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अक्सर शरीर लगता है भारी? नजरअंदाज न करें मानसिक थकान के ये शुरुआती संकेत, बचाव के लिए करें ये सुधार

By Gurumaa Yogita KhatriEdited By: Swati Sharma
Published: Tue, 06 Oct 2026 05:09 PM (IST)

कई बार काम न करने का मन करना सिर्फ आलस नहीं, बल्कि मानसिक थकान का संकेत हो सकता है, जिसके ...और पढ़ें

मानसिक थकान दूर करना भी है जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

मानसिक थकान दूर करना भी है जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कई बार सुबह उठने के बाद भी मन काम करने का नहीं करता। जरूरी काम शुरू करने में परेशानी होती है, छोटी-छोटी चीजों पर चिड़चिड़ापन होने लगता है और लगातार ऐसा महसूस होता है जैसे दिमाग थक गया हो।

ऐसे में हम अक्सर खुद को “आलसी” कह देते हैं, लेकिन हर बार काम करने का मन न करना आलस नहीं होता। कई बार इसके पीछे नींद की कमी, लगातार तनाव, बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम, अनियमित दिनचर्या या मानसिक थकान जैसी वजहें हो सकती हैं।

मानसिक थकान को समझने का मतलब खुद से किसी बीमारी का निदान करना नहीं है, बल्कि इसका मतलब है अपने शरीर और दिनचर्या के संकेतों पर ध्यान देना और यह देखना कि क्या कुछ आदतों में बदलाव की जरूरत है। शरीर में दिखने वाले कुछ संकेत बताते हैं कि आपको सिर्फ आराम नहीं, बल्कि अपने रूटीन में बदलाव करने की जरूरत है। 

अगर फोकस करने में परेशानी महसूस कर रहे हैं, रोजमर्रा के काम भी भारी लग रहे हैं, छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन बढ़ गया है, नींद के बावजूद तरोताजा महसूस नहीं करते या लगातार स्क्रीन और सोशल मीडिया के बाद मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करते हैं, तो अपनी रूटीन पर एक नजर डालना जरूरी है।

नींद के साथ समझौता करना बंद करें

फिजिकल और मेंटल एनर्जी के लिए पूरी नींद लेना जरूरी है। देर रात तक फोन चलाना और सुबह जल्दी उठना लंबे समय में आपके रूटीन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए  रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें। सोने से कम से कम कुछ समय पहले स्क्रीन और काम से दूरी बनाएं।

शरीर को एक्टिव रखें

लगातार बैठे रहने की आदत भी शारीरिक और मानसिक थकान की वजह बन सकती है। खुद को फिजिकली एक्टिव रखने के लिए आपको हर बार जिम जाने की जरूरत नहीं है। हर 45-60 मिनट में कुछ मिनट उठकर चलें। फोन कॉल के दौरान चलें, सीढ़ियों का इस्तेमाल करें और खाने के बाद थोड़ी देर टहलें। रोजमर्रा की छोटी-छोटी एक्टिविटीज भी फिजिकली एक्टिव बने रहने में मददगार साबित हो सकती हैं।

दिमाग को स्क्रीन से ब्रेक दें

काम खत्म होने के बाद भी अगर हम सोशल मीडिया, वीडियो और मैसेजिंग में बिजी रहते हैं, तो दिमाग को आराम का समय कम मिलता है। इसलिए दिन में कम से कम 20-30 मिनट का नो-स्क्रीन ब्रेक रखें। इस दौरान टहलें, परिवार से बात करें, किताब पढ़ें या कुछ देर शांत बैठें। खासकर सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना फायदेमंद हो सकता है।

मल्टी-टास्किंग की कोशिश न करें

एक साथ कई काम करने की आदत हमें ज्यादा प्रोडक्टिव महसूस करा सकती है, लेकिन लगातार टास्क स्विच करना मानसिक रूप से थकाऊ हो सकता है। इसलिए एक समय में एक ही काम पर ध्यान दें। बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटें और बीच में छोटे ब्रेक लें। अपने दिन की सिर्फ तीन जरूरी काम तय करना भी मेंटल क्लटर कम करने का एक आसान तरीका हो सकता है।

सिर्फ पेट भरने के लिए न खाएं

जब हम बिजी होते हैं, तो खाना छोड़ना, बहुत देर से खाना या लगातार प्रोसेस्ड फूड्स पर निर्भर रहना आसान हो जाता है। ये सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसकी जगह अपनी डाइट में दालें, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, प्रोटीन और दूसरी पौष्टिक चीजें शामिल करने की कोशिश करें। इसके साथ ही हाइड्रेशन पर ध्यान देना न भूलें। 

दिन में कुछ मिनट सांस पर ध्यान दें

जब हम स्ट्रेस में होते हैं, तो कई बार हमारी सांस भी तेज या उथली हो सकती है। ऐसे में कुछ मिनट शांत होकर सांस पर ध्यान देना दिन के बीच एक छोटा-सा पॉज दे सकता है। इसके लिए आराम से बैठें, कंधों को ढीला छोड़ें और बिना सांस को जबरदस्ती गहरा किए, धीरे-धीरे सांस लें और आराम से छोड़ें। इसे 2-5 मिनट तक करें। अगर चक्कर, असहजता या परेशानी महसूस हो तो प्रैक्टिस रोक दें और नॉर्मल सांस लें।

हर दिन थोड़ा समय अपने लिए निकालें

हमारा दिन अक्सर चार दीवारों और स्क्रीन के बीच गुजरता है, लेकिन थोड़ी देर बाहर निकलना, पेड़ों के बीच चलना या खुले वातावरण में बैठना मानसिक थकान दूर करने का आसान तरीका है। इसके लिए रोज 10-20 मिनट किसी पार्क, गार्डन या खुली जगह में बिना फोन के चलने की कोशिश करें। इसे एक्सरसाइज का टार्गेट न बनाएं। ये आपके दिमाग के एक रीसेट ब्रेक जैसा होना चाहिए। 

20 मिनट की आसान मेंटल वेलनेस रूटीन

अगर शुरुआत करना मुश्किल लग रहा है, तो एक आसान रूटीन अपनाएं-

  • 5 मिनट- शांत होकर सांस पर ध्यान दें।
  • 10 मिनट- बाहर टहलें, हो सके तो प्रकृति के बीच।
  • 5 मिनट- फोन से दूर बैठकर अपने दिन की प्रायोरिटी सेट करें।
  • इस छोटे रूटीन का मकसद किसी बीमारी का इलाज करना नहीं है।  

कब इसे सिर्फ थकान समझकर नजरअंदाज न करें?

अगर थकान लंबे समय तक बनी रहे, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, नींद या भूख में लगातार बदलाव आएं, लगातार उदासी या बेचैनी महसूस हो या व्यक्ति अपनी सामान्य जिंदगी संभालने में परेशानी महसूस करे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

(गुरु मां योगिता खत्री, योगा एंड नेचुरोपैथी एक्सपर्ट, वेलनेस एजुकेटर, मोटिवेशनल स्पीकर, प्रीवेंटिव वेलनेस एडवोकेट, CCRYN आयुष मंत्रालय की सदस्य)