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मामूली खुजली समझकर न करें नजरअंदाज! 6 हफ्ते से ज्यादा रहे चकत्ते हो सकते हैं इस गंभीर बीमारी का संकेत

By Dr. Rohit BatraEdited By: Swati Sharma
Published: Thu, 22 Oct 2026 01:34 PM (IST)

त्वचा पर 6 सप्ताह से ज्यादा समय तक बार-बार चकत्ते और खुजली क्रॉनिक यूर्टिकेरिया का संकेत हो सकते हैं।

बार-बार होने वाली खुजली को न करें नजरअंदाज (Picture Courtesy: Freepik)

बार-बार होने वाली खुजली को न करें नजरअंदाज (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। त्वचा पर बार-बार चकत्ते होना या लगातार खुजली होना कई बार आम समस्या लग सकती है। कई लोग सोचते हैं कि ये लक्षण अपने आप ठीक हो जाएंगे या किसी क्रीम से एलर्जी हो गई होगी। 

हालांकि, अगर ये आपको बार-बार परेशान कर रहे हैं या आपके रोजमर्रा के जीवन में बाधा डाल रहे हैं, तो ये चिंता का विषय है। अगर शरीर पर बार-बार चकत्ते हो रहे हैं या लगातार खुजली हो रही है, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है।

क्रॉनिक यूर्टिकेरिया क्या है?

ये एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर पर चकत्ते, सूजन या दोनों की समस्या 6 सप्ताह से ज्यादा समय तक बनी रहती है। इसका एक टाइप क्रॉनिक स्पॉन्टेनियस यूर्टिरेरिया है, जिसमें ये लक्षण बिना किसी बाहरी ट्रिगर के नजर आने लगते हैं। 

इसलिए ये समझना जरूरी है कि डॉक्टर से सलाह कब लेनी चाहिए, ताकि आप सही इलाज ले सकें और इस समस्या को बेहतर ढंग से मैनेज कर सकें। 

कई लोग बिना असली कारण समझें खुजली या चकत्तों का इलाज खुद ही करने लग जाते हैं। अगर ये समस्या आपकी नींद, काम या मेंटल हेल्थ को प्रभावित करने लगे, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलना जरूरी है। डॉक्टर आपके लक्षणों का आंकलन करते हैं और सही इलाज से इस कंडीशन को मैनेज कर सकते हैं। 

डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क कब करना चाहिए?

  • जब लक्षण बार-बार लौटकर आएं- चकत्ते की छोटी-मोटी समस्या अपने आप ठीक हो सकती है, लेकिन बार-बार दिखने वाले लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है, खासकर अगर 6 हफ्तों तक ये लक्षण दिखाई देते हैं। चकत्ते कितनी बार आ रहे हैं, कितने समय से ये समस्या हो रही है और क्या ये लक्षण आपके रोज के रूटीन को प्रभावित कर रहे हैं, तो डॉक्टर को दिखाएं।  
  • नींद और काम को प्रभावित हो- लगातार खुजली से रात में सोने में दिक्कत, चिड़चिड़ापन, दिनभर थकान और फोकस करने में परेशानी हो सकती है। इस वजह से रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में भी डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।  
  • मानसिक और भावनात्मक असर- अचानक होने वाले चकत्तों के कारण सामाजिक माहौल में व्यक्ति अनकम्फर्टेबल महसूस कर सकता है। ऐसी स्थिति में ये सिर्फ एक कॉस्मेटिक चिंता नहीं है। इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास और मेंटल हेल्थ प्रभावित हो सकती है।  
  • खुद किए इलाज से राहत न मिलना- हर बार चकत्ते का कारण खोजने के लिए लोग अपने खानपान, स्किन केयर और रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करने लगते हैं। अगर इनके बावजूद लक्षण बने रहते हैं या कारण समझ न आए कि ऐसा क्यों हो रहा है, तो भी डॉक्टर से मिलना जरूरी है। 
  • सही इलाज टलने लगे- कई बार व्यक्ति खुद ही इलाज खोजने लगता है, जिससे सही मेडिकल केयर लेने में देर होने लगती है। बिना कारण समझे इलाज ढूंढ़ना समय बर्बाद करता है। इसलिए डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलना जरूरी है। 

(डॉ. रोहित बत्रा, कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, सर गंगा राम हॉस्पिटल, दिल्ली)