Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    कोहरे से लेकर पार्किंग की कमी तक... उड़ानों में किन-किन कारणों से होती है देरी, यहां समझिए

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 03:28 PM (IST)

    देशभर में घने कोहरे और सर्दियों के कारण उड़ानों में भारी देरी हो रही है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सैकड़ों उड़ानें प्रभावित ह ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    कोहरे के कारण उड़ानों में देरी क्यों होती है? (यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है)

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभर के अधिकांश राज्यों में घने कोहरे और सर्दियों का सितम जारी है। घना कोहरा सड़क और रेल परिवहन के साथ-साथ सबसे अधिक उड़ानों को प्रभावित कर रहा है। उन्नत लैंडिंग सिस्टम और बेहतर रनवे के बावजूद, कोहरे के कारण उड़ानों में देरी होती रहती है।

    दिसंबर से फरवरी तक हर साल सैकड़ों उड़ानें देरी से चलती हैं। इस दौरान कुछ उड़ानें रद और डायवर्ट भी की जाती हैं। इसके पीछे की वजह सिर्फ कोहरे के चलते विजिबिलिटी कम होना नहीं है। बल्कि, हवाई क्षेत्र प्रतिबंध, सुरक्षा प्रोटोकॉल, पार्किंग की कमी, कर्मचारियों की कमी और प्रदूषण से उत्पन्न स्मॉग भी इसका कारण है।

    fogg (3)

    इस साल दिसंबर के मध्य से ही देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे- इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट दिल्ली (IGIA)से आने-जाने वाली सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हो चुकी हैं। एक बार अगर किसी उड़ान में देरी हो जाए, तो उसका असर दिनभर के उड़ानों पर पड़ता है।

    पिछले कुछ दिनों से दिल्ली या बेंगलुरु जैसे दक्षिणी शहरों में कोहरा पड़ने से देश भर में और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानों के संचालन पर लगातार असर पड़ रहा है।

    विमानों में देरी होने की मुख्य वजह

    • CAT IIIB लैंडिंग सिस्टम और बेहतर रनवे होने के बावजूद दिसंबर-फरवरी में सैकड़ों उड़ानें देरी, रद या डायवर्ट हो रही हैं।
    • चार रनवे के बावजूद दृश्यता 900 मीटर से कम होने पर एक रनवे बंद; केवल तीन CAT IIIB रनवे बचते हैं, जिनका एकसाथ उपयोग नहीं हो सकता।
    • कोहरे में विमानों की दूरी 3.5 से बढ़कर 6 नॉटिकल मील, जिससे पायलट उपकरणों पर पूरी तरह निर्भर, क्षमता में भारी गिरावट आती है।
    • RVR उपकरण में खराबी, विंग वॉकर-मार्शलर की कमी, ग्राउंड हैंडलिंग के चलते मिनटों की देरी घंटों में बदल जाती है।
    • इस बार कोहरा एक महीने पहले आया; प्रदूषण से स्मॉग बना, विजिबिलिटी और खराब; एक घंटे का शटडाउन तीन घंटे की देरी में बदल जाता है।
    • दिल्ली सहित कई शहरों में एक उड़ान की देरी से पूरे शेड्यूल की उड़ानें प्रभावित होती हैं।

    चार रनवे के बावजूद भी देरी

    देश में सबसे अधिक रवने वाला एयरपोर्ट दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। जहां, चार रनवे है। हालांकि, जब दृश्यता 900 मीटर से नीचे गिर जाती है, तो एक रनवे (27/09) अनुपयोगी हो जाता है, जिससे क्षमता तुरंत कम हो जाती है।

    air traffice

    ऐसे में सिर्फ तीन CAT IIIB श्रेणी के रवने की चालू रहते हैं, जिसमें 50 मीटर तक की कम दृश्यता में भी लैंडिंग की अनुमति देते हैं। इन रनवे का एक साथ उपयोग नहीं किया जा सकता है।

    लुटियंस दिल्ली (वीवीआईपी क्षेत्र) और पास के हिंडन रक्षा हवाई अड्डे के कारण प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र से आने-जाने के रास्ते संकरे हो जाते हैं। विमानों को अक्सर उड़ान भरने के बाद प्रतिबंधित क्षेत्रों से बचने के लिए लंबे मार्गों पर उड़ान भरनी पड़ती है, जिससे भीड़भाड़ और वापसी का समय बढ़ जाता है।

    कोहरे में कम उड़ानें क्यों संचालित हो पाती हैं?

    कोहरे की स्थिति में सुरक्षा मार्जिन में काफी वृद्धि होती है। इस दौरान विमानों के बीच की दूरी 3.5 नॉटिकल मील से बढ़कर 6 नॉटिकल मील तक हो जाती है। विजिबिलिटी शून्य होने के कारण पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर पूरी तरह से उपकरणों पर निर्भर रहते हैं। इसी वजह से उड़ानों के संचालन में भारी गिरावट आती है और उड़ानों में देरी होती है। हालांकि, उड़ानों का आवंटन रनवे की पूरी उपलब्धता के आधार पर किया जाता है।

    fogg (4)

    विजिबिलिटी कम होने की स्थिति में

    CAT IIIB से लैस विमान 50 मीटर की दृश्यता में उतर सकते हैं, वहीं अधिकांश विमानों के लिए उड़ान भरने के लिए कम से कम 125 मीटर की दृश्यता की आवश्यकता होती है । पार्किंग की जगह सीमित है। ऐसे में टैक्सीवे पर अस्थायी रूप से केवल 25-30 विमान ही पार्क किए जा सकते हैं। इससे अधिक होने पर विमानों का डॉयवर्ट करना पड़ता है।

    कोहरा खत्म होने के बाद भी उड़ान तुरंत सामान्य नहीं हो पाते, क्योंकि एक साथ कई विमान उड़ान भरने की अनुमति मांगने लगते हैं। विजिबिलिटी सही होने के बाद इस वजह से भी विमानों के उड़ान में देरी उत्पन्न होती है।

    कर्मचारियों की कमी

    धुंध के कारण इस सर्दी में रनवे विजुअल रेंज (आरवीआर) उपकरण में तकनीती खराबी आ गई। इससे उपयोग योग्य रनवे सीमित हो गए। बार-बार बे बदलने के लिए विंग वॉकर और मार्शलर की आवश्यकता होती है, जिसके चलते कर्मचारियों की कमी अक्सर कमी रहती है। ग्राउंड हैंडलिंग में होने वाली देरी से मिनटों का समय घंटों में बदल जाता है।

    दिल्ली से रोजाना 15,00 उड़ानें

    रोजाना 1,500 से अधिक उड़ानों का संचालन करने के बावजूद , दिल्ली के हवाई यातायात नियंत्रण विभाग का नेतृत्व एक महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाता है। इसको लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि संकट के समय विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए कार्यकारी स्तर के नेतृत्व की आवश्यकता है।

    एयरलाइंस भी अक्सर कोहरे के चरम घंटों के दौरान पर्याप्त कम दृश्यता वाले विमान और प्रशिक्षित चालक दल की तैनाती सुनिश्चित करने में विफल रहती हैं, जिससे मार्ग परिवर्तन और देरी की स्थिति और बिगड़ जाती है।

    igi yatri

    कोहरे के साथ प्रदूषण

    इस बार कोहरा करीब एक महीने पहले आ गया और पहले से चल रहे गंभीर वायु प्रदूषण ने इस समस्या को और भी बढ़ा दिया है। धुंध (प्रूदषण) कोहरे में फंस जाता है, जिससे स्मॉग बनता है। इससे विजिबिलिटी और भी अधिक खराब हो जाती है।

    कोहरे के साथ साथ अनियंत्रित निर्माण और बढ़ते प्रदूषण ने दिल्ली में एक घंटे के लिए होने वाला शटडाउन ठीक होने में तीन घंटे या उससे अधिक समय लग जाता है। दिल्ली, अमृतसर, जयपुर, लखनऊ, कोलकाता या बेंगलुरु जैसे शहरों में एक बार विमान में देरी होने पर, उस विमान के शेड्यूल में शामिल सभी अगली उड़ानें प्रभावित होती हैं।

    कैसे हो सकता है सुधार?

    उड़ानों में हो रही देरी को सुधारने को लेकर विशेषज्ञों का तर्क है कि सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच , जो कि कोहरे का चरम समय होता है, उड़ानों की संख्या कम कर दी जाए ताकि स्थिति सामान्य हो सके। हालांकि, एयरलाइनें शेड्यूल में कटौती करने को तैयार नहीं हैं। अगले साल से जब नोएडा एयरपोर्ट चालू हो जाएगा, तो आईजीआईए में व्यस्त समय के दौरान होने वाली भीड़ कम हो जाएगी। इससे बड़ी राहत मिलने की संभावना है।

    यह भी पढ़ें- कोहरे के आगे बेबस कैट-III सिस्टम, दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ानों का बुरा हाल; तीन दिन में 394 उड़ानें रद

    यह भी पढ़ें- दिल्ली एयरपोर्ट पर कोहरे से राहत, कैट-III लैंडिंग सिस्टम से सुधरे हालात