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SC ने क्यों ठुकराई उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका? दिल्ली दंगे पर कोर्ट ने क्या कहा

Published: Mon, 05 Jan 2026 12:10 PM (IST)

SC on Delhi Riots: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के प्रमुख आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका ...और पढ़ें

दिल्ली दंगों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला। फाइल फोटो

दिल्ली दंगों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला। फाइल फोटो

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के प्रमुख आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने दंगों के 5 आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दी गई है। दिल्ली में दंगे भड़काने में उमर खालिद और शरजील इमाम का हाथ सामने आया है।

2 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व छात्र नेताओं की जमानत खारिज कर दी थी, जिसके बाद सभी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 10 दिसंबर 2025 को मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने आज उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। वहीं, गुलफिशा फातिमा, शरजील इमाम, मीरान हैदर, उमर खालिद, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद शकील खान और शादाब अहमद को सशर्त जमानत दी गई है।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

खालिद और इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट है कि अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त सबूत पेश किए हैं जो आपराधिक साजिश में दोनों की संलिप्तता को दर्शाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, सभी आरोपियों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता है। उमर खालिद और शरजील इमाम की तुलना में अन्य आरोपियों के दोष अलग हैं। ऐसे में कोर्ट को हर जमानत याचिका को अलग-अलग देखना होगा। सभी जमानत याचिकाओं पर समानता लागू नहीं हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का जिक्र करते हुए कहा, "अनुच्छेद 21 के तहत मुकदमे से पहले किसी को लंबे समय तक हिरासत में रखने के लिए राज्य को कड़े सबूत देने पड़ते हैं। उमर खालिद और शरजील इमाम पर लगे आरोप काफी हद तक सही साबित हो रहे हैं। ऐसे में कानूनी कार्रवाई के इस पड़ाव पर आकर उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती है।"

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2020 के दिल्ली दंगे

बता दें कि 24 फरवरी 2020 को दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कई लोगों पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है, जिससे राजधानी में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई और 53 लोगों की मौत हो गई। इस हिंसा में 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

जांच रिपोर्ट में दावा

जांचकर्ताओं ने अदालत को बताया कि यह साजिश कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान रची गई थी, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित करना और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाना था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, CAA के मुद्दे को "शांतिपूर्ण विरोध" के नाम पर "कट्टरपंथी भावना भड़काने" के लिए चुना गया था।

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दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने जानबूझकर राज्य को अस्थिर करने का प्रयास किया था। इसे आम विरोध प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता। सत्ता परिवर्तन और देश की अर्थव्यवस्था का गला घोंटने के लिए ये एक सुनियोजित साजिश रची गई थी।

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