क्या गुस्से में सचमुच फट सकती है सिर की नस? समझिए कैसे अचानक तनाव लेना दिमाग के लिए है खतरे की घंटी
गुस्सा सीधे तौर पर नस फटने का कारण न होते हुए भी, पहले से मौजूद एन्यूरिज्म के फटने का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

स्ट्रेस और गुस्से से ब्रेन एन्यूरिज्म पर भी पड़ता है असर (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लोगों का छोटी सी बात को लेकर गुस्से से आग बबूला हो जाना इन दिनों आम हो गया है। रोजाना के कामकाज और दिनभर की भागदौड़ में कहीं न कहीं तनाव ही इस गुस्से का कारण बन गया है।
अब सवाल यह है कि क्या ज्यादा गुस्सा करते समय दिमाग की नस फटने की आशंका ज्यादा रहती है? और अचानक स्ट्रेस होने पर हमारा दिमाग कैसी प्रतिक्रिया देता है? आज हम इन दोनों ही सवालों के जवाब विस्तार से जानेंगे।
गुस्से और तनाव से शारीरिक बदलाव
अचानक से आने वाला गुस्सा हमारे शरीर में कई तरह के बदलाव कर सकता है, इनमें दिल की धड़कन का बढ़ जाना, ब्लड प्रेशर बढ़ना और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन का हाई हो जाना शामिल है। जब भी हम गहरे इमोशनल स्ट्रेस से गुजर रहे होते हैं, तो हमारा दिमाग फाइट और फ्लाइट मोड में चला जाता है।
इस दौरान नसें सिकुड़ने लगती है, दिल तेजी से पंप करने लगता है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। वैसे ये बदलाव थोड़े समय के लिए ही होते हैं, पर ब्लड वेसल्स से जुड़ी परेशानी वाले लोगों को गंभीर दिक्कतों का सामना तक करना पड़ सकता है।
स्ट्रेस और गुस्से से ब्रेन एन्यूरिज्म भी होता है प्रभावित
ब्रेन एन्यूरिज्म हमारे दिमाग की ब्लड वेसल्स में एक पतला और कमजोर सा एरिया होता है, जो गुस्से या तनाव में बाहर की तरफ फूल जाता है। कुछ एन्यूरिज्म ऐसे होते हैं जो कभी नहीं फटते और पूरी जिंदगी बिना अपने लक्षण दिखाए रह सकते हैं। हालांकि, जब भी कोई एन्यूरिज्म फटता है तो इससे दिमाग के आसपास खून बहने लगता है। इस स्थिति को 'सबअरेक्नॉइड हैमरेज' कहा जाता है, जिसे एक सिरियस मेडिकल कंडीशन माना जाता है।
गुस्सा सीधे तौर पर दिमाग की नस फटने के लिए जिम्मेदार नहीं
यह कहना सही नहीं होगा कि हर मामले में गुस्सा करने से सीधे तौर पर दिमाग की नस फटने की आशंका रहती है। लेकिन गहरे इमोशनल स्ट्रेस, जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत और बाकी स्थिति ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती हैं। इसके चलते जिन लोगों में एन्यूरिज्म पहले से मौजूद होता है, उनमें नस फटने का जोखिम बढ़ जाता है।
वहीं, जान लेने वाली बात यह है कि एन्यूरिज्म का आकार, लोकेशन और बनावट के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग से जुड़ी आदत और अन्य कारक भी इस स्थिति के जोखिम को बढ़ा देते हैं।
लक्षण और बचाव
अगर किसी व्यक्ति को अचानक भयंकर सिर दर्द होता है, तो यह एन्यूरिज्म के फटने का एक संकेत हो सकता है। इसके साथ ही उल्टी आना, गर्दन में अकड़न, बेहोशी, दौरे पड़ना और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसे कि बोलने में परेशानी या कमजोरी भी इन संकेतों में शामिल है।
इन लक्षणों को अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता होती है। बात इसके बचाव की करें तो हाई बीपी को मैनेज करना, स्मोकिंग से परहेज करना और डॉक्टर की सलाह को मानने से एन्यूरिज्म के फटने के खतरे को बहुत हद तक टाला जा सकता है।
(डॉ. विपुल गुप्ता, सर एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल, मुंबई में डायरेक्टर - न्यूरो इंटरवेंशनल सर्जन हैं)
