हार्ट अटैक हमेशा अचानक नहीं आता, शरीर पहले ही देने लगता है ये संकेत; ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
हार्ट अटैक अक्सर थकान, बदहजमी या हल्के दर्द के रूप में चुपके से आता है जिसे हम अनदेखा कर देते हैं।

हार्ट में सिर्फ बाएं हाथ में ही नहीं होता दर्द (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। टीवी सीरियल में हार्ट अटैक बड़े ही ड्रमैटिक तरीके से दिखाया जाता है, किसी शख्स के सीने में अचानक से दर्द उठता है, वह दिल पर हाथ रखता है और गिर जाता है। हमारे दिमाग में दिल के दौरे को लेकर बनाई ऐसी छवि गलत है, क्योंकि अटैक हमेशा चुपके से आता है। यह थकान, बदहजमी और हल्के-फुल्के दर्द के रूप में आता है, जिसे हम आम समझकर अनदेखा कर देते हैं।
हार्ट अटैक के समय असल में क्या होता है?
हार्ट अटैक तब आता है जब दिल तक ब्लड फ्लो अचानक से रुक जाता है, ऐसा कोरोनरी अर्टरी में फैट यानी थक्के जमने की वजह से होता है। फिर ऑक्सीजन न मिलने के कारण हार्ट टिशू कुछ ही मिनटों में डैमेज होने लगते हैं, इसी कारण डॉक्टर हमेशा एक कहावत पर जोर देते हैं कि टाइम ही मसल है, यानी इलाज में देरी से उतना ही ज्यादा नुकसान होगा।
किताबों और टीवी सीरियल से हटकर सीने में दर्द
ज्यादातर लोग सीने में दर्द की जिस असहजता को महसूस करते हैं, वो असल तो होती है लेकिन यह मुश्किल ही कभी तेज या चुभने वाले की दर्द लगती है। इसके बजाय, मरीज दबाव, जकड़न और भारीपन की शिकायत करते हैं, जिसे अक्सर एसिडिटी समझ लिया जाता है।
यह दर्द सीने के बीच में या बाईं तरफ उठता है, जो कुछ मिनट के कम जरूर हो सकता है पर फिर से होने लगता है। ऐसे में लोग इसे एक सामान्य गैस-एसिडिटी का लक्षण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
हार्ट में सिर्फ बाएं हाथ में ही नहीं होता दर्द
हार्ट अटैक के ऐसे भी कई लक्षण हैं जो लोगों को चकमा दे सकते हैं, ध्यान देने वाली बात यह है कि इनका संबंध सीने के दर्द से बिल्कुल भी नहीं है। इनमें एक या दोनों हाथों में दर्द, कंधों, कमर, गर्दन और जबड़े में दर्द या फिर पेट के ऊपरी हिस्से में असहजता महसूस होना। इस भ्रम को दूर कर दें कि दिल के दौरे के लक्षणों में बाएं हाथ में ही दर्द उठता है।
इन संकेतों को भी न करें अनदेखा
कई संकेत और हैं जिन्हें अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं, जैसे- सीने में दर्द या उसके बिना ही सांस लेने में परेशानी, अचानक पसीना आना, उल्टी या मतली, चक्कर आना, धड़कन का अनियमित चलना और बिना वजह की थकान। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये लक्षण ज्यादा दिखाई देते हैं, यही वजह है कि महिलाओं में दिल के दौरे की पहचान देरी से होती है।
खुद से पता करने की कोशिश न करें
अब आपने इन लक्षणों को जान लिया है, तो आपको लग सकता है कि हार्ट अटैक को आप शुरुआती स्तर पर पहचान सकते हैं। जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि सीने में दर्द का मतलब हार्ट अटैक ही हो। कई बार एंग्जाइटी, मांसपेशियों में तनाव, एसिडिटी, फेफड़ों की समस्या भी इसकी वजह हो सकती है। इसके लिए जरूरी है कि खुद इसका पता न लगाते हुए डॉक्टर से संपर्क किया जाए।
डॉक्टर ईसीजी और ब्लड टेस्ट की मदद से इसकी पहचान आसानी से कर सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि लक्षणों पर गौर करने के बाद खुद से सवाल नहीं पूछना है, इसे एक एमर्जेंसी मानते हुए तुरंत एक्शन लें।
ऐसी स्थिति में क्या करें?
अगर आप या आपके आसपास किसी व्यक्ति को ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो सबसे पहले एमर्जेंसी सर्विस पर कॉल करें।
खुद से गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने से बचें, क्योंकि अगर मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ी तो एम्बुलेंस रास्ते में स्थिति को संभाल सकती है पर आप नहीं।
ऐसी कंडीशन में एस्पिरिन का नाम लिया जाता है, लेकिन इसे एक मदद की तरह लिया जाना चाहिए; इलाज के रूप में नहीं।
अगर किसी को अचानक से सीने में दर्द उठता है और उसे एस्पिरिन से कोई एलर्जी या इसे न लेने की सलाह नहीं मिली हो, तो वो एमर्जेंसी में इसका सेवन कर सकता है।
इस बात का ध्यान रखें कि लक्षण दिखने पर सबसे एमर्जेंसी में फोन करना है, और उसके बाद ही एस्पिरिन की मदद लेनी है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक जैसे नहीं
आपको शायद पता न हो पर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक बात नहीं है। हार्ट अटैक एक सर्कुलेशन से जुड़ी परेशानी है, जिसमें अर्टरी ब्लॉक हो जाती है। वहीं, कार्डियक अरेस्ट एक इलेक्ट्रिक खराबी है, जिससे हार्ट पूरी तरह से धड़कना बंद हो जाता है और व्यक्ति भी बेहोश हो जाता है या उसे सांस लेने में परेशानी होती है। समझने वाली बात यह है कि एक स्थिति दूसरी परेशानी का कारण बन सकती है, पर दोनों ही स्थिति में उपाय अलग-अलग होते हैं। बताते चलें कि कार्डियक अरेस्ट में सीपीआर की जरूरत होती है।
हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए क्या करें?
दिल की बीमारी से जुड़े खतरे को कम किया जा सकता है। इनमें तंबाकू से परहेज करना, फिजिकली एक्टिव रहना, डाइट में सब्जियां, अनाज और दाल ज्यादा से ज्यादा लेना शामिल है। वहीं, अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा नमक वाला पैकेट फूड खाने की आदत हो, तो उससे कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और बीपी तीनों बढ़ने का जोखिम बना रहता है।
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(डॉ. संजीव कुमार, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली में कार्डियोलॉजी विभाग में डायरेक्टर हैं)
