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    पूर्व डीआईजी हरचरण भुल्लर की जमानत याचिका पर सुनवाई, सीबीआई ने नॉन-बेलेबल अपराध बताते हुए किया विरोध

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 04:33 PM (IST)

    चंडीगढ़ सीबीआई विशेष अदालत में पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने सीबीआई के केस में घटना के समय, तारीख और स्था ...और पढ़ें

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    पूर्व डीआईजी हरचरण भुल्लर।

    जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर द्वारा दायर जमानत याचिका पर शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित सीबीआई विशेष अदालत में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई के दौरान जवाब दाखिल करने के आदेशों के बाद आज, शुक्रवार, सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे।

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    डीआईजी भुल्लर की ओर से पेश हुए वकील एसपीएस भुल्लर ने दलील दी कि सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए केस में न तो घटना का समय, न तारीख और न ही स्पष्ट स्थान का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि कथित रिश्वत की राशि को लेकर भी कागजातों में विरोधाभास है। पहले एक लाख रुपये और बाद में चार लाख रुपये का जिक्र किया गया है, जिससे केस की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

    वकील ने यह भी कहा कि सीबीआई ने चालान में जिस शब्द “सेवा पानी” का इस्तेमाल किया है, उसका अर्थ रिश्वत होना जरूरी नहीं है। “सेवा पानी” का मतलब कुछ भी हो सकता है और इसे सीधे तौर पर रिश्वत से जोड़ना गलत है। 

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    बचाव पक्ष ने कहा मौजूदगी से अपराध साबित नहीं होता

    उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सेक्टर-9 डी, चंडीगढ़ में शिकायतकर्ता, बिचौलिया और सीबीआई अधिकारी की लोकेशन दिखाना केवल मौजूदगी साबित करता है, अपराध नहीं। इसके अलावा गिरफ्तारी के समय पंजाब के किसी वरिष्ठ अधिकारी को सूचना न देना भी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

    सीबीआई की ओर से वकील नरेंद्र सिंह ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला नॉन-बेलेबल है और आरोपी एक बड़े पद पर तैनात अधिकारी रहा है। 

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    बिचौलिए को भेजे संदेश पर उठे सवाल

    उन्होंने बताया कि इस केस में इंस्पेक्टर पवन लांबा और इंस्पेक्टर आरएम शर्मा गवाह हैं। सीबीआई वकील ने कहा कि भुल्लर द्वारा बिचौलिए को भेजे गए संदेशों से रिश्वत मांगने की पुष्टि होती है, जिसमें “पूरे आठ लाख करने हैं” जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए थे।

    सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार सीबीआई डीएसपी को गिरफ्तारी का अधिकार है और इसमें क्षेत्राधिकार आड़े नहीं आता, खासकर जब मामला गंभीर भ्रष्टाचार और उच्च पदस्थ अधिकारी से जुड़ा हो। 

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