क्या भिंडी के नाम पर पड़ा है मुंबई के Bhendi Bazaar का नाम? शेफ रणवीर बरार ने बताई इसके पीछे की कहानी
जब आप मुंबई के भेंडी बाजार (Bhendi Bazaar) में कदम रखते हैं, तो वहां की भीड़-भाड़ और शोर आपको तुरंत मुंबई की असली भागदौड़ का अहसास कराते हैं। यह जगह पुर ...और पढ़ें

कैसे पड़ा मुंबई के 'भेंडी बाजार' का नाम? (Image Source: Flickr)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एक ऐसी जगह जहां पुरानी इमारतें इतनी सटकर खड़ी हैं मानो एक-दूसरे को गिरने से रोक रही हों, जहां स्कूटर आपकी कोहनी से छूकर निकल जाते हैं और दुकानदारों की आवाजें हवा में गूंजती रहती हैं। जी हां, यह है मुंबई का मशहूर 'भेंडी बाजार'- शोर से भरा, बेतरतीब, लेकिन पूरी तरह जिंदादिल।
पर ठहरिए, यहां एक पहेली है। नाम सुनकर आप सोच रहे होंगे कि इसका नाम 'भिंडी' पर रखा गया होगा? यही तो असली धोखा है। मजे की बात यह है कि इस नाम का उस हरी सब्जी से रत्ती भर भी लेना-देना नहीं है। आइए जानते हैं।
दिलचस्प है भेंडी बाजार की कहानी
View this post on Instagram
मशहूर शेफ रणवीर बरार ने हाल ही में अपने एक इंस्टाग्राम वीडियो में इस राज से पर्दा उठाया। भिंडी की सब्जी बनाते हुए उन्होंने एक ऐसी ऐतिहासिक बात बताई जो शायद ही हममें से किसी को पता थी।
शेफ बरार के अनुसार, यह नाम ब्रिटिश काल से जुड़ा है। यह इलाका क्रॉफर्ड मार्केट के ठीक पीछे स्थित था। अंग्रेज अपनी सीधी-सादी भाषा में इसे बिहाइंड द बाजार (Behind the Bazaar) कहते थे, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए इसे रोज बोलना और उच्चारण करना अलग था। समय के साथ, भारतीय लहजे में ढलकर "बिहाइंड द बाजार" धीरे-धीरे छोटा और बदलकर "भेंडी बाजार" बन गया।

(Image Source: Flickr)
बर्तनों से भी जुड़ी है थ्योरी
सिर्फ 'बिहाइंड द बाजार' ही इकलौती कहानी नहीं है। कुछ लोग इसे लेकर एक अलग नजरिया रखते हैं। उनका मानना है कि यह नाम मराठी शब्द "भांडी" से आया हो सकता है, जिसका अर्थ 'बर्तन' होता है।
इतिहास के मुताबिक, इस इलाके में कभी कुम्हारों की बस्ती हुआ करती थी जो यहां बर्तन बनाते और बेचते थे। यह मुमकिन है कि जिसे लोग पहले 'भांडी बाजार' कहते थे, वह वक्त के साथ बदल कर 'भेंडी बाजार' हो गया। चाहे थ्योरी कोई भी हो, यह तो तय है कि सब्जियों का इससे कोई संबंध नहीं है।

(Image Source: Flickr)
मजदूरों की बस्ती से व्यापार का केंद्र
पुराने समय में, ब्रिटिश शासन के दौरान भेंडी बाजार मुख्य रूप से उन मजदूरों का रिहायशी इलाका था जो बॉम्बे की व्यापारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा थे। जैसे-जैसे शहर बढ़ा, यह इलाका और भी घना और व्यस्त होता गया।
इसकी तुलना अक्सर पुरानी दिल्ली से की जाती है, लेकिन इसमें मुंबई की अपनी अलग ऊर्जा है। आज भी यहां दाऊदी बोहरा समुदाय की बड़ी आबादी रहती है, जो अपने पक्के व्यापारिक रिश्तों और इस पड़ोस से गहरे जुड़ाव के लिए जानी जाती है।
जुबान की फिसलन ने बदल दी शहर की पहचान
दिलचस्प बात यह है कि मुंबई में भेंडी बाजार अकेला ऐसा नाम नहीं है जो धोखा देता है। शहर में ऐसे कई और नाम हैं:
- चोर बाजार: इसका नाम इसलिए नहीं पड़ा कि यहां चोरी का सामान मिलता था। असल में, यहां बहुत शोर होता था, इसलिए इसे पहले 'शोर बाजार' कहा जाता था, जो बिगड़कर 'चोर बाजार' बन गया।
- ब्रीच कैंडी: इसका मिठाई से कोई वास्ता नहीं है। यह नाम 'बुर्ज खाड़ी' से बदलकर बना है।
- कोलाबा: इसका नाम कोली मछुआरों के क्षेत्र 'कोला-भात' से आया है।
मुंबई के ये नाम हमें बताते हैं कि कैसे समय, उच्चारण और आदतों ने शहर की भाषा को बदल दिया है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।