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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 22, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jagdeep Dhankhar Resign: कौन होगा देश का अगला उपराष्ट्रपति, किन नामों की हो रही चर्चा?

By Agency Edited By: Chandan Kumar
Published: Tue, 22 Jul 2025 08:34 AM (IST)Updated: Tue, 22 Jul 2025 08:47 AM (IST)

Jagdeep Dhankhar Resignationउपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। भाजपा नीत राजग ...और पढ़ें

आने वाले दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है।
आने वाले दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है।

HighLights

  1. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उत्तराधिकारी के रेस शुरू हो गई है।
  2. कई नामों पर चर्चा चल रही है।

पीटीआई, नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के सोमवार शाम को अचानक इस्तीफे ने उनके उत्तराधिकारी के लिए रेस शुरू हो गई है।

सत्तारूढ़ भाजपा नीत राजग को लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों सहित मतदाताओं में बहुमत प्राप्त है, इसलिए धनखड़ के इस्तीफे के फैसले से वह आश्चर्यचकित है। आने वाले दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है।

धनखड़ उपराष्ट्रपति का पद संभालने से पहले बंगाल के राज्यपाल थे, ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए राज्यपालों में से एक या एक अनुभवी संगठनात्मक नेता या केंद्रीय मंत्रियों में से एक को चुना जा सकता है।

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'पार्टी ऐसे व्यक्ति को चुनेगी जिसपर विवाद न हो'

भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है। धनखड़ से पहले भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति थे। 2017 में जब पार्टी ने उन्हें प्रमुख संवैधानिक पद के लिए चुना था, तब वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में थे।

एक भाजपा नेता ने कहा, "हम अभी भी इस पर विचार कर रहे हैं। लेकिन मेरा मानना है कि पार्टी किसी ऐसे व्यक्ति को चुनेगी, जो ठोस विकल्प हो और जिस पर कोई विवाद न हो।"

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अनुभवी व्यक्ति हो सकता है पसंदीदा उम्मीदवार

उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी का कोई अनुभवी व्यक्ति पसंदीदा विकल्प हो सकता है। जदयू के सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और सरकार का विश्वास प्राप्त है।

धनखड़ के तीन साल के कार्यकाल में राज्यसभा में विपक्षी दलों के साथ उनकी अक्सर तकरार हुई, लेकिन अक्सर विवादास्पद मुद्दों पर उनकी तीखी टिप्पणियों ने सरकार को कई बार निराश किया।

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