हार्ट अटैक के बाद शुरुआती 2-3 घंटे क्यों हैं सबसे कीमती, कितनी भारी पड़ सकती है एंजियोप्लास्टी टालने की गलती?
हार्ट अटैक की स्थिति में एंजियोप्लास्टी न केवल जीवनरक्षक बन सकती है, बल्कि इससे मरीज दोबारा सामान्य जीवन में लौट सकता है।
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हार्ट अटैक में क्यों जरूरी है एंजियोप्लास्टी? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ऐसा नहीं है कि हार्ट के हर मरीज को एंजियोप्लास्टी की जरूरत होती है और ऐसा भी नहीं है कि जहां जरूरत है, वहां एंजियोप्लास्टी को टाल दिया जाए। डॉ. मोहित गुप्ता (डायरेक्टर प्रोफेसर, कार्डियोलाजी, जीबी पंत अस्पताल, नई दिल्ली) बताते हैं कि जिन मरीजों को एक्यूट हार्ट अटैक होता है या जिन्हें अचानक समस्या होती है, उनकी जान बचाने का बेहतर तरीका यही है कि उन्हें तत्काल ऐसे नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया जाए, जहां एंजियोप्लास्टी की सुविधा उपलब्ध हो।
अगर आसपास इसकी सुविधा नहीं है और अच्छे हास्पिटल तक पहुंचने में दो-तीन घंटे से अधिक समय लगता है, तो मरीज को नजदीकी अस्पताल में लेकर जाकर तुरंत खून के थक्के को गलाने वाली दवा देनी चाहिए। दूसरा, एक्यूट हार्ट अटैक के साथ जिन लोगों को एंजाइना (सीने में दर्द) है और वह दवाओं से कंट्रोल नहीं हो रहा है या जिन्हें क्रोनिक स्टेबल एंजाइना या कोरोनरी क्रोनिक सिंड्रोम है, जो दवाओं से नियंत्रित नहीं हो रहा है, तो ऐसे में एंजियोप्लास्टी अवश्य की जानी चाहिए।
किस स्थिति में जरूरी है यह उपाय?
एंजियोप्लास्टी जैसे उपायों से मरीज के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। यह उनके दर्द मुक्त जीवन के लिए आवश्यक उपाय है। अगर ब्लाकेज काफी गंभीर हो चुका है यानी 70-80 या 90 प्रतिशत से ऊपर हो चुका है और मरीज को सामान्य कामकाज में परेशानी जैसे, सीढ़ियां चढ़ने, तेजी से चलने में तकलीफ होने लगी है, तो हार्ट की जांच जरूरी है।
शारीरिक सक्रियता या भोजन करने के बाद एंजाइना होता है और वह दवाओं से कंट्रोल नहीं हो रहा है, तो एंजियोप्लास्टी की जरूरत होती है। यह फैसला डॉक्टर और मरीज दोनों को मिलकर लेना होता है। किसी मरीज की तीनों नाड़ियों के अंदर ब्लाकेज हो, खासकर मुख्य आर्टरी में समस्या आ रही हो, तो बायपास ज्यादा बेहतर उपाय होता है।
हर मरीज की स्थिति और उपचार अलग
हर मरीज को बायपास या एंजियोप्लास्टी की जरूरत नहीं होती। उसकी स्थिति के सही आकलन के बाद ही इसका निर्णय लिया जाता है। हर मरीज के लिए वयैक्तिक उपचार करना और उसके सभी रिस्क फैक्टर जैसे शुगर, हाई ब्लडप्रेशर को ध्यान में रखते हुए तय गाइडलाइंस के अनुसार निर्णय करना, एक संयमित और अच्छे डॉक्टर की पहचान होती है। डॉक्टर फैसला आपके स्वास्थ्य के हित में होता है।
क्या है एंजियोप्लास्टी?
हार्ट अटैक की स्थिति में रक्त का थक्का कोरोनरी आर्टरी को ब्लॉक कर देता है, जिससे हार्ट में ब्लड फ्लो अवरुद्ध हो जाता है। एंजियोप्लास्टी इस अवरोध को दूर कर जीवन बचाने की एक मेडिकल प्रक्रिया है। इसमें एक छोटे बैलून की मदद से संकरे या बंद हार्ट आर्टरी को खोला जाता है। जरूरत होने पर स्टेंट आदि उपाय किए जाते हैं।
समझें दिल की सेहत की एबीसीडी...
आज के समय हार्ट अटैक को रोकने के लिए रोजमर्रा के जीवन में कुछ सामान्य सी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
एक्सेस और अलर्ट
आज सबसे बड़ी समस्या यही है कि लोग सेहत को लेकर लापरवाह बने हुए हैं। ज्यादातर लोग हार्ट अटैक के दर्द को गैस का दर्द समझकर नजरअंदाज करते रहते हैं। इससे पूरी रात हार्ट अटैक चलता रहता है। जब वे डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तो हार्ट काफी डैमेज हो चुका होता है।
ऐसे में एंजियोप्लास्टी करने पर भी उचित लाभ नहीं मिल पाता, इसलिए हार्ट अटैक में जितनी जल्दी मेडिकल निगरानी शुरू हो, उतना ही बेहतर है। टाइम बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। अगर चलने-फिरने में दिक्कत, सीढ़ियां चढ़ते सांस फूलती है या जबड़े और हाथों का दर्द फैल रहा है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर
इन दोनों को नियंत्रण में रखना अनिवार्य है। शुगर को नियमित चेक कराते रहना जरूरी है, जिन्हें समस्या है वे सप्ताह में कम से कम एक बार, जिन्हें नहीं है, वे हर तीन महीने में कम से कम एक बार इसकी जांच अवश्य कराएं।
कोलेस्ट्रॉल और सिगरेट
अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसे नियंत्रण में रखें। साल में कम से कम एक बार अपना कंप्लीट लिपिड प्रोफाइल जरूर कराएं।
हार्ट के रोग में कोलेस्ट्रॉल एक बड़ा रिस्क फैक्टर है, जो आर्टरीज में ब्लाकेज का कारण बनता है। इसी तरह सिगरेट का प्रयोग खतरनाक हो सकता है। किसी भी प्रकार का धूमपान आपके लिए जानलेवा हो सकता है, इससे बचें।
डाइट
स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार सबसे अनिवार्य जरूरत है। आप सुनिश्चित करें कि आपके भोजन में पर्याप्त सब्जियां, दालें, सूखे मेवे, मौसमी फल आदि शामिल हों। साथ ही तले-भुने, वसायुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। ये दिल की सेहत के लिए बहुत हानिकारक हैं।
एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट
प्रतिदिन कम से कम 40 से 45 मिनट अवश्य व्यायाम करें, पैदल चलें। यह आपकी उम्र में 40-45 मिनट रोज जोड़ता है। अगर रोज सक्रिय नहीं हैं तो आप अपनी उम्र को कम कर रहे हैं।
इसी तरह इमोशनल कंट्रोल यानी अपने तनाव को भी नियंत्रण में रखें। तनाव जीवन की तमाम समस्याओं का एक बड़ा कारण बन गया है। क्रोध को नियंत्रण में रखें, स्वस्थ आदतों का विकास करें।
