आशियाना छिन जाने के बाद कब्रिस्तान में रहने को मजबूर हैं ये 25 महिलाएं
गुजरात के वडोदरा में 25 मुस्लिम महिलाएं अपना आशियाना उजड़ जाने के कारण कब्रिस्तान में रहने को मजबूर हैं।
वडोदरा। वडोदरा के मेमन कॉलोनी स्थित क्रबिस्तान के अंदर एक इमली के पेड़ की छाया में बैठी 62 साल की बानुबीबी गुलाम नबी, इमली तोड़ने की कोशिश कर रहे छोटे बच्चों को ऐसा करने से मना करते हुए कहती हैं, ‘यह अल्लाह का घर है। हमें इन फलों को खाने की इजाजत नहीं है।’ बानुबीबी जैसी और भी 25 महिलाएं है जो अपने बच्चों के साथ इस क्रबिस्तान में रहने को मजबूर हैं।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, यह स्थान वडोदरा के कपुरै से तीन किमी दूर है जहां से तीन सौ परिवारों को हटा दिया गया था, जिनमें अधिकतर मुस्लिम परिवार हैं। वडोदरा को साफ और स्वच्छ बनाने के नाम पर इन लोगों के घरों को तोड़ने के बाद इन परिवारों का पुनर्वास होना था लेकिन अभी भी इनके पास कोई छत नहीं है। इन लोगों से वादा किया गया था कि उन्हें शहरी गरीब आवास योजना की बुनियादी सेवाओं (BSUP) की स्कीम के तहत कपुरै नाम की जगह पर सस्ते मकान दिए जाएंगे पर, यह बात भी पूरी ना हो सकी। दरअसल कपुरै में रहने वाले हिंदू लोगों ने वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) को पत्र लिखकर मुसलमान लोगों को वहां ना बसाने की गुजारिश की थी। पत्र में लिखा है कि मुसलमानों के कॉलोनी में रहने से “यहां के शांतिप्रिय माहौल को चोट पहुंचेगी” क्योंकि “वे रोजाना गाली-गलौज और मारपीट करते हैं।”
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हिन्दू निवासियों के विरोध और "राजनीतिक दबाव के बावजूद वीएमसी इन विस्थापित परिवारों के विस्थापन के हेतु क्षेत्र में रहने के लिए एक ड्रॉ का आयोजन किया। इन सबके अलावा दूसरी समस्या यह थी कि ये लोग घर का पजेशन लेने के लिए सरकार की तय की गई डाउन पैमेंट (25 हजार रुपए) भी नहीं दे पाए। इन लोगों को सस्ती योजना के तहत 1.3 लाख में घर मिल रहा था जिसमें से 25 हजार रुपए घर का कब्जा लेने से पहले जमा करवाने थे। फिलहाल हालात यह हैं कि इन 300 परिवारों में से कई लोग तो अपने संबंधियों और रिश्तेदारों के वहां पनाह लिए हुए हैं जबकि कई लोग ऐसे ही खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं। इन्हीं में से लगभग 25 महिलाएं कब्रिस्तान को अपना घर बनाने पर मजबूर हैं।
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कब्रिस्तान में रह रही इन महिलाओं के लिए मुस्लिम संस्थाओं दवारा भोजन की व्यवस्था की जा रही है। इनमें से एक महिला कहती हैं कि वो तो घरों में नौकरानी का काम करती है जबकि उसका पति दिहाड़ी मजदूर है और ऐसे में उनके पास नए घर पर कब्जा करने के लिए 25 हजार रुपये नहीं है। वीएमसी ने कपुरै में 232 परिवारों के लिए बीएसयूपी योजना के तहत एक अंतिम चरण का ड्रॉ निकाला था। लेकिन सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार परिवार को इन घरों को खरीदने के लिए रियायती दर पर 1.3 लाख रुपये देने थे और इसमें से 25000 रुपये का भुगतान तो उन्हें 3 किस्तों में तुरंत करना था।
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