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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 01, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

PM Modi आज अजमेर शरीफ दरगाह के लिए भेजेंगे चादर, मोइनुद्दीन चिश्ती का 813वां उर्स शुरू

Published: Wed, 01 Jan 2025 10:30 PM (IST)Updated: Thu, 02 Jan 2025 12:16 AM (IST)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11वीं बार हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर भेजेंगे। इससे पहले पीएम मोदी ने 10 ...और पढ़ें

11वीं बार ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर भेजेंगे पीएम। (फोटो- पीटीआई)
11वीं बार ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर भेजेंगे पीएम। (फोटो- पीटीआई)

HighLights

  1. 11वीं बार ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर भेजेंगे पीएम।
  2. गुरुवार को अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को औपचारिक चादर सौंपेंगे।
  3. हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का 813वां उर्स 28 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ है।

एएनआई, नई दिल्ली। पीएम मोदी गुरुवार शाम छह बजे केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को औपचारिक चादर सौंपेंगे। यह चादर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के मौके पर अजमेर शरीफ दरगाह पर चढ़ाई जाएगी। हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का 813वां उर्स 28 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ है।

दरअसल, पीएम पद संभालने के बाद से नरेंद्र मोदी दस बार अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ा चुके हैं। यह 11वीं बार होगा जब उन्होंने इस परंपरा में हिस्सा लिया है। पिछले साल, 812वें उर्स के दौरान प्रधानमंत्री की ओर से मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी और जमाल सिद्दीकी ने दरगाह पर चादर पेश की थी।

चादर भेजेंगे पीएम मोदी

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के मीडिया प्रभारी के अनुसार, चादर को दरगाह पर पेश करने से पहले किरण रिजिजू और जमाल सिद्दीकी द्वारा सौंपी जाएगी। ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर रखी जाने वाली चादर भक्ति और सम्मान का प्रतीक है। अजमेर शरीफ दरगाह भारत में सबसे प्रतिष्ठित सूफी तीर्थस्थलों में से एक है। हर साल दुनिया भर से लाखों लोग उर्स उत्सव मनाने के लिए यहां आते हैं, जो ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की बरसी का एक महत्वपूर्ण आयोजन है।

चादर सम्मान का प्रतीक

ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह (मजार-ए-अखदास) पर चढ़ाई जाने वाली चादर, भक्ति और सम्मान का प्रतीक है। उर्स के दौरान चादर चढ़ाना इबादत का एक शक्तिशाली रूप माना जाता है, जिसे दुआ प्राप्त करने और मन्नतें पूरी करने के साधन के रूप में देखा जाता है। अजमेर शरीफ दरगाह भारत में सबसे प्रतिष्ठित सूफी दरगाहों में से एक है।

लाखों लोग होते हैं एकत्रित

हर साल, दुनिया भर से लाखों लोग उर्स उत्सव मनाने के लिए यहां एकत्रित होते हैं, यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है जो ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का 813वां उर्स 28 दिसंबर, 2024 को शुरू हुआ और इसे बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

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