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हिमाचल में पेयजल योजनाओं का संचालन अब पंचायतों के हाथ, समिति में होंगी 50 प्रतिशत महिलाएं; अधिसूचना में और क्या?

By Jagran News Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 03 Jan 2026 11:40 AM (IST)

Himachal Panchayat News, हिमाचल प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत पेयजल योजनाओं के संचालन, रखरखाव और मरम्मत का ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में पंचायतें अब पेयजल योजनाओं का संचालन करेंगी।

हिमाचल प्रदेश में पंचायतें अब पेयजल योजनाओं का संचालन करेंगी।

HighLights

  1. पेयजल योजनाओं का संचालन अब पंचायतों के अधीन।

  2. समितियों में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य।

  3. ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन होगा।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के तहत आने वाली पेयजल योजनाओं के संचालन, रखरखाव व मरम्मत कार्य पंचायतों को सौंप दिया है। पंचायती राज विभाग की तरफ से जल जीवन मिशन के तहत यह कार्य सौंपा गया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।

पंचायत स्तर पर समिति में 50 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य है। प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पंचायत क्षेत्र के भीतर पेयजल आपूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) से जुड़े कार्यों को संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंपा है। इसके लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

इस निर्णय से ग्रामीणस्तर पर जल प्रबंधन में स्थानीय भागीदारी बढ़ेगी और योजनाओं का बेहतर रखरखाव सुनिश्चित होगा। जल सेवा शुल्क निर्धारित व वसूली का अधिकार पंचायत को दिया गया है। केंद्र, राज्य वित्त आयोग और अन्य अनुदानों का उपयोग केवल जल आपूर्ति के संचालन-रखरखाव के लिए होगा।

समिति का होगा गठन 

प्रत्येक पंचायत में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) का गठन अनिवार्य किया गया। पंचायत की सभी निर्वाचित महिला पदाधिकारी (प्रधान, उपप्रधान, सदस्य) समिति की सदस्य होंगी। समिति में कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होंगी। पंचायत प्रस्ताव के माध्यम से समिति के एक सदस्य को अध्यक्ष नामित किया जाएगा। 

गांव के सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं और हाशिए के समुदायों को बैठकों में विशेष आमंत्रित के रूप में शामिल किया जाएगा। जल आपूर्ति योजनाओं से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन का प्रबंधन वीडब्ल्यूएससी करेगी।

संचालन एवं रखरखाव व संपत्ति प्रबंधन

गांव की जल आपूर्ति प्रणाली के नियमित संचालन और मरम्मत की जिम्मेदारी पंचायत की होगी। पंप आपरेटर, तकनीशियन और आवश्यक कर्मियों की सेवाएं ली जा सकेंगी, लेकिन स्थायी नियुक्ति राज्य सरकार की अनुमति के बिना नहीं होगी। पेयजल से संबंधित सभी परिसंपत्तियों का विवरण ग्राम संपत्ति रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। उचित निगरानी और रखरखाव सुनिश्चित करना होगा। 

फील्ड टेस्ट किट से जल गुणवत्ता परीक्षण और मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में आवधिक जांच करवानी होगी। परीक्षण परिणामों की जानकारी समुदाय को देना अनिवार्य किया है। बिखरी बस्तियों सहित हर ग्रामीण परिवार तक जल कनेक्शन व सेवा सुनिश्चित करनी होगी।

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