18 से 44 की उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले? डॉक्टर से जानें कारण और बचाव के तरीके
आजकल युवाओं में स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। हार्ट अटैक की तरह ही अब ब्रेन स्ट्रोक के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले ये बीमारी बुजुर्गों को ही होती थी लेकिन अब ये कम उम्र वालों में भी देखने को मिल रही है। 18 से 44 साल के लोगों में इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। इससे बचाव के लिए आपकाे ही काम करना हाेगा।

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में बदलती लाइफस्टाइल के कारण कुछ बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इनमें से स्ट्रोक भी एक गंभीर बीमारी है। अभी तक स्ट्रोक को बुजुर्गों की बीमारी ही माना जाता था, लेकिन अब ये बीमारी युवाओं में भी तेजी से बढ़ी है। 18 से 44 साल की उम्र के लोगों में स्ट्रोक के मामले बढ़ना एक बड़ा संकेत है कि अब यह सिर्फ उम्र से जुड़ी समस्या नहीं रही है।
दरअसल, अनहेल्दी लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, नींद की कमी और नशे की आदतों से युवाओं के दिमाग पर बुरा असर पड़ रहा है। इसलिए इसके पीछे के कारण और लक्षणों को समझना जरूरी है, ताकि इनसे निपटने के उपायों पर ध्यान दिया जा सके। इस बारे में हमने डॉ. अतुल प्रसाद (वाइस चेयरमैन और एचओडी, न्यूरोलॉजी, बीएलके, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल) से बातचीत की।
पहले बुजुर्गों को ही होती थी ये बीमारी
उन्होंने बताया कि पहले ये बीमारी उम्रदराज लोगों को ही होती थी। लेकिन अब ये बीमारी युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। 2020 से 2022 के बीच 18 से 44 साल के लोगों में स्ट्रोक के मामले 14.6% और 45 से 64 साल के लोगों में 15.7% तक बढ़ गए हैं। ये आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं। डॉक्टर ने इसके पीछे की बड़ी वजह हमारी खराब लाइफस्टाइल को बताया है।
क्यों बढ़ जाता है स्ट्रोक का खतरा
डॉक्टर ने कहा कि आजकल लोग घंटों बैठकर काम करते हैं, बाहर का जंक फूड ज्यादा खाते हैं। इससे मोटापा बढ़ रहा है, और कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियां लोगों काे हो रही हैं। स्मार्टफोन और कंप्यूटर की वजह से चलना-फिरना तो बंद ही हो गया है। वहीं नींद की कमी और तनाव की समस्या भी लोगों में देखी जा रही है। उन्होंने ये भी बताया कि कुछ लोग नशा, वैपिंग और ज्यादा शराब पीते हैं। इस कारण स्ट्रोक का खतरा और बढ़ जाता है।
एनर्जी ड्रिंक भी पहुंचा रही नुकसान
आपको बता दें कि अब स्ट्रोक के पीछे केवल ब्लड प्रेशर या स्मोकिंग ही जिम्मेदार नहीं हैं। कई बार शरीर में खून जमने की वजह से या फिर नसों में सूजन आने के कारण भी ये दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। वहीं कुछ दवाएं और एनर्जी ड्रिंक भी आपको नुकसान पहुंचा रहे हैं।
यह भी पढ़ें: स्ट्रोक का खतरा तीन गुना बढ़ाती हैं Oral Contraceptive Pills, जानें क्या है दोनाें में कनेक्शन
इन लक्षणों को न करें इग्नोर
डॉ. अतुल प्रसाद ने बताया कि आजकल 45 साल से कम उम्र के लोगों में खून का रिसाव वाला स्ट्रोक भी देखने को मिल रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह हाई ब्लड प्रेशर ही है। कम उम्र में स्ट्रोक आने से पढ़ाई, नौकरी और पर्सनल लाइफ पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर किसी को अपने शरीर के संकेतों को समझना चाहिए। जैसे अचानक कमजोरी आना, बोलने में दिक्कत होना, आंखों से धुंधला नजर आना आना या फिर चक्कर आने की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बचाव के लिए अपनाएं ये तरीका
इससे बचाव के लिए डॉक्टर ने कहा कि सादा खाना खाएं। रोजाना वॉक जरूर करें। अच्छी नींद लें और तनाव न लें। ये सब मिलकर ब्रेन स्ट्रोक से बचाव कर सकते हैं। वहीं लोगों को माइग्रेन की समस्या है, या परिवार में स्ट्रोक का इतिहास या कोई लंबी बीमारी रही हो, तो उन्हें डॉक्टर से समय-समय पर सलाह लेनी चाहिए।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।