Exclusive: कोलेस्ट्रॉल चेक कराकर न हों बेफिक्र! डॉक्टर ने बताया क्यों नॉर्मल रिपोर्ट वालों को भी आ रहा हार्ट अटैक
World Heart Day 2026 के मौके पर मेदांता के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन से जानिए हार्ट अटैक से जुड़ा वो ...और पढ़ें

अच्छी डाइट और फिटनेस के बाद भी दिल क्यों दे रहा है धोखा? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में नोएडा में शनिवार को हृदय रोगों के आधुनिक इलाज और इससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए 'मेदांता कार्डियक कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन किया गया। मेदांता ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. नरेश त्रेहन ने इस खास कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
इस मंच पर देश के नामी हार्ट डिजीज स्पेशलिस्ट, कार्डियक सर्जन और स्वास्थ्य क्षेत्र के दिग्गज एक साथ जुटे, ताकि दिल की बीमारियों के बदलते स्वरूप और इसके नए इलाजों पर वैज्ञानिक चर्चा की जा सके। कार्यक्रम में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि भारत के रजिस्ट्रार जनरल की 'कॉज ऑफ डेथ 2021-23' रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में होने वाली कुल मौतों में से 31 प्रतिशत के लिए दिल की बीमारियां ही जिम्मेदार हैं।
नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल के बावजूद हार्ट अटैक क्यों?
हम अक्सर यह सोचते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक का मुख्य कारण है, लेकिन कई ऐसे मामले सामने आते हैं जहां कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल होने के बावजूद लोगों को हार्ट अटैक आ जाता है। जागरण पत्रकार हर्षिता सक्सेना के इसी अहम सवाल का जवाब मेदांता ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. नरेश त्रेहन ने बेहद सरल तरीके से दिया। उन्होंने बताया कि दिल की बीमारी किसी एक खास वजह से नहीं होती, बल्कि यह कई अलग-अलग कारणों का मिला-जुला नतीजा है।
हवा में घुला जहर और जेनेटिक्स है असली कारण
डॉ. त्रेहन बताते हैं कि आज हमारे पर्यावरण में इतना खतरनाक प्रदूषण फैल चुका है कि नवंबर या दिसंबर के दिनों में बाहर सांस लेना दिन भर में 15 सिगरेट पीने के बराबर का नुकसान शरीर को पहुंचाता है। इसके अलावा, आपके फैमिली की मेडिकल हिस्ट्री और डायबिटीज भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने आगे समझाया कि अगर आपमें कोई खराब आदत न भी हो, तो भी हमारे जेनेटिक्स की बनावट की वजह से 3 से 5 प्रतिशत लोगों में हार्ट अटैक का खतरा कुदरती रूप से बना रहता है। हालांकि, जब हमारी जिंदगी में गलत खान-पान, मोटापे, कसरत की कमी और रोजमर्रा के भारी तनाव की एंट्री होती है, तो यह खतरा छलांग लगाकर 10-12 प्रतिशत तक जा पहुंचता है।
आधुनिक इलाज के नए रास्तों पर हुई चर्चा
बढ़ते जोखिमों से निपटने के लिए मेदांता कार्डियक कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने नई तकनीकों पर प्रकाश डाला। चर्चा में सामने आया कि आज के समय में कम चीर-फाड़ वाली और रोबोटिक हार्ट सर्जरी जैसे कम जोखिम वाले बेहतर विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, डॉक्टरों ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि मरीज की जान बचाने में केवल नई मशीनें ही काफी नहीं हैं, बल्कि सही समय पर डॉक्टर द्वारा लिया गया फैसला और तुरंत इलाज शुरू करना सबसे ज्यादा मायने रखता है।
