अनिद्रा और तनाव कर रहा दिल को बीमार, बचाव को सोने से दो घंटे पहले ऑफ कर दें मोबाइल-लैपटॉप
अनिद्रा और तनाव, खासकर देर रात मोबाइल व स्क्रीन के इस्तेमाल से, युवाओं में हृदय रोगों का खतरा बढ़ा रहे ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो।
HighLights
देर रात स्क्रीन से अनिद्रा और तनाव बढ़ रहा है।
युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ा है।
पर्याप्त नींद व स्क्रीन से दूरी दिल के लिए जरूरी।
जागरण संवाददाता, मेरठ। आज यानि मंगलवार को विश्व हृदय दिवस है। इस बार की थीम 'डोंट मिस ए बीट' है, जिसका अर्थ है दिल की धड़कन से न चूकें। इस अवसर पर हृदय रोग विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि देर रात तक मोबाइल, लैपटाप और कंप्यूटर की नीली रोशनी के संपर्क में रहने से दिल की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
अनिद्रा के शिकार लोग हृदय रोग की गिरफ्त में आ रहे हैं। देर रात तक स्क्रीन का उपयोग मेलाटोनिन हार्मोन के स्तर को कम कर देता है। तनाव बढ़ाने वाले हार्मोंस को बढ़ा देता है। जिससे दिल की धड़कन अनियंत्रित हो रही है। ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है। कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ गया है।
लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के कार्डियोलाजी विभागाध्यक्ष डा. धीरज सोनी ने बताया कि इस साल लगभग 35 हजार हृदय रोगी इलाज के लिए आए हैं। इनमें से 30 से 40 साल के बीच करीब 40 प्रतिशत और 30 साल से कम उम्र के तीन प्रतिशत युवा हृदय संबंधी समस्याओं के साथ आ रहे हैं। पहले धूम्रपान, मोटापा, डायबिटीज और खराब खान-पान को हृदय रोग का कारण माना जाता था, लेकिन अब अनिद्रा के कारण तनाव हार्मोंस की अधिकता से युवा हृदय रोगी बन रहे हैं। इनमें से अधिकांश कामकाजी युवा हैं।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए सुझाव
- नीली रोशनी के प्रभाव से बचने के लिए सोने से दो घंटे पहले मोबाइल और स्क्रीन बंद कर दें।
- सात से आठ घंटे की नींद लें। रोजाना कम से कम आधे घंटे टहलें या योग करें।
- 30 साल की उम्र से कोलेस्ट्राल, शुगर, बीपी, इको, ईसीजी और स्ट्रेस टेस्ट कराएं।
- बाडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 20 से 25 के बीच रखें और एलडीएल स्तर को 50 के आसपास बनाए रखें।
डाक्टरों ने कहा
-स्क्रीन पर देर रात तक रहने से नींद का पैटर्न बिगड़ता है। यह जैविक घड़ी को प्रभावित कर हृदयाघात की स्थिति पैदा करता है। बीपी-शुगर और कोलेस्ट्राल अनियंत्रित हो जाते हैं। इससे नसों में ब्लाकेज, खून के थक्के बनने और दिल की धड़कन अनियंत्रित होने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। रात आठ बजे से पहले भोजन और 10 बजे तक सोने की आदत डालें।-डा. संजीव सक्सेना, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ
-नींद पूरी न होने से शरीर का रिपेयरिंग मैकेनिज्म गड़बड़ा जाता है। रात में बीपी-शुगर बढ़ जाता है। तनाव और अनिद्रा हार्ट अटैक के नए रिस्क फैक्टर बन गए हैं। 20 से 30 साल के 5 प्रतिशत युवाओं में दिल की बीमारी मिल रही है, जिसका मुख्य कारण खानपान और सोने की अनियमितता है। नींद का समय रोज न बदलें और सकारात्मक लोगों के साथ रहें।खुश रहने की आदत डालें। जिन लोगों की बाइपास सर्जरी हुई है। हार्ट अटैक में स्टेन पड़े हैं। उनका एलडीएल 50 से कम होना चाहिए।-डा. राजीव अग्रवाल, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ।
