Mars Minister 2026) होंगे। इसके लिए पूजा-पाठ, जप-तप, दान-पुण्य करने से प्रकृति में संतुलन बना रहेगा।

    वहीं, रौद्र संवत्सर के मंत्री ऊर्जा के कारक मंगल देव होंगे। इससे हिंसा और अपराध में वृद्धि हो सकती है। लोगों में क्रोध अधिक देखने को मिल सकता है। रक्त संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। इसके बावजूद स्थिति कंट्रोल में रहेगा। जबकि, बृहस्पति देव की कृपा से कई क्षेत्रों में अकल्पनीय उन्नति देखने को मिलेगी। खासकर, कृषि और उत्पादन सेक्टर में मनमुताबिक सफलता मिलेगी।

    अन्य प्रभाव

    ग्रहों के राजकुमार बुध देव की कृपा से उत्पादन क्षेत्र में उत्तम फल प्राप्त होगा। महंगाई बढ़ सकती है। चंद्रमा सफल मानसून की ओर इशारा कर रहा है। न्याय के देवता की कुदृष्टि से खनिज सेक्टर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, स्वर्ण और रजत (सोना और चांदी) में तेजी देखने को मिल सकती है। कई अवसर पर इसमें उतार भी रहेगा। सरकारी राजकोष में बढ़ोतरी होगी। मंगल के चलते कई बड़ी बीमारियों का खतरा रहेगा।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।