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    जयशंकर का चीन को संदेश: 3 चीजें सुधार सकती हैं रिश्ते, मोदी-चिनफिंग की मुलाकात के मायनों की INSIDE STORY

    Updated: Wed, 04 Dec 2024 03:53 PM (IST)

    विदेश मंत्री एस. जशंकर ने मंगलवार को लोकसभा के बाद बुधवार को राज्यसभा में चीन के साथ सीमा समझौते और इस पर हुई प्रगति की जानकारी सदन को दी। उन्होंने एलएसी के कुछ घटनाक्रमों का पूरे द्विपक्षीय संबंधों पर हुए प्रभाव के बारे में भी सदन को अवगत कराया। मोदी और चिनफिंग की मुलाकात से पहले चीन के मंत्रियों के साथ कई दौर की बातचीत भी हुई।

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    राज्यसभा में बोलते विदेश मंत्री जयशंकर। ( फोटो- एएनआई )

    एएनआई, नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी और सीमा क्षेत्र के मौजूदा हालात की जानकारी राज्यसभा में दी। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर को बनी सहमति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मुलाकात की थी। यह मुलाकात 23 अक्टूबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के शहर कजान में हुई थी।

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    उन्होंने इस सहमति का स्वागत किया और विदेश मंत्रियों को बैठक कर संबंधों को स्थिर और सुधार करने का निर्देश दिया। विशेष प्रतिनिधियों को सीमा मुद्दे का निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तलाशने के अलावा शांति और सौहार्द के प्रबंधन की देखरेख भी करनी है। विदेश मंत्री ने कहा कि इस संबंध में मैंने हाल ही में 18 नवंबर को ब्राजील के रियो डी जेनेरो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ चर्चा की।

    दोबारा शुरू हुई गश्त

    विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जानकारी दी कि 21 अक्टूबर को हुए समझौते से पहले मैंने 4 जुलाई को अस्ताना में और 25 जुलाई को वियनतियाने में अपने चीनी समकक्ष के साथ व्यापक संबंधों पर चर्चा की थी। हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और उनके चीनी समकक्ष ने 12 सितंबर को सेंट पीटर्सबर्ग में भी मुलाकात की।

    भारत ने अपनी गश्ती गतिविधि में आ रही रुकावट और डेमचोक में खानाबदोश आबादी द्वारा पारंपरिक चरागाहों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच का मुद्दा उठाया। गहन बातचीत के बाद हाल ही में बनी इस सहमति से पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त दोबारा शुरू कर दी गई है।

    विदेश मंत्री ने बताई प्राथमिकता

    विदेश मंत्री ने कहा कि 2020 के घटनाक्रम के बाद टकराव बिंदुओं से सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करना प्राथमिकता थी ताकि कोई अप्रिय घटना या झपड़ न हो। हाल ही में हुए समझौते में इसे हासिल किया गया है। उन्होंने कहा कि अगली प्राथमिकता तनाव कम करने को लेकर है।

    इन सिद्धांतों का चीन को करना होगा पालन

    जयशंकर ने कहा कि हमारे हालिया अनुभवों के मद्देनजर सीमा क्षेत्रों के प्रबंधन पर और ध्यान देने की आवश्यकता होगी। इस सब में हम बहुत स्पष्ट थे और हम अब भी बहुत स्पष्ट हैं कि हर परिस्थितियों में 3 प्रमुख सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।

    1. दोनों पक्षों को एलएसी का सख्ती से सम्मान और पालन करना।
    2. किसी भी पक्ष को यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास नहीं करना।
    3. अतीत में किए गए समझौतों का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए।

    सीमा पर तनाव का असर संबंधों पर पड़ा

    विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा पर तनाव और अन्य घटनाक्रमों का सीधा असर चीन के साथ संबंधों पर पड़ा। इस माहौल में चीन के साथ बातचीत और अन्य गतिविधियों को जारी संभव नहीं था। हमने स्पष्ट किया कि हमारे संबंधों का विकास आपसी संवेदनशीलता, आपसी सम्मान और आपसी हित के सिद्धांतों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के अभाव में भारत-चीन संबंध सामान्य नहीं हो सकते।

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