तरुण के 'निश्चय' ने बदली कोल्हान की तस्वीर, सेनेटरी पैड के बदले लहलहा उठे 30 हजार पौधे
उम्मीदें 2026: तरुण कुमार के निश्चय फाउंडेशन ने कोल्हान क्षेत्र में मासिक धर्म से जुड़ी कुरीतियों को दूर किया है। संस्था ने डेढ़ लाख महिलाओं व युवतियो ...और पढ़ें

कोल्हान के 800 गांवों तक स्थापित की पहुंच, डेढ़ लाख महिलाएं को मिल चुका है लाभ।
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निर्मल प्रसाद, जमशेदपुर। जमशेदपुर के तरुण कुमार और उनकी संस्था 'निश्चय फाउंडेशन' ने समाज की सोच बदलने का एक अनोखा उदाहरण पेश किया है। मासिक धर्म (Periods) से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ते हुए तरुण ने न केवल महिलाओं को जागरूक किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल भी खड़ी कर दी है।
मासिक धर्म के बदले पर्यावरण का 'निश्चय'
तरुण कुमार ने कोल्हान के तीन जिलों—पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के 800 गांवों तक अपनी पहुंच बनाई है। उन्होंने युवतियों को जागरूक किया कि इस्तेमाल किए हुए सेनेटरी पैड को खुले में फेंकना पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए उन्होंने एक संकल्प जोड़ा: "एक सेनेटरी पैड निस्तारण के बदले एक पौधा लगाना।"
इस पहल का असर यह हुआ कि अब तक क्षेत्र में 30,000 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। इस मुहिम से अब तक लगभग 1.5 लाख महिलाएं और युवतियां जुड़ चुकी हैं।

धातुकीडीह: झारखंड का पहला 'वेस्ट फ्री विलेज'
इस अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी घाटशिला अनुमंडल का धातुकीडीह गांव है। सेनेटरी वेस्ट मैनेजमेंट और स्वच्छता के प्रति ग्रामीणों की सक्रियता के कारण यह गांव अब झारखंड का पहला वेस्ट फ्री विलेज बन चुका है। यह गांव आज पूरे राज्य के लिए स्वच्छता के मामले में एक रोल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
पुरानी कुरीतियों पर वैज्ञानिक प्रहार
तरुण बताते हैं कि 2015-16 में जब उन्होंने काम शुरू किया, तब समाज में मासिक धर्म पर बात करना भी वर्जित था। पीरियड्स के दौरान पेड़ न छूना, पूजा न करना और खुद को अशुद्ध मान लेना जैसी भ्रांतियां गहराई तक जमी थीं।
निश्चय फाउंडेशन ने इन मिथकों को वैज्ञानिक तर्कों से चुनौती दी। उन्होंने स्कूलों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगवाईं और युवतियों को सिखाया कि यह एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। आज फाउंडेशन की प्रशिक्षित युवतियां खुद दूसरी बच्चियों को जागरूक कर रही हैं।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मिली जगह
तरुण के इन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है और उनकी संस्था का नाम दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है।
- वर्ष 2019 में ग्रामीण लड़कियों को सेनेटरी पैड उपहार में देने के लिए।
- वर्ष 2020-22 के दौरान लॉकडाउन में महिलाओं तक सेनेटरी पैड पहुंचाने के लिए।

मिशन: सरवाइकल कैंसर से बचाव
मास्टर ऑफ सोशल वर्क कर चुके तरुण का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को गंभीर बीमारियों से बचाना है। उनका कहना है कि गंदा कपड़ा इस्तेमाल करने से न केवल संक्रमण होता है, बल्कि यह सरवाइकल कैंसर और यूरिन संबंधी समस्याओं का मुख्य कारण बनता है।
उनका लक्ष्य हर युवती को जागरूक कर उन्हें एक स्वस्थ जीवन देना है। झारखंड से शुरू हुई यह मुहिम अब बिहार और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में भी अपना प्रभाव दिखा रही है।
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