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चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। अभी से सावधान हो जाइये। तीन राज्‍यों में पानी के लिए हाहाकार मचने वाला है। अगले साल पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में लोगों को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ सकता है। इसका कारण है भाखड़ा डैम में पर्याप्त मात्रा में पानीका भंडारण नहीं हाे पाना। इसी वजह से डैम से अन्य राज्यों के लिए छोड़े जाने वाले पानी में कटौती की जा रही है।

बीबीएमबी की चेतावनी के बाद पंजाब, राजस्थान व हरियाणा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की आपात बैठक

भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सरकारों को चेतावनी दी है कि यदि पौंग और भाखड़ा डैम में पर्याप्त पानी जमा नहीं हुआ, तो सितंबर 2018 से लेकर मई 2019 तक के लिए पेयजल और सिंचाई के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

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इस समय के दौरान तीनों राज्यों की औसतन मांग 43 हजार क्यूसिक होगी, जबकि बीबीएमबी केवल 17700 क्यूसिक ही छोड़ पाएगा। हालांकि फिलहाल बिजली उत्पादन पर कोई असर नहीं है, लेकिन आने वाले समय में बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।

पंजाब ने बीबीएमबी से लांग टर्म स्टडी करवाने की मांग उठाई

बीबीएमबी के चेयरमैन बीके शर्मा ने तीनों राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की बैठक बुलाकर उन्हें सारी स्थिति से अवगत करवाया। इस अवसर पर पंजाब के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (सिंचाई) जसपाल सिंह ने बताया कि पंजाब के कृषि विभाग ने सभी किसानों से कम पानी का प्रयोग करने संबंधी निर्देश जारी कर दिए हैं और हम अपनी मांग के अनुरूप 50 फीसद ही पानी ले रहे हैं।

भाखड़ा नंगल डैम। (फाइल फोटो)

पौंग से मिलेगा मात्र 17700 क्यूसिक, बिजली उत्पादन पर भी पड़ेगा असर

उन्होंने जल संकट पर चिंता जाहिर करते हुए सुझाव दिया कि बीबीएमबी को स्टडी करनी चाहिए, ताकि पता चला सके कि कैचमेंट एरिया में बारिश कितनी हो रही है, बर्फ पिघलने से कितना पानी बांधों में आ रहा है, ताकि इस डाटा के आधार पर लांग टर्म तैयारी की जा सके। बोर्ड की बैठक में इस सुझाव को मान लिया गया है।

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संकट बढ़ा, जलस्तर गिरा

भाखड़ा नंगल डैम का जलस्तर पिछले साल के मुकाबले 62 फीट, पौंग का 41 फीट और रणजीत सागर डैम का 13 मीटर कम है। बीबीएमबी ने अपना आकलन किया है कि जिस हिसाब से बारिश हो रही है उससे भाखड़ा का जलस्तर बहुत मुश्किल से 1600 फीट और पौंग बांध का 1340 फीट ही पहुंच पाएगा। बोर्ड की बैठक में हरियाणा के चीफ इंजीनियर (नहर) और राजस्थान के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (सिंचाई) भी मौजूद थे। बीबीएमबी का कहना है कि राज्य अपने स्तर पर बारिश के पानी का प्रबंध करें और बीबीएमबी से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर न रहें। उन्होंने कहा कि पानी संकट अभी कितनी देर और चलेगा यह नहीं कहा जा सकता।

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एक हफ्ते से इनफ्लो कम

पिछले एक हफ्ते से भाखड़ा का इनफ्लो भी पिछले साल के मुकाबले मात्र आधा ही चल रहा है। पिछले साल आज के दिन 79 हजार क्यूसिक पानी की आमद थी, जो इस साल 35502 क्यूसिक ही आ रहा है। पौंग का हाल इससे भी ज्यादा बुरा है। पिछले साल एक लाख क्यूसिक से ज्यादा पानी आ रहा था, जो इस साल मात्र 15966 क्यूसिक ही आ रहा है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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