'हार्ट अटैक से भी 10 गुना खतरनाक!' जानिए क्या है कार्डियोजेनिक शॉक, जिसमें संभलने का मौका तक नहीं मिलता
कार्डियोजेनिक शॉक दिल से जुड़ी एक जानलेवा स्थिति है जो हार्ट अटैक से भी ज्यादा खतरनाक होती है, इसमें दिल अचानक खून पंप करना बंद कर देता है।

हार्ट अटैक से भी खतरनाक है कार्डियोजेनिक शॉक (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एक सामान्य हार्ट अटैक में मरीज को इलाज के लिए थोड़ा समय मिल जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल से जुड़ी एक ऐसी स्थिति भी है, जो इंसान को संभलने का मौका तक नहीं देती?
जी हां, यह एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हमारा दिल शरीर की जरूरत के हिसाब से खून पंप करना अचानक से बंद कर देता है।
शरीर के अंदर आखिर क्या गड़बड़ होती है?
आमतौर पर कार्डियोजेनिक शॉक किसी हार्ट अटैक का ही ज्यादा खतरनाक रूप होता है। जब हार्ट अटैक के कारण दिल की मांसपेशियां बुरी तरह डैमेज हो जाती हैं, तो वे खून को सही से आगे नहीं धकेल पातीं। इसका नतीजा यह होता है कि ब्लड प्रेशर धड़ाम से नीचे गिर जाता है। जब शरीर के अहम अंगों को खून और ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वे एक-एक करके काम करना बंद करने लगते हैं।
सिर्फ हार्ट अटैक ही नहीं, बल्कि हार्ट वाल्व से जुड़ी गंभीर बीमारियां, मायोकार्डिटिस या पहले से चला आ रहा हार्ट फेलियर भी इस जानलेवा स्थिति की वजह बन सकते हैं।
धोखा न खाएं, शरीर के इन इशारों को तुरंत पहचानें
कई बार लोग इसके शुरुआती लक्षणों को मामूली थकान या कोई आम शारीरिक दिक्कत समझकर घर पर ही आराम करने लगते हैं। कार्डियोजेनिक शॉक के मामले में 'थोड़ी देर इंतजार करके देखते हैं' वाली सोच जानलेवा साबित हो सकती है। अगर आपको या आपके आस-पास किसी को ये दिक्कतें महसूस हों, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं:
- सीने में एकदम से भयंकर दर्द उठना या बहुत ज्यादा दबाव महसूस होना
- नब्ज का बेकाबू होना (या तो बहुत तेज चलना या एकदम कमजोर पड़ जाना)
- बैठे-बैठे पसीने छूटना और त्वचा का ठंडा या चिपचिपा पड़ जाना
- दिमाग का सुन्न होना, घबराहट या कुछ समझ न आना
- सांस उखड़ना या सांस लेने में भारी तकलीफ होना
- अचानक सुस्ती छा जाना या बेहोश होकर गिर पड़ना
'गोल्डन विंडो' की है सबसे ज्यादा अहमियत
जब बात कार्डियोजेनिक शॉक की आती है, तो डॉक्टर 'गोल्डन विंडो' को सबसे ज्यादा अहम मानते हैं। यह वह शुरुआती कीमती समय है जिसमें अगर इलाज शुरू हो जाए, तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। इसमें खून का दौरा जितनी देर रुका रहेगा, अंगों के डैमेज होने और जान जाने का खतरा उतना ही बढ़ जाएगा।
ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए तुरंत ईसीजी और इकोकार्डियोग्राफी जैसी जांचें की जाती हैं। इसके बाद बिना एक पल गंवाए दिल को ताकत देने वाली दवाइयां दी जाती हैं, मशीनों का सहारा लिया जाता है, या फिर बंद नसों को खोलने के लिए इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में अस्पताल की कैथ लैब और चौबीसों घंटे मौजूद डॉक्टरों की टीम की फुर्ती ही जिंदगी और मौत के बीच का फासला तय करती है।
आपकी तैयारी ही है सबसे बड़ा बचाव
आज के समय में भारत में खराब लाइफस्टाइल के चलते दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और चिंता की बात यह है कि युवा भी अब कार्डियोजेनिक शॉक जैसी गंभीर स्थितियों का शिकार हो रहे हैं।
ऐसे में, लोगों को इन लक्षणों के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। जिन परिवारों में पहले से दिल के मरीज हैं, उन्हें हमेशा तैयार रहना चाहिए। इमरजेंसी पड़ने पर मरीज को तुरंत एक ऐसे बड़े अस्पताल ले जाएं, जहां एडवांस कार्डियक सुविधाएं मौजूद हों। याद रखें, दिल के इस आपातकाल में इंसान की किस्मत घंटों से नहीं, बल्कि चंद मिनटों से तय होती है। आपकी थोड़ी-सी जानकारी और फुर्ती किसी अपने की बहुमूल्य जिंदगी बचा सकती है।
(डॉ. अनिल भान, मेदांता (गुरुग्राम) के कार्डियक केयर, कार्डियक सर्जरी और हार्ट ट्रांसप्लांट के चेयरमैन हैं)
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