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    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से 17वीं मौत, जिला प्रशासन ने एपिडेमिक घोषित किया, ICMR की टीम पहुंची

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 01:22 PM (IST)

    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली जलजनित बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है। जिला प्रशासन ने इसे एपिडेमिक घोषित कर दिया है, क्योंकि अब तक 17वीं म ...और पढ़ें

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    इंदौर के भागीरथपुरा में पहुंची डॉक्टरों की टीम।

    डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर का भागीरथपुरा इलाका इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है। दूषित पानी से फैली जलजनित बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए रविवार को जिला प्रशासन ने दूषित जल से होने वाली बीमारी (डायरिया) को एपिडेमिक (सीमित क्षेत्र में महामारी) घोषित कर दिया है। एपिडेमिक घोषित करने का मतलब है कि संबंधित क्षेत्र में बीमारी के मामले सामान्य से कहीं अधिक तेजी से फैल रहे हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए सामान्य स्वास्थ्य व्यवस्था से आगे जाकर विशेष कानूनी-प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं। प्रशासन का आदेश न मानने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।।

    मौतों का सिलसिला जारी

    इधर, दूषित जल के कारण हो रही मौतों का सिलसिला थम नहीं पा रहा है। सोमवार सुबह 17वीं मौत दर्ज की गई। एक जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद भर्ती हुए रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा ने निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी किडनी में संक्रमण हो गया था। 

    ICMR की टीम पहुंची

    इस बीच, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (।CMR) की टीम भी जांच के लिए इंदौर पहुंच चुकी है। वर्तमान में आइसीयू में भर्ती नौ मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने सभी गंभीर मरीजों को शहर के बड़े निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया है। जिला प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए शहर के 85 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डाक्टरों की ड्यूटी भागीरथपुरा में लगा दी है।

    अब तक नहीं सुलझी गुत्थी

    अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि नर्मदा जल आपूर्ति में दूषित पानी कहां और कैसे मिला। इसी अनिश्चितता के कारण नर्मदा जल सप्लाई अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। बोरिंग के पानी में भी खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से दोनों प्रमुख जलस्रोत बंद हैं। टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।

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    रोज सामने आ रहे नए मरीज

    रविवार को ही 50 से ज्यादा नए मरीज सामने आए, जिनमें से 20 को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। टैंकरों से की जा रही पानी की आपूर्ति पर भी लोगों का भरोसा नहीं है। हालात ने प्रशासन की जल प्रबंधन और आपदा तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    केंद्र और राज्य की विशेषज्ञ टीमें मैदान में

    स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की विशेषज्ञ टीमें इंदौर पहुंच चुकी हैं और बीमारी के रूट कॉज की तलाश में जुटी हैं। प्रभावित इलाकों में पानी की आपूर्ति, सैंपलिंग और साफ-सफाई पर लगातार निगरानी की जा रही है।

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    विशेषज्ञों का यह कहना

    डॉक्टरों का कहना है कि जब किसी सीमित क्षेत्र में बीमारी के मामले सामान्य से कई गुना बढ़ जाते हैं, तो उसे महामारी घोषित किया जाता है। भागीरथपुरा की स्थिति इसी श्रेणी में आ चुकी है। राष्ट्रीय स्तर की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि दूषित पानी एक ही स्रोत से आया या कई जगहों से संक्रमण फैला।

    स्मार्ट सिटी ऑफिस में हाई-लेवल बैठक

    बढ़ते जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच कलेक्टर शिवम वर्मा ने रविवार को स्मार्ट सिटी ऑफिस में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। इसमें ICMR (कोलकाता), बैक्टीरियल इन्फेक्शन विशेषज्ञ और भोपाल की स्टेट सर्विलांस टीम के कम्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट्स शामिल हुए। बैठक में संकट से निपटने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर मंथन किया गया।