हिसार, [ संदीप बिश्नोई]। अब पौधे भी बताएंगे कि उन्‍हें प्‍यास लगी है और वे भी पानी मांगेंगे। यह कमाल की खोज की है हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) के वैज्ञानिकाें ने की। उन्‍होंने ऐसी तकनीक र्इजाद की है कि जिससे पौधे बताएंगे कि उन्‍हें पानी की जरूरत है। इस तरह अब इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं रहेगी कि पौधों को कब पानी देना है। उन्हें जब प्यास लगेगी तो सॉयल मॉश्चर सेंसर संकेत देगा और ऑटोमेटिक माइक्रो इरिगेशन सिस्टम उनकी सिंचाई शुरू कर देगा।

पौधों के पास लगाया जाएगा सॉयल मॉश्चर सेंसर, जो नमी कम होते ही देगा संकेत

हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) के 140 एकड़ में बन रहे ऑर्गेनिक फार्म हाउस में इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जाएगा। इस सिस्टम में सॉयल मॉश्चर सेंसर को पौधे के पास लगा दिया जाता है। जमीन में नमी की मात्रा कम होते ही सेंसर कंप्यूटर को संकेत देता है और ऑटोमेटिक इरिगेशन सिस्टम चालू हो जाता है। कंप्यूटर में पहले से ही पौधों में पानी की जरूरत के अनुसार प्रोग्रामिंग होती है।

हिसार के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में लगाए गए सॉयल मॉश्चर सेंसर।

संकेत मिलते ही पानी देना चालू कर देगा सिस्टम, जरूरत पूरी होने के बाद खुद हो जाएगा बंद

जरूरत पूरी हो जाती है सेंसर सिंचाई बंद करने का संकेत देता है और कंप्यूटर इरिगेशन सिस्टम को बंद कर देता है। सिंचाई के लिए इस तरह के सिस्टम का उपयोग अभी तक इजरायल जैसे कुछ ही देशों में होता है। भारत में यह अभी प्रचलित नहीं है। हकृवि देश का पहला ऐसा कृषि विश्वविद्यालय है, जो अपने पंडित दीनदयाल उपाध्याय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑर्गेनिक फार्म में ऑटोमेटिक माइक्रो इरिगेशन सिस्टम का उपयोग करने जा रहा है।

फार्म में किसानों को हाईटेक और ऑर्गेनिक खेती की मिलेगी ट्रेनिंग

फार्म के मुख्य कोऑर्डिनेटर डॅा. आरएस झोरड़ ने बताया कि किसानों को ऑर्गेनिक और आधुनिक खेती की ट्रेङ्क्षनग देने के लिए यह ऑर्गेनिक फार्म बनाया जा रहा है। ट्रेनिंग के लिए किसान स्वयं यहां 10 एकड़ या इससे ज्यादा जमीन लेकर खेती कर सकेंगे।

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उन्‍होंने बताया कि इस दौरान विश्वविद्यालय किसानों को ऑर्गेनिक फसल लगाने, बीज तैयार करने, मार्केटिंग, सर्टिफिकेशन आदि का प्रशिक्षण देगा। दो-तीन वर्ष बाद जब किसान सीख जाएगा, तो वह बाहर या अपने खेत में जाकर ऑर्गेनिक व आधुनिक खेती कर सकेगा। यह पहली बार होगा जब कोई विश्वविद्यालय अपनी जमीन पर ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पहल करेगा।

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पूरी तरह इको फ्रेंडली होगा ऑर्गेनिक फार्म

हकृवि के इस ऑर्गेनिक फार्म में न तो बाहर की ऊर्जा का इस्तेमाल होगा और न ही रसायनिक खाद व दवाओं का। यह पूरी तरह इको फ्रेंडली है। इस फार्म में सोलर एनर्जी का उत्पादन भी किया जाएगा। पूरा ऑर्गेनिक फार्म सोलर एनर्जी पर आधारित होगा। इरिगेशन सिस्टम व ट्यूबवेल आदि भी सोलर एनर्जी से ही चलाए जाएंगे।

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'' हम इस ऑर्गेनिक फार्म पर किसान को हर तरह की आधुनिक सुविधा देना चाहते हैं। ताकि ऑर्गेनिक व आधुनिक खेती की ट्रेनिंग देकर उनकी आय को बढ़ाया जा सके।

                                                                                                      - प्रो. केपी सिंह, कुलपति, हकृवि।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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