सीरियल किलर राजा कोलंदर: इंसानी खोपड़ी का पीता था सूप, हैवानियत के पुलिस हो चुकी थी परेशान; पढ़ें पूरी कुंडली
सीरियल किलर राजा कोलंदर, जिसे इंसानी खोपड़ी का सूप पीने वाला खूंखार अपराधी कहा जाता है, उसे लखनऊ कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उसका असली नाम रा ...और पढ़ें

राजा कोलंदर को आजीवन कारावास की सजा (फाइल फोटो)
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सीरियल किलर राजा कोलंदर, एक ऐसा खौफनाक मुजरिम, जो लोगों की हत्या करके उनका सिर धड़ से अलग कर देता था। केवल इतना ही नहीं, ये किलर लोगों की खोपड़ी का सूप बनाकर भी पीता था। इस जघन्य अपराध के लिए कोलंदर को लखनऊ कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा दी थी।
कोलंदर खुद को राजा मानता था। उसका असली नाम राम निरंजन था। इस अपराधी के बारे में लोगों को तब पता चला, जब इसने पत्रकार धीरेंद्र सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी थी।
दो युवकों को अगवाह करने के बाद बेरहमी से की हत्या
पत्रकार की हत्या से पहले जनवरी 2000 में दो युवकों के गायब होने का मामला सामने आया था। उनके नाम थे मनोज कुमार सिंह और रवि श्रीवास्तव। 25 वर्षों तक यह मामला भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली के गलियारों में अटका रहा।
24 जनवरी 2000 को मनोज कुमार सिंह और रवि श्रीवास्तव अपनी कार से लखनऊ में निकले। उनकी लोकेशन आखिरी बार रायबरेली जिले के हरचंदपुर में पता चली, इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं किया जा सका।
अदालत ने इस मामले में बारह गवाहों से पूछताछ की। शिव हर्ष सिंह के भाई शिव शंकर सिंह ने पीड़ितों की अंतिम गतिविधि के बारे में अदालत को विस्तृत जानकारी दी। शिव शंकर सिंह ने बताया कि राजा कोलंदर, उनकी पत्नी फूलन देवी और अन्य लोग वाहन में मौजूद थे। बाद में अदालत में उनकी पहचान की।
अदालत में एक अन्य गवाह अमर नाथ सिंह ने दावा किया कि उन्होंने घटना वाले दिन आरोपियों को देखा था और आरोप लगाया कि उन्होंने पुलिस पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया था।
अदालत ने सुनाया फैसला
अदालत ने इस मामले में निष्कर्ष निकाला कि सबूत स्पष्ट रूप से अपहरण, लूट और हत्या से जुड़े एक सुनियोजित अपराध की ओर इशारा करते हैं। अदालत ने राम निरंजन कोल उर्फ राजा कोलंदर और उसके साथी बछराज कोल को मनोज कुमार सिंह और रवि श्रीवास्तव के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी ठहराया।
दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और उन पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माने का 80 फीसदी हिस्सा पीड़ितों के परिवारों को दिया जाएगा। वहीं शेष राशि राज्य सरकार द्वारा कानूनी खर्चों के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

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