हिमाचल में छात्रा की मौत: सख्त नियमों के बावजूद क्यों नहीं थम रहे रैगिंग के मामले, धर्मशाला कॉलेज से पहले भी हुई ये 3 घटनाएं
हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला कॉलेज की छात्रा की मौत के बाद रैगिंग के मामले फिर चर्चा में हैं। सख्त नियमों के बावजूद शिक्षण संस्थानों में रैगिंग जारी है। ...और पढ़ें

धर्मशाला कॉलेज में रैगिंग के बाद प्रताड़ना से अवसाद में आकर छात्रा की मौत हो गई। प्रतीकात्मक फोटो
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला की छात्रा के कथित प्रताड़ना से मौत के बाद रैगिंग की बात फिर सामने आई है। सख्त नियम होने के बावजूद प्रदेश में रैगिंग के मामले थम नहीं रहे हैं। प्रदेश में प्रताड़ना, रैगिंग की यह पहली घटना नहीं है। पहले भी शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की घटनाएं आती रही हैं।
सख्त नियम होने के बावजूद महाविद्यालय परिसर व छात्रावासों में रैगिंग होती है। ज्यादातर विद्यार्थियों को पता ही नहीं होता कि नियम है क्या। इसी कारण वे रैगिंग का शिकार हो जाते हैं।
इसे माना जाएगा रैगिंग
- महाविद्यालय व छात्रावासों में किसी भी छात्र या छात्रा को उसके रंग-रूप, पहनावे, जाति व धर्म के आधार पर अपमानजनक शब्द बोलना प्रताड़ना व रैगिंग की श्रेणी में आता है। यहां तक कि अजीबोगरीब नाम से भी नहीं बुलाया जा सकता। ये भी रैंगिंग की ही श्रेणी में आता है।
- जूनियर छात्रों से जबरदस्ती कोई ऐसा काम करने के लिए दबाव बनाना जो उसे बुरी तरह तोड़ दे, शर्मिंदगी महसूस करवाए या मानसिक रूप से प्रताड़ित करें।
- जूनियर से निजी काम करवाना भी रैगिंग के दायरे में आता है।
क्या है नियम
- शिक्षण संस्थान में यदि रैगिंग का मामला सामने आता है तो सात दिन में कार्रवाई करनी होती है।
- शिकायत पर जांच बिठाना अनिवार्य है। यदि प्रशासन के ध्यान में ऐसा मामला आता है तो स्वत: संज्ञान लेकर भी जांच की जा सकती है।
- पकड़े जाने पर सजा व जुर्माने का प्रविधान है।
- दोषी को कालेज से भी निकाला जा सकता है।
- यदि कोई सही समय पर कार्रवाई नहीं करता है या फिर टालने की कोशिश करता है तो फिर उस पर भी कार्रवाई होती है।
यह भी है निर्देश
यूजीसी ने एंटी रैगिंग हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। शिकायत आने पर संबंधित कॉलेज को इसे रेफर किया जाता है। प्रोस्पेक्टस में इसे प्रकाशित करना अनिवार्य किया गया है। हर कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी गठित होना अनिवार्य है।
केस स्टडी
इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज (आइजीएमसी) शिमला में 24 दिसंबर, 2025 को रैगिंग का मामला सामने आया था। जूनियर डाक्टरों ने शिकायत में आरोप लगाया था कि नियमों के विरुद्ध उन्हें हास्टल में बुलाया गया। प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दो प्रशिक्षु वरिष्ठ डाक्टरों को तीन माह के लिए निलंबित किया है। इन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। यह कार्रवाई जूनियर डाक्टरों की ओर से रैगिंग की शिकायत के बाद गठित अनुशासनात्मक कमेटी की सिफारिश पर की गई थी।
यहां भी सामने आए मामले
- हमीररपुर जिले के सुजानपुर टीहरा स्थित सैनिक स्कूल में रैगिंग का मामला सामने आ चुका है। बारहवीं कक्षा के छह छात्रों के आठवीं कक्षा के छात्र से रैगिंग करने के मामले की जांच चल रही है।
- मंडी जिले के नेरचौक स्थित मेडिकल कालेज में रैगिंग का मामला आया था, जिसमें शिकायतकर्ता ने बाद में शिकायत वापस ले ली थी।
- सिरमौर जिले के मेडिकल कालेज नाहन में सात मार्च, 2024 को रैगिंग का मामला सामने आया था, जिसमें नौ एमबीबीएस प्रशिक्षुओं को तीन माह के लिए निलंबित किया गया था। चार दिसंबर, 2024 को भी रैगिंग का एक अन्य मामला सामने आया था, जिसमें सात एमबीबीएस प्रशिक्षुओं को तीन माह के लिए निलंबित किया गया है।
शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक माहौल बना रहे इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हर कालेज में एंटी रैगिंग कमेटी गठित है। शैक्षणिक सत्र के पहले दिन कालेज में शिक्षक विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। उन्हें नियमों की जानकारी दी जाती है। धर्मशाला की घटना सामने आई है उस पर तुरंत संज्ञान लेकर जांच बिठा दी है।
-रोहित ठाकुर, शिक्षा मंत्री।
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